जिस जिलाधिकारी पर होती है नदी बचाने की जिम्मेदारी, उसी का आवास बन गया नदी पर

उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन, नदी तालाब और चारागाहों से अतिक्रमण हटाने के लिए एंटी भू-माफिया सेल है। लेकिन जब नदी पर कब्जा कर जिलाधिकारी का ही आवास बना दिया गया हो तो उसे कब्जा मुक्त कौन कराए?

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   29 July 2019 10:05 AM GMT

भदोही (उत्तर प्रदेश)। तालाब, पोखरों और चारागाहों पर कब्जे की बात तो सुनने में आती हैं, लेकिन नदी पर कब्जा करके जिलाधिकारी का अवास बना देना, अचंभित करता है।

इसी उत्तर प्रदेश में सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाने के अभियान चलते हैं, एक एंटी भू-माफिया सेल भी बनाया गया है, उसी प्रदेश के भदोही जिले में नदी को घेर कर जिलाधिकारी अवास से बना दिया गया।

भदोही जिले के सुरियावां ब्लॉक में बने जिला मुख्यालय से लगभग 500 मीटर की दूरी पर डीएम आवास भी बना हुआ है। वर्ष 2005 में बने डीएम आवास के अंदर से मोरवा नदी बह रही है। नदी को एक तरफ से बाउंड्रीवॉल से घेर दिया गया है। बहाव को तो नहीं रोका गया है लेकिन उसके बेल्ट पर कब्जा किया गया है। जिलाधिकारी आवास का निर्माण उत्तर प्रदेश जल निगम, भदोही द्वारा कराया गया है।

मोरवा नदी गंगा के बाद भदोही की प्रमुख नदी है। जिले की आधे से ज्यादा कृषि इसी पर निर्भर है। नदी भदोही के लगभग 56 गाँवों से होकर गुजरी है। डीएम आवास के अंदर नदी का लभगग 300 मीटर का क्षेत्र है जिसे एक साइड से बाउंड्री के अंदर ले लिया गया है।

"हां, निर्माण अवैध तो है ही। जब इसका निर्माण हुआ था तब तो मैं यहां था नहीं। निर्माण एजेंसियों को इस पर ध्यान देना चाहिए था। मैं मामले को जल्द ही दिखवाता हूं।"

राजेंद्र प्रसाद, जिलाधिकारी, भदोही

धारा 133 सीआरपीसी के तहत जिलाधिकारी और मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार होता है कि वे किसी भी नदी या तालाब को कब्जा मुक्त करा सकते हैं। सूचना मिलने पर उन्हें इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इसी धारा के तहत ये नियम भी है कि नदी की धारा या भूमि पर कोई ऐसा अवरोध नहीं लगाया जा सकता जिससे उसके उपयोग में आम लोगों को परेशानी हो। चारदीवारी बनाकर नदी के प्रवाह को रोका नहीं जा सकता और नदी या तालाब का निजी तौर पर इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता।

भदोही कलेक्ट्रेट का मैप। 2 नंबर में डीएम आवास का बना हुआ है।

नदी विशेषज्ञ डॉ. वेंकटेश दत्ता कहते हैं, ''इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व में एक निर्णय दिया था जिसमें इलाहाबाद में गंगा-यमुना नदी के तट से 500 मीटर तक की दूरी पर किसी भी प्रकार का नवीनीकृत निर्माण कार्य नहीं होगा।"

"यह 500 मीटर नदी के बीच से दोनों किनारों तक 250-250 मीटर था। इस आदेश को अधार बनाते हुए ही नदी के आस-पास विकास करना चाहिए, क्‍यों‍कि नदी का एक ब्रीथिंग स्‍पेस होता है। इसके साथ छेड़छाड़ करना सही नहीं है, लेकिन नियम मानता कौन है। इन कब्‍जों की वजह से नदी के बहाव पर भी असर हो रहा है।'' वेंकटेश दत्ता आगे कहते हैं।


मोरवा नदी का उद्गम स्थल प्रयागराज के केहूनी में बताया जाता है। भदोही में लगभग 45 किमी का सफर करते हुए नदी वाराणसी के वरुणा नदी में जाकर मिलती है और गंगा की सहायक नदी है। तीन दशक पहले तक मोरवा भदोही की लाइफलाइन कही जाती रही थी।

समय के साथ-साथ नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। हालांकि, 2014 में सांसद वीरेंद्र सिंह ने मोरवा नदी को बचाने का प्रयास किया। उस समय जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने इसके लिए कमेटी का गठन भी किया था। इसका असर अब यह है कि कभी सात महीने तक सूखी रहने वाली नदी में अब मई-जून में भी पानी दिख जाता है। लेकिन नदी को डीएम आवास के कब्जे से मुक्त नहीं कराया जा सका।

डीएम आवास की बाउंड्रीवाॅल और अंदर से बहती नदी।

भदोही बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वकील एसपी दुबे कहते हैं, "बाउंड्रीवॉल बनाने से जाहिर सी बात है नदी के पानी के बहाव में बाधा में आती होगी। अगर नियमों की बात करें तो भारतीय संविधान और केन्द्रीय रिवर बोर्ड अधिनियम के अनुसार किसी भी प्राकृतिक संपदा नदी, तालाब आदि पर कब्जा नहीं किया जा सकता है। लेकिन चूंकि बात डीएम की है तो कोई बोलता ही नहीं।"

उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी जमीन, नदी तालाब और चारागाहों को बचाने के लिए एंटी भू-माफिया अभियान चलाती है। एंटी भू-माफिया सेल की वेबसाइट के पहले पेज पर ही लिखा है कि भू-माफिया से सरकार और निजी सम्पत्तियों को अतिक्रमण से बचाने के लिए एंटी भू-माफिया सेल का गठन किया गया है।

मोरवा नदी के अस्तित्व पर जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक संजय सिंह कहते हैं, "नदी का अपना एक क्षेत्र होता है। हाई फ्लड जोन (तीव्र बहाव का क्षेत्र), येलो और ब्लैक जोन में नदी बंटी होती है। नदी के जोन में निर्माण कराया ही नहीं जा सकता और नदी के बहाव या उसके प्रारूप से छेड़छाड़ तो बड़ा अपराध है।"

भदोही के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण के विषयों पर काम करने वाले संजय श्रीवास्तव कहते हैं, "साल 2013-14 में हमने इस विषय पर अधिकारियों से शिकायत की थी। उसके बाद हुआ यह कि डीएम आवास के अंदर के साइड एक और दीवार खड़ी कर दी गई, लेकिन अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया।"


"ऐसा नहीं है कि नदी बस वही होती जिस क्षेत्र से पानी बहता है। जहां से पानी बहकर नदी में मिलता है और कछार क्षेत्र में नदी का हिस्सा होता है, ऐसे में उस पर कब्जा नहीं किया जा सकता है। ऐसा मामला तो पूरे देश में शायद ही कहीं देखने को मिले," संजय श्रीवास्तव आगे कहते हैं।

गूगल मैप से देखने पर भी साफ दिखता है कि मोरवा नदी डीएम आवास के अंदर से होकर गुजरी है। इस मामले में भदोही, ज्ञानपुर की एसडीएम कविता मीना ने कहा, "मुझे इस मामले में कोई जानकारी नहीं है, मैं अभी यहां नई हूं। बिना अभिलेख देखे या पूरी जानकारी लिए इस मामले में कुछ नहीं बोल सकती।"

लाल रेखा नदी है। नीली वाली लाइन बाउंड्रीवाॅल है। (गूगल इमेज)

भदोही में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार हरीश सिंह बताते हैं, "मोरवा नदी की साफ-सफाई के लिए पिछले साल काफी काम किया गया, लेकिन आश्चर्य वाली बात यह है कि जब प्रशासन ही अतिक्रमण करेगा तो वो अतिक्रमण हटवायेगा कैसे। ये गंभीर मामला है, इसे जल्द से जल्द संज्ञान में लिया जाना चाहिए।"

"भारतीय संविधन में इसका उल्लेख है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था प्राकृतिक संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकती। राज्य सरकार के पास संपत्तियों की सुरक्षा का अधिकार होता है। अगर कहीं अतिक्रमण की खबर मिले तो जिलाधिकारी और मजिस्ट्रेट को उस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए," हरीश कहते हैं।

डीएम के आवासीय कार्यालय के अंदर की तस्वीर।

इतने सालों से नदी पर कब्जा है, लेकिन किसी विभाग ने इस ओर ध्यान तक नहीं दिया। इस बारे में ज्ञानपुर के तहसीलदार देवेंद्र कहते हैं, "नदी को बाउंड्री के अंदर तो लिया ही नहीं जा सकता है। जिस समय आवास का निर्माण किया गया होगा तो उस समय हमारे विभाग से ही इसे पास किया गया होगा। उस समय इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया, इस पर मैं अभी कुछ नहीं कह सकता हूं।"

(इस मामले में भदोही जल निगम के अधिशासी अभियंता से भी संपर्क करने को कोशिश की गई, लेकिन माैके पर वे मिले नहीं और जब फोन पर उनसे इस संबंध में बात करने को कोशिश की तो उन्होंने कहा कि मामला बहुत पुराना है, इसलिए मैं कोई जानकारी नहीं दे सकता)।

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