युवाओं का गणित में रुझान कम हाेने के पीछे ये हैं कारण 

युवाओं का गणित में रुझान कम हाेने के पीछे ये हैं कारण असर की रिपोर्ट के मुताबिक युवाओं को गणित के सवानों को हल करने में दिक्कत होती है।

सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तरह तरह की योजनाएं चला रही हैं लेकिन हाल ही में जारी हुई शिक्षा पर असर की रिपोर्ट ने सारी पोलें खोल दीं। रिपोर्ट में करीब 40 फीसद युवा ऐसे हैं जो 12 वीं के आगे पढ़ना ही नहीं चाहते।

कक्षा 9 में पढ़ने वाले प्रतीक अभी भी बड़ी संख्याएं जोड़ने में गलतियां कर देता है। इसलिए उसे गणित विषय बिल्कुल नहीं पसंद लेकिन मजबूरी में पढ़ना पढ़ रहा है।

प्रतीक कुमार (15वर्ष) बताता है, “मुझे गणित विषय अच्छा ही नहीं लगता, मुझे इससे डर लगता है। मैं पहले गाँव में पढ़ता था कक्षा पांच तक उसके बाद शहर में कक्षा पांच से दोबारा एडमिशन हुआ। गाँव वाले स्कूल में मुझे कुछ पढ़ाया नहीं गया इसलिए यहां मुझे गणित समझ नहीं आती।”

असर (एनुअल स्टेटस एजुकेशन) की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 वर्ष की आयु के 60 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो गणित के मामले में कुछ कच्चे हैं। आधे से ज्यादा युवा ऐसे हैं, जो गणित का भाग करने में कठिनाई का सामना करते हैं। गणित के बुनियादी सवाल हल करने के मामले में 14 साल के और 18 साल के युवाओं का प्रतिशत एक बराबर ही रहा। करीब 25 फीसद युवा ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में एक सरल पाठ को धारा प्रवाह रूप में नहीं पढ़ सकते। इसी तरह 12वीं के आगे पढ़ाई करने वाले युवाओं में करीब 35 फीसद ऐसे हैं, जो दूसरी कक्षा की भी किताब नहीं पढ़ पाते हैं।

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शिक्षा को लेकर सरकार के इतने प्रयासों के बाद भी उसकी गुणवत्ता का स्तर इतना कम क्यों हैं। इस बारे में लखनऊ विश्वविद्यालय की शिक्षाविद् मधुबाला बताती हैं, “अक्सर ऐसी रिपोर्ट आती है कि कक्षा पांच के बच्चे हिंदी के शब्द नहीं पढ़ पाते या अंग्रेजी के शब्द नहीं लिख पाते तो इसके पीछे का कारण शिक्षा की गुणवत्ता में कमी है। बच्चों का बेस ही कमजोर होता है ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चे।”

वो आगे बताती हैं, “सरकारी स्कूल में पढ़ाई नाम के लिए होती है ऐसे में बेसिक चीजें उन्हें पता नहीं होती और वो आगे की क्लास में चले जाते हैं चूंकि हमारे यहां फेल करने का भी नहीं है नियम कक्षा आठ तक तो नौंवी में जब पहुंचते हैं तो उन्हें ये सब दिक्कतें आती हैं।”

विश्व बैंक ने सितंबर 2017 में जारी रिपोर्ट में वैश्विक शिक्षा में ज्ञान के संकट की चेतावनी दी थी, रिपोर्ट में कहा गया कि कई देश के लाखों युवा छात्र के बाद का जीवन में नौकरी के कम अवसर व कम वेतन का सामना करते हैं क्योंकि उन्होंने अपने प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल में बहुत कम सीखा होता है।

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बच्चों का रुझान पढ़ाई में तभी होगा जब वो उसमें रुचि लेगें। रटने से वो परीक्षा में तो पास हो जाएंगें लेकिन उनका ज्ञान नहीं बढ़ पाता है। लखनऊ के बालमनोचिकित्सक डॉ नम्रता सिंह बताती हैं, “बच्चों को जब अच्छा माहौल मिलता है तो वो तेजी से सीखते हैं और वो दिमाग में लंबे समय तक रहता है। हमारे यहां पढ़ाई को रोचक बनाने के बजाय उसे ऐसा बना दिया गया है कि बच्चा तनाव में रहने लगता है। वो जबरदस्ती पढ़ता है इसलिए वो जो सीखता भी है वो ज्यादा देर तक दिमाग नहीं रहता।”

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