एटीएम कार्ड जेब में, निकल गए 50,000 रुपए

एटीएम कार्ड जेब में, निकल गए 50,000 रुपएgaonconnection

लखनऊ। यूपी की राजधानी से लगभग 12,000 किमी दूर अमेरिका में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बराक ओबामा के साथ विश्व की अपनी तरह की पहली द्विपक्षीय साइबर सुरक्षा डील पर चर्चा की। 

जिस दौरान वहां ये चर्चा चल रही होगी  लखनऊ के ऐशबाग में रहने वाले व्यापारी अभिषेक ने गाँव कनेक्शन को अपने साथ हुए साइबर अपराध की कहानी बताई। मोदी की चर्चा सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय विषय नहीं, हमारी-आपकी सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है।

अभिषेक के पास एक दिन अचानक फोन पर मैसेज आया कि उसके आईसीआईसीआई बैंक एकाउंट से झारखंड की राजधानी रांची में 50,000 रुपए निकाल लिए गए। अभिषेक मिश्रा (27 वर्ष) बताते हैं, “मैसेज देखकर मैं हैरान था। एटीएम मेरे पास था। किसी नॉन आईसीआईसीआई बैंक के एटीम मशीन से पैसा निकाला जा चुका था।” अभिषेक साइबर क्राइम का शिकार हुए थे।

वे अकेले नहीं जिन्हें इस तरह के संकट से गुज़रना पड़ा हो। पिछले दस सालों में भारत में साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में 19 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज़ की गई है। 2005 में जहां ये आंकड़ा 481 था वहीं 2014 में ये बढ़कर 9,622 हो गया।

भारत में बढ़ रहे साइबर मामलों के जानकार पवन दुग्गल कहते हैं, “साइबर क्राइम एक बहुत बड़ी समस्या है जितनी बड़ी ये दिखाई देती है उससे कहीं ज्यादा बड़ी है। साइबर क्रिमिनल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ कुत्ते-बिल्ली का खेल खेलते हैं। साइबर अपराधी पुलिस और साइबर सेल से पहले ही टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से अपराध को अंजाम देते हैं और कोई उन्हें पकड़ तक नहीं पाता।”

अभिषेक बताता है, “मैंने बैंक में शिकायत की तो काफ़ी वक्त के बाद मेरा पैसा वापस मिल गया लेकिन आज तक ये पता नहीं चल पाया कि ये गड़बड़ हुई कैसे। अभिषेक ने कहा कि “बैंक ने सिर्फ इतना बताया कि मेरे अकाउंट से एक फर्ज़ी मोबाइल नंबर लिंक हो गया था, जिसकी वजह से ये गड़बड़ी हुई।” अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार साइबर क्राइम के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर हैं। इसके बाद नीदरलैंड और ताइवान का नंबर आता है।  साइबर मामलों के जानकार पवन दुग्गल के मुताबिक़, “सबसे दुख की बात ये है कि साइबर क्राइम से जुड़े हज़ारों मामले तो दर्ज़ भी नहीं किए जाते हैं। ऐसे लोगों की तादात हज़ारों में हैं जो साइबर सेल के पास जाकर अपने खिलाफ़ हुए साइबर अपराधों के बारे में पुलिस को बताते ही नहीं। साइबर क्राइम बढ़ने के पीछे की ये भी एक बड़ी वजह है।”

हालांकि एनसीआरबी के अनुसार साइबर अपराधों से जुड़ी गिरफ्तारियों के मामले में भी नौ गुना का इज़ाफ़ा हुआ है। 2005 में 569 से बढ़कर 2014 में ये 5,752 हो गया। भारत में इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या 400 मिलियन यानी 40 करोड़ पार कर गई है जिसके जून 2016 तक 462 मिलियन या 46.2 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इन प्रयोगकर्ताओं के बढ़ने के साथ ही साइबर क्राइम के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2014 में कम से कम 9622 साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं, जो 2013 की तुलना में 69 फीसदी अधिक हैं। दर्ज किए गए 9622 साइबर अपराधों में से 7201 सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम अपराधों के तहत दर्ज की गई है जबकि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और 149 के विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत 2,272 अपराध दर्ज किए गए हैं।

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