एक विधायक जो झोपड़ी में रहता है

एक विधायक जो झोपड़ी में रहता है

नई बस्ती (बहराइच)।  कई नेता जहां अकूत संपत्ति और आलीशान घरों को लेकर चर्चा में रहते हैं, वहीं एक विधायक छप्पर की मडैया में रहते हैं। छप्पर में रहने वाले विधायक बंशीधर बौद्ध को एमएलए बेमिसाल का खिताब भी मिल चुका है।

बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर कतर्नियाघाट के जंगल में बाघ और तेंदुओं का कोर जोन कहे जाने वाले बिछिया इलाके में विधायक का चार छप्परों का आशियाना है। वनग्राम नई बस्ती टेड़िया गांव में दरवाजे पर रखे छप्पर के नीचे विधायक जी की चौपाल लगती है, तो अंदर रखे छप्परों में उनकी तीन बहू और पांच बेटों से भरा पूरा उनका परिवार रहता है। घास-पूस से बने इसे बंगले की एक टटिया में एक टीवी लगा है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फोटो भी लगी है।

देर शाम अपने घर के बाहर तखत पर बैठे विधायक जंगल में रहने की वजह पूछने पर बताते हैं, “इलाके के लोगों ने हमें चुना है, इनकी भावनाएं हमसे जुड़ीं हैं। अगर मैं इन्हें छोड़कर चला गया तो इनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।”

बंशीधर लोकसभा चुनाव के दौरान हुए बलहा विधानसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए थे। इससे पहले वो दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। हालांकि कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र होने के चलते नई बस्ती गांव में पक्के निर्माण पर प्रतिबंध हैं, लेकिन विधायक का यहां रहना मज़बूरी नहीं।

“मैं मूल रुप से मऊ जिले का रहने वाला हूं, बाबा-दादा जंगल की रखवाली के लिए यहां लाए गए थे, फिर इसी जंगल और यहां रहने वाले लोगों से मन लग गया। अब इन्हें छोड़कर जाने का मन नहीं होता।” बंशीधर बौद्ध आगे बताते हैं।

क्या परिवार के लोग उनके फैसले से खुश हैं? इसका जवाब पांच बेटों में सबसे छोटे बेटे और 11वीं के छात्र दीपक अंबेडकर जवाब देते हैं, “शुरू-शुरु में हम लोग यहां रहना नहीं चाहते थे, लेकिन पापा कहते थे, हम जो भी हैं गरीबों की देन हैं, उनका साथ छोड़ा तो धोखा होगा। अब हमें भी यहीं मजा आने लगा है।”

बंशीधर सिर्फ गांव में रहते नहीं हैं बल्कि उनकी दिनचर्या भी गांव के दूसरे लोगों की जैसी है। सुबह 6 बजे उठकर दरवाजे पर झाड़ू लगाते हैं। लखनऊ में कोई काम और विधानसभा की कार्यवाही नहीं चल रही होती है तो दिन में अपने खेतों में काम करते हैं। एक बड़े छप्पर के नीचे खड़े ट्रैक्टर को दिखाते हुए बंशीधर कहते है, “मेरे पास छह एकड़ जमीन है। धान, गन्ना और आलू की खेती करता हूं। बड़े बेटे ज्यादा पढ़-लिख नहीं पाए इसलिए सब मिलकर खेती करते हैं। घर में कोई नौकर नहीं हैं।”

वो आगे बताते हैं, “आसपास के लोग ताना मारते हैं, कहते हैं विधायक होकर भी इलाके का विकास नहीं करवा सकते हैं। लेकिन हमारी मज़बूरी है, वन विभाग के सख्त नियमों के चलते मैं कुछ कर नहीं सकता। 16 जून को मेरी दो बेटियों की शादी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव घर आए थे, मैंने उनसे नियमों में ढील दिलवाने की गुजारिश की थी।”

मिहिरपुरवा को बनाया जाए तहसील

मोबाइल की रौशनी में गांव कनेक्शन से बात करते हुए बलहा विधायक कहते हैं, “अगर मिहिरपुरवा को तहसील बना दिए जाए तो इलाके के लोगों की जिंदगी आसान हो सकती है। अभी यहां रात के नौ बजे के बाद नो एंट्री हो जाती है, एंबुलेंस तक नहीं आ सकती। सरकारी अस्पताल 50 किलोमीटर दूर है।”

बिछिया का कृषि फार्म फिर से हो शुरू

बिछिया इलाके में बना 150 एकड़ का कृषि फार्म पिछले कई सालों से बंजर पड़ा है। दिन में आवारा जानवर चरते हैं तो रात में बाघ और तेंदुए इनमें हिरनों का शिकार करते हैं। बंशीधर बताते हैं, वन विभाग ने फार्म में खेती बंद करवा कर हजारों लोगों को बेरोजगार कर दिया है। कृषि विभाग 99 वर्ष की लीज पर जमीन लेकर यहां बीजों का परीक्षण करता था, लेकिन वन विभाग ने बीच में ही लीज को तोड़ दिया।

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