विश्व गौरेया दिवस: लौट रही गौरैया की फुदकन और चीं-चीं की आवाज

विश्व गौरेया दिवस: लौट रही गौरैया की फुदकन और चीं-चीं की आवाजप्रतीकात्मक तस्वीर फोटो: इंटरनेट

ललितपुर। बहुत पुरानी बात नहीं हैं जब हर घर में गौरैया की फुदकर और चीं-चीं की आवाज सुनने को मिलती थी। अब वो गाँवों सहित शहरों में कम ही दिखती हैं। जमाना बदला तो छप्पर के स्थानों पर पक्की इमारतों, बढ़ते ध्वनि प्रदूषण व जंगलों की कमी से गौरैया की संख्या में कमी आई, जिससे गौरेया बचाने की जरूरत पड़ी।

"पढ़ाई के दौरान झांसी में किराये के कमरे में रहा करता था। कमरे के रोशनदान में गौरैया ने एक-एक तिनका जोड़कर घोंसला बनाया कुछ दिन बाद मकान मालिक आया और गौरैया के घोंसले को हटाने लगा। मैंने उन्हें टोका और कहा घोंसले को मत हटाओ बल्कि इस घोसले का पचास रुपया अलग से किराया हमारे किराए में जोड़ दें। तब जाकर वह मानें और गौरैया का घर उजड़ने से बच गया। मुझे मालूम हुआ गौरैया की संख्या दिनों दिन कम हो रही है। उसे बचाने के लिए काम करना चाहिए।" ये बातें गौरैया बचाओ अभियान में साझीदार वन पर्यावरण बचाने के लिए जनपद ललितपुर में प्रयासरत गैर सरकारी संस्था मानव आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने बतायी।

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इस गौरैया से प्रेरणा लेकर पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने ललितपुर के दोस्तों से मिलकर पहली बार 2013 में गौरैया बचाने के लिए प्रदर्शनी लगाकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि गौरैया को बचाया जा सके। पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान आगे बताते हैं, "तभी से गौरैया बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। एक हजार से अधिक लकड़ी के गौरैया घरों को बनवाया, उन्हें शहर व गाँवों तक पहुंचाया। अब गौरैया वापिस लौटने लगी हैं। उसकी फुदकन और चीं चीं की आवाज सुनाई देनी चलगी है।"

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पक्की इमारतों का चलन एवं मोवाइल टावरों की बढ़ती संख्या से गौरैया पक्षी खतरे में हैं। गौरैया को बचाने के लिए लोगों को जन जागरूकता फैलाने एवं संरक्षित करने के उद्देश्य से 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस विश्व के कई देशों में मनाया जाता है। पर्यावरण में पक्षी प्रजातियों का होना जैव-विविधता का सूचक है। प्राकृतिक रूप से गौरैया भारत के अलावा यूरोप, अफ्रीका, म्यामांर, इण्डोनेशिया आदि देशों में पायी जाती हैं, जिनकी जिसकी संख्या में कमी आयी है। केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय भी मानता है कि देशभर में गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। देश में मौजूद पक्षियों की 1200 प्रजातियों में से 87 संकटग्रस्त की सूची में शामिल हैं। दिल्ली सरकार ने गौरैया को बचाने के लिए गौरैया को राजपक्षी का दर्जा दे चुकी है।


सेडो ग्रुप की सदस्या भाग्यश्री चतुर्वेदी ने बताया, " बढ़ते मोबाइल टावरों की किरणों से गौरैया में बांझपन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिस वजह से गौरैया की संख्यामें काफी कमी आयी है। गौरैया को घरों में वापस बुलाने के लिए पीने के लिए बर्तन में पानी और खाने को दाना देना चाहिए और घोसला बनाकर उनको बुलाने का काम करना चाहिए।"

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जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह का कहना है, "गौरैया बचपन की यादों से जुड़ी हुई हैं। बचपन से हम गौरैया को घर आंगन में देखते आये हैं, लेकिन गौरैया अब देखने को नहीं मिलती। हमने अपने घर में गौरैया के लिए कृतिम घर बनाया है, इस तरह के जागरूकता अभियानों से गौरैया देखने को मिलने लगी हैं।"

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