फ़सल बचाने के चक्कर में वन्य जीवों की हो रही हत्या

फ़सल बचाने के चक्कर में वन्य जीवों की हो रही हत्यागाँव कनेक्शन

खुटार (शाहजहांपुर) । एक तरफ विलुप्त हो रहे जंगली जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए सरकार वाइल्ड लाइफ प्रोग्राम चला रही है, तो वहीं दूसरी तरफ शाहजहांपुर जिले की खुटार वनक्षेत्र के जंगली जानवरों पर ख़तरा मंडरा रहा है। यहां हर रोज जंगली जानवर बेमौत मर रहे हैं

जिला मुख्यालय से लगभग 65 किमी दूर उत्तर दिशा में स्थित खुटार रेंज जिले का एक बड़ा वनक्षेत्र माना जाता है। खुटार जंगल के किनारे जिन किसानों के खेत हैं, उन्होंने ने अपने खेत के चारो तरफ पतले तार बांध रखें हैं जो रात में बिज़ली से जोड़ दिए जाते हैं, जिस वजह से अक्सर जंगली जानवर लगातार इसका शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है

अधिकतर जंगली जानवरों की मौतों का खुलासा ही नहीं हो पाता क्योंकि करेंट से मरने वाले जानवरों को या तो नदी में फिकवा देते है या जंगल के काफी अन्दर गड्ढा करके उसमें डलवा दिया जाता है।

हाल ही में जनवरी माह में खुटार रेंज के अन्तर्गत ग्राम नरौठा हंसराम के पास गुलदार शावक का शव मिला, जिसकी नाक से खून बह रहा था। मौत का कारण करेंट लगना था।

रेंज में लगातार हो रही जंगली जानवरों की हत्याओं के बावजूद वन विभाग कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रहा है। जब इस बारे में गाँव कनेक्शन रिपोर्टर ने खुटार रेंज के वन संरक्षक शिवाजी सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, ''खुटार जंगल क्षेत्र बहुत बड़ा है, इसमें अलग-अलग हिस्सों पर कई लोगों की तैनाती है। जानवरों की हत्या हमारे क्षेत्र की नहीं है। इसलिए हम कुछ भी नहीं बता सकते।’’

खतरा सिर्फ जंगली जानवरों पर ही नहीं बल्कि जंगल से सटे गाँवों में रहने वाले पशुपालकों के जानवरों पर भी मंडरा रहा है। खुटार रेंज से सटे मलिका गाँव के निवासी महिपाल सिंह (70 वर्ष) बताते हैं, ''हम लोग अपनी गाय बेंचते नहीं हैं और जानवरों को चराने की जगह बची नहीं है। कई बार वनाधिकारियों से गाँववालों ने शिकायत की पर आज तक कोई कार्यवाही नही हुई है। इसलिए हमने मजबूर होकर अपने 25 पशुओं को जंगलों में ले जाकर छोड़ दिया है।’’

रिपोर्टर - रमेश चंद्र गुप्ता

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