क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामला, जाने किस-किस की गई थी कुर्सी और किसे जाना पड़ा था जेल

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामला, जाने किस-किस की गई थी कुर्सी और किसे जाना पड़ा था जेलक्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामला

2जी घोटाला मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आज ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। बहुत से लोग होंगे जिनको शायद यह नहीं पता होगा कि 2जी घोटाला मामला क्या है। इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि क्या है 2जी घोटाला मामला और इसमें अभी तक कब क्या हुआ...

2जी घोटाला मामला वर्ष 2010 में सामने आया जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रूपयों का नुकसान हुआ था। आरोप था कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर होते तो खजाने को कम से कम एक लाख 76 हजार करोड़ रूपयों और प्राप्त हो सकते थे।

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2जी घोटाला मामले में कब क्या हुआ?

  • 16 मई 2007 : ए राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया।
  • 25 अक्तूबर 2007 : केंद्र सरकार ने मोबाइल सेवाओं के लिए 2जी स्पेक्ट्रम की निलामी की संभावनाओं को खारिज किया।
  • 2 नवंबर 2007 को प्रधानमंत्री ने राजा को चिट्ठी लिखकर आवंटन में पारदर्शिता बरतने और फीस के ठीक से रिव्यू करने को कहा। राजा ने पीएम को चिट्ठी लिखकर कहा कि मेरे कई सिफारिशों को खारिज कर दिया गया है।
  • 22 नवंबर 2007 को वित्त मंत्रालय ने टेलीकॉम विभाग को चिट्ठी लिखकर लाइसेंस देने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर अपने चिंताओं से अवगत करवाया।
  • सितम्बर-अक्तूबर 2008 : दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए।
  • 15 नवंबर 2008 : केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफ़ारिश की।
  • 21 अक्तूबर 2009 : सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए मामला दर्ज किया।
  • 22 अक्तूबर 2009 : मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की।
  • 17 अक्तूबर 2010 : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया।
  • नवंबर 2010 : दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप की।
  • 14 नवम्बर 2010 : राजा ने इस्तीफा दिया।
  • 15 नवम्बर 2010 : मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
  • नवम्बर 2010 : 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में गतिरोध जारी रहा।
  • 13 दिसम्बर 2010 : दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया। इसे दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।
  • 24 और 25 दिसम्बर 2010 : राजा से सीबीआई ने पूछताछ की।
  • 31 जनवरी 2011 : राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की। एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • दो फरवरी 2011 : 2जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
  • 17-18 फरवरी, 2011 को डी राजा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
  • 14 मार्च, 2011 को इस मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष अदालत का गठन किया।
  • 2 अप्रैल, 2011 को सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।
  • 25 अप्रैल, 2011 को सीबीआई ने दूसरी चार्जशीट दाखिल की जिसमें डीएमके नेता कनीमोडी का भी नाम शामिल था।
  • 11 नवंबर, 2011 को विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई।
  • 12 दिसंबर, 2011 को सीबीआई ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की।
  • 2 फरवरी, 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने राजा के कार्यकाल में हुए 2जी लाइसेंस के आवंटनों को रद्द करके, 4 महीने के भीतर लाइसेंस के लिए फिर से निविदा मंगवाने को कहा।
  • 1 जून, 2015 को ईडी ने कहा कि कलईगनर टीवी को 2जी आवंटन से 200 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा है।
  • 19 अप्रैल, 2017 को इस केस की सुनवाई खत्म हुई।
  • 21 दिसंबर 2017 सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

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