इस गर्मी चिड़ियों को मिलेगा आशियाना और दाना-पानी 

इस गर्मी चिड़ियों को मिलेगा आशियाना और दाना-पानी पार्कों में लगेगा अाशियाना

गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ ही चिड़ियों के पानी की समस्या बढ़ जाती है, पेड़ों की लगातार होती कमी और सूखते जल स्रोतों की वजह से गौरैया व अन्य पक्षियों का आश्रय व दाना पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता हैं। गर्मी हर वर्ष लाखों चिड़िया पानी की कमी से मर जाती हैं। ऐसे पक्षियों के दाना पानी की व्यवस्था व संरक्षण के लिए संस्था पिछलें आठ वर्षों से कार्य कर रही है।

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संस्था गो ग्रीन सेव अर्थ फाउण्डेशन वर्ष 2012 से इस अभियान को संचालित करता आ रहा है। वर्ष 2014 से हमराह फाउण्डेशन एवं उर्मिला सुमन द फाउण्डेशन के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी तीनों संस्थाओं की संयुक्त तत्वाधान में इन बेजुबानों के संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट वाटर टू बर्डस कम्पेनिंग 'हर घर आशियाना अभियान' कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

लोहिया पार्क में वाटर पाट्स व गिलहरी व अन्य पक्षियों के लिए वमिट्टी के बर्तन को लगाकर कार्यक्रम की शुरूआत फिल्म डायरेक्टर व एक्टर आदित्य ओम, व रीता प्रकाश मणिकर्णिका के द्वारा किया गया। पार्क में मार्निग वाक पर आए हुए शहर के लोगों से यह अपील किया गया कि मार्निक वाक पर आते समय इन बेजुबानों के लिए थोड़ा दाना थोड़ा पानी लाकर इन बेजुबान पक्षियों को अर्पित करे क्योंकि ये पक्षिया भी पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में काफी मददगार होती हैं।

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कई लोगों ने दिया साथ

ये अभियान जुलाई तक चलेगा, जिसमें स्कूल, कालेज, पार्क, सरकारी कार्यालय, प्राइमरी विद्यालय, पेड़ों पर मिट्टी के बर्तन लगाए जाएंगे, जिसमें चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखा जाएगा। इस अभियान के माध्यम से स्कूलों एव सार्वजनिक स्थानों पर पक्षी जागरूकता का भी किया जाएगा।

संस्था के अध्यक्ष बाल वैज्ञानिक विमलेश निगम ने कहा इस बार चिलचिलाती धूप के तपिश भरे मौसम में पारा बहुत ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। पेड़ों की लगातार होती कमी और लगातार सुखते जल स्रोतों की वजह से गौरैया व अन्य पंक्षियों को आश्रय व दाना पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता है। जिस प्रकार हमें इस गर्मी में पंखें, कूलर, व ठंडे पानी की आवष्यकता होती है उस प्रकार उन्हें भी दाना पानी व छाया की जरूरत पड़ती है।

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भारत जैसे देश में बहुतायात में पाई जाने वाली गौरैया की संख्या में 80 से 90 प्रतिशत कमी आई है। लगातार पेड़ों की कटाई, बढ़ता शहरीकरण, प्रदूषण, बिजली के तार व खेतों में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग से घटती संख्या के लिए जिम्मेदार है। टावरों से निकलने वाली रेडियेशन किरणों से भी गौरैया आदि पंक्षियों की दिशासूचक प्रणाली व प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप गौरैया व अन्य पंक्षियों की संख्या लगातार घट रही है।

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First Published: 2018-04-14 16:30:29.0

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