एनएसजी सदस्यता मुद्दे को आगे बढ़ाना गलत सलाह थी: श्रीनिवासन

एनएसजी सदस्यता मुद्दे को आगे बढ़ाना गलत सलाह थी: श्रीनिवासनgaonconnection

हैदराबाद (भाषा)। प्रसिद्ध वैज्ञानिक और परमाणु उर्जा आयोग (एईसी) के सदस्य एमआर श्रीनिवासन ने आज कहा कि केंद्र का परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के मुद्दे पर जोर देना (अनावश्यक, अवांछित और गलत सलाह थी। कल भारत की 48 सदस्यीय समूह की सदस्यता हासिल करने की कोशिश नाकाम हो गयी थी।

उन्होंने कहा कि यदि इस बारे में परमाणु उर्जा आयोग (एईसी) से सलाह ली जाती तो वह सरकार को इससे बचने को कहता। एईसी परमाणु उर्जा विभाग (डीएई) के अधीन आता है। एईसी देश में परमाणु उर्जा संबंधी गतिविधियां देखता है। एईसी के पूर्व प्रमुख श्रीनिवासन ने कहा कि एनएसजी की सदस्यता से भारत के परमाणु व्यापार पर कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि भारत ने रियेक्टरों और यूरेनियम की आपूर्ति के लिए दूसरों देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किया हुआ है।

उन्होंने साक्षात्कार में कहा, ‘‘भारत ने एनएसजी में प्रवेश को एक बड़ा मुद्दा बना दिया। यह बिल्कुल अनावश्यक था क्योंकि 2008 में मिली छूट से हम पहले ही परमाणु उन्नत देशों के साथ परमाणु व्यापार करने में सक्षम हो गए थे और हम रियेक्टर परियोजनाओं के लिए पहले ही रुस, फ्रांस एवं अमेरिका से समझौते कर चुके हैं।'' श्रीनिवासन ने कहा कि भारत ने कजाकिस्तान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के साथ यूरेनियम की खरीद के लिए समझौता भी किया हुआ है और 1974 में स्थापित परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह में प्रवेश पाने के लिए एक अवांछित और गलत सलाह पर आधारित पहल की गयी।

पद्मभूषण से सम्मानित वैज्ञानिक ने कहा कि एनएसजी सदस्य बनने में नाकामी का देश के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिकूल असर नहीं पडेगा क्योंकि भारत के पास रियेक्टरों के डिजाइनिंग एवं निर्माण और ईंधन निर्माण, प्रसंस्करण वगैरह के लिए अपनी खुद की क्षमता है।

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