लखीमपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड वैक्सीनेशन में क्यों आ रही मुश्किलें? तय टारगेट से बहुत पीछे हो रहा टीकाकरण

भारत पांच अप्रैल को एक दिन में कोविड-19 का सबसे ज्यादा टीका लगाने वाला देश बन गया है। पिछले 24 घंटे में देश में 4.3 मिलयन से अधिक लोगों को कोविड वैक्सीनेशन दिया गया। लेकिन ग्रामीण इस टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों पर क्यों नहीं पहुंच रहे? पढ़िए लखीमपुर खीरी से ग्राउंड रिपोर्ट

Neetu SinghNeetu Singh   6 April 2021 3:43 PM GMT

लखीमपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड वैक्सीनेशन में क्यों आ रही मुश्किलें? तय टारगेट से बहुत पीछे हो रहा टीकाकरण

लखीमपुर खीरी जिले के बिजुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 5 अप्रैल को कोविड-19 वैक्सीन लगाई जा रही है. फोटो : मोहित शुक्ला   

सूरमा (लखीमपुर खीरी)। देश में कोविड के नये बढ़ते मरीजों की संख्या से बेखबर 65 वर्षीय घुम्मा राना भरी दोपहरी में छप्पर के नीचे चारपाई पर सुस्ता रही थीं।

कोरोना का संक्रमण फिर से फ़ैल रहा है, आपने अभी इसका टीका लगवाया है? ये पूछने पर घुम्मा राना मुस्कुराते हुए बोलीं, "कोरोना का टीका कहाँ लग रहा है? हमें अभी इसकी खबर नहीं है। वैसे भी कोरोना शहर की बीमारी है, जंगलों में कोरोना कहाँ रखा?"

अभी सरकारी आंकड़े ऐसा कह रहे हैं कि जो भी कोरोना के नये केस रिपोर्ट हो रहे हैं उसमें आधे केस गाँव से हैं, ये पूछने पर घुम्मा कुछ देर ठहाके लगाकर हंसी फिर बोलीं, "जब हमारे यहाँ इसकी (कोविड) जांच ही नहीं हुई तो केस कैसे ज्यादा आये? हमारे यहाँ अभी किसी ने टीका नहीं लगवाया। किसी को पता ही नहीं है कि टीका कबसे लगना शुरू हुआ?"

घुम्मा राना यूपी के सबसे बड़े जिले लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर पलिया ब्लॉक के सूरमा गाँव की रहने वाली हैं। सूरमा गाँव जंगलों से चारो तरफ से घिरा है, मुख्य सड़क से जंगल के अन्दर तीन किलोमीटर दूरी पर बसा है ये गाँव।

ये हैं सूरमा गाँव की आशा कार्यकर्ता दयावती राना. फोटो : नीतू सिंह

गाँव कनेक्शन की टीम पांच अप्रैल को जब जिले के बिजुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची तो वहां कोविड वैक्सीनेशन हो रहा था। यहाँ आने वाले कुछ एक लोगों ने ही चेहरे पर मास्क पहने थे, टीकाकरण कर रही टीम में से भी कुछ स्वास्थ्यकर्मी मास्क नहीं पहने थे।

देश में कोविड के रोज नये मामले बढ़ रहे हैं, पिछले 24 घंटे में 96,982 नये मामले दर्ज हुए हैं। पांच अप्रैल को एक लाख से अधिक कोविड-19 के नये मामले दर्ज हुए हैं। देश के आठ राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात में कोरोना के नये केसेज का 80% हिस्सा है।

दुनियाभर में भारत पांच अप्रैल को एक दिन में कोविड-19 का सबसे ज्यादा टीका लगाने वाला देश बन गया है। पिछले 24 घंटे में देश में 4.3 मिलयन से अधिक लोगों को कोविड वैक्सीनेशन दिया गया। देश में अबतक 83 मिलियन वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है, लेकिन ग्रामीण भारत में अभी भी इसकी रफ्तार कम है। तय टारगेट भी पूरा नहीं हो पा रहा है। लेकिन ऐसा हो क्यों रहा है?

बिजुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने बताया, "एक अप्रैल से 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को कोविड वैक्सीन का टीका लगना शुरू हो गया है। इस सामुदायिक केंद्र के अलावा तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी टीकाकरण हो रहा है। सभी आशा कर्यकर्ताएं घर-घर जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक कर रही हैं। गाँव के लोगों में अभी भी एक भ्रम है कि कोरोना शहर की बीमारी है गाँव की नहीं।"

भूड़ा गाँव की पूर्व प्रधान अनीता राना का मानना है कि जंगल में रहने वाले लोगों को कोरोना नहीं हो सकता. फोटो : नीतू सिंह

यहाँ मौजूद एक आशा कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, "गाँव में कोई कोरोना नहीं मानता। वैक्सीन के लिए चाहें जितना कहो कोई आने को तैयार ही नहीं है। जब 10 लोगों से कहते हैं तब बहुत मुश्किल से एक दो लोग लगवाने आते हैं। गाँव में रहना है तो किसी से ज्यादा जबरजस्ती नहीं कर सकते, लोग मजदूरी करते हैं, अपना खेतों में काम करते हैं, सब छोड़कर टीका लगवाने कौन आएगा?"

गाँव कनेक्शन की टीम तीन अप्रैल को सूरमा गाँव में पहुंची थी। इस गाँव की आशा कार्यकर्ता दयावती राना (42 वर्ष) ने बताया, "हमने कोरोना के दोनों टीके लगवा लिए हैं। ऊपर से अभी ऐसी खबर नहीं मिली है कि 45 साल से ऊपर के लोगों को टीका लगवाने के लिए अस्पताल ले आना है।"

कोरोना से बचाव के लिए आपके यहाँ लोग क्या सावधानियां बरत रहे हैं? इस पर दयावती ने कहा, "हमारे यहाँ इस साल अभी कोरोना नहीं फैला है, आसपास एक भी केस सुनने में नहीं आये हैं। पिछले साल लोग मास्क लगाकर निकलते थे, वापस आकर साबुन से हाथ धुलते थे लेकिन इस बार अभी सब ऐसे ही घूम रहे हैं। अगर कोरोना फिर से बढ़ेगा तो हम फिर से सबको बोलेंगे कि सावधानी रखें।"

जिले के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "एक सामुदायिक केंद्र को प्रतिदिन 1,000 कोविड वैक्सीन लगाने का टारगेट है लेकिन 200-250 से ज्यादा टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। पूरे अप्रैल महीने में जिले को टार्गेट दिया गया है कि 45 साल से ज्यादा उम्र के 17 लाख लोगों में कोविड वैक्सीन लगनी है।"

उन्होंने आगे कहा, "जिले में 15 ब्लॉक हैं। हर ब्लॉक को टारगेट दिया गया है। गाँव में कोरोना के संक्रमण को लेकर अभी जागरुकता बहुत कम है। आशा, आंगनवाड़ी घर-घर जाकर लोगों को ला रहे हैं लेकिन फिर भी तय टारगेट के तिहाई वैक्सीन भी नहीं हो पा रहा। रोज ओपीडी में 45 साल से ऊपर उम्र के जो लोग आते हैं उनका टीकाकरण तो हम यहीं करा देते हैं।"

बिजुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित सिंह ओपीडी में मरीजों को देखते हुए. फोटो : मोहित शुक्ला

गाँव कनेक्शन की टीम ने बीते तीन दिनों में जिले में यह पाया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर ग्रामीणों में जागरुकता की बहुत कमी है। गिनती के कुछ एक लोग ही मास्क पहने हुए दिखे। सोशल डिस्टेंसिंग और बार-बार हाथ ढोने की आदत कहीं नहीं दिखी।

एक अप्रैल को यूपी के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, अमित मोहन प्रसाद ने प्रेसवार्ता कर बताया, "प्रदेश में 5,000 केन्द्रों पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकारी केन्द्रों पर यह टीकाकरण नि:शुल्क हो रहा है जबकि निजी अस्पताल 250 रुपए फीस लेकर वैक्सीन लगा रहे हैं। अब तक 11 लाख से अधिक लोग वैक्सीनेशन की दो डोज लगवा चुके हैं। जिनकी दो डोज पूरी हो गयी है उनमें 99.5% कोरोना संक्रमण होने की उम्मीद नहीं है। जिनमे दोबारा हुआ भी है उनमें गंभीर लक्षण देखने को नहीं मिले।"

अमित मोहन प्रसाद ने आगे कहा, "कोई भी व्यक्ति इस भ्रम में बिल्कुल न रहे कि ये शहर की बीमारी है। अभी कोरोना के जो नये केसेस आये हैं हमने उनका विश्लेषण किया है जिसमें पाया है कि करीब आधे केस ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जो लोग रहते हैं वो शीघ्रतापूर्वक टीकाकरण करवा लें।"

भूड़ा गाँव की पूर्व प्रधान अनीता राना (45 वर्ष) कहती हैं, "हम लोग बहुत मेहनत करते हैं। पूरे दिन जंगल में घूमते हैं, धूप में रहते हैं, हम लोगों को ये बीमारी नहीं हो सकती। ये बीमारी नहीं है गरीब लोगों को परेशान करने की एक चाल है। हमें टीका पर भरोसा नहीं है। अगर ये टीका लगेगा भी तो हमारे यहाँ कोई ये टीका लगवाने को तैयार नहीं होगा।"

कोरोना की इस समय सबसे खराब स्थिति वाले राज्यों में से दिल्ली में पिछले 24 घंटों में 3,548 मामले दर्ज किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने छह अप्रैल को एक ट्वीट कर ये जानकारी दी है कि दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को छह अप्रैल से 30 अप्रैल तक रात में 10 बजे से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू रहेगा।

यूपी के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, अमित मोहन प्रसाद ने भी यह जानकारी दी है कि प्रदेश में महामारी नियंत्रण अधिनियम जो 31 मार्च तक लागू था अब वो बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा, "आप जितने जल्दी टीका लगवाएंगे उतने जल्दी सुरक्षित रहेंगे। इस बार संक्रमण बहुत तेजी से फ़ैल रहा है, जिन तरीकों से संक्रमण बचता है उन्हें अपनाना बहुत जरूरी है। हम देख रहे हैं ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा केस मिल रहे हैं, पिछले साल जिन ग्राम निगरानी समितियों ने अच्छा काम किया था उन्हें हम फिर से सक्रिय करेंगे जिससे इस संक्रमण को नियन्त्रण किया जा सके।"

रिपोर्टिंग में सहयोग : मोहित शुक्ला कम्युनिटी जर्नलिस्ट, सीतापुर


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