एम्स गोरखपुर: देर आए, दुरस्त आए

एम्स गोरखपुर: देर आए, दुरस्त आएgaonconnection

लखनऊ। जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई), न्यूरोलॉजी से जुड़े खतरनाक रोग, जानलेवा हो चुके कैंसर, पथरी से जुड़े भयावह विकार पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनकी वजह से हर साल हजारों लोग बेइलाज दम तोड़ते हैं।

वजह साफ एक ओर लखनऊ तो दूसरी ओर पटना, सबसे आखिर में दिल्ली इन दूरदराज के शहरों अलावा सुपर स्पेश्येलिटी से जुड़े इलाज कहीं भी नहीं होते हैं। फैजाबाद से कुशीनगर और सुल्तानपुर से सोनभद्र के रहने वाले लोगों के लिए गोरखपुर में बनने वाला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इलाज कराने का सबसे बड़ा विकल्प बनकर सामने आएगा। 

केंद्र सरकार के खर्च और राज्य सरकार की ओर से दी गई मुफ्त जमीन पर इसका निर्माण किया जाएगा। लोगों के बीच खुशी है। स्वयं प्रोजेक्ट के तहत हमारी टीम ने पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में इस एम्स के फायदों को लेकर हमने लोगों का मन जाना। एक राय में एम्स को लोगों ने ‘देर आए दुरुस्त आए’ माना है।

750 बेड की क्षमता का होगा अस्पताल

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत 1011 करोड़ रुपए की लागत से गोरखपुर में एम्स बनाया जाएगा। केंद्र सरकार मानती है कि, ‘नए एम्स की स्थापना करोड़ों की आबादी को सुपर स्पेशियेलिटी स्वास्थ्य सेवाएं देगी। जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैयार की जा रही प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की सुविधाओं के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इसकी क्षमता 750 बिस्तरों की होगी।

मुख्यमंत्री ने मुफ्त जमीन पर दी थी हामी

मुख्यमंत्री ने कहा था कि, आज गोरखपुर में हमने एम्स के लिए मुफ्त जमीन दी। रायबरेली के एम्स के लिए भी यूपी सरकार ने ही मुफ्त में जमीन दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत गोरखपुर में एम्स की स्थापना को मंजूरी दी गई थी।

अवध से लेकर पूर्वांचल तक छाई खुशी

फैज़ाबाद जनपद के सोहावल ब्लॉक के भवनियापुर गाँव के महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, “गोरखपुर में एम्स खुलने से सिर्फ फैज़ाबाद ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र को लाभ मिलेगा, अभी कोई भी गंभीर बीमारी होने पर लोगों को केवल लखनऊ ही रेफर किया जाता है पर गोरखपुर में एम्स खुलने से हमारे पास दो विकल्प हो गए हैं।” महोली फैज़ाबाद के शैलेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, “एम्स गोरखपुर स्थापित होना सिर्फ मोदी सरकार के लिए ही उपलब्धी नहीं है बल्कि यह फैज़ाबाद के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी जैसा है।” देवरिया सदर में रहने वाले किसान दिलीप मिश्र(36 वर्ष) का कहना है, “हमने अपने आसपास न जाने कितने ही बच्चों को दिमागी बुखार का शिकार होकर मरते हुए देखा है। मगर यहां से लखनऊ ले जाकर इलाज कराना बहुत मुश्किल था। अब जबकि एम्स बनना अब तय हो चुका है तो हमारे लिए ये बहुत खुशी की बात है।” 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क 

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