गाँव को मंगलमय बनाता 'सुमंगलम'

गाँव को मंगलमय बनाता सुमंगलमगाँव कनेक्शन

इलाहाबाद। जि़ला मुख्यालय से 20 किलोमीटर पूर्व दिशा की ओर गंगा चांडी गाँव बसा है। गंगा के किनारे बसे होने से चांडी गाँव प्राकृतिक रूप से काफी सुन्दर है। गाँव में ज्यादा नाविक (मल्लाह) बिरादरी के लोग रहते हैं। ग्राम पंचायत तीन गाँव को मिलकर बनी हुई है। गाँव में जन सुविधाओं की कमी है। एक स्कूल है जो की बहुत अच्छे से नहीं चलता है। तमाम परेशानियों को देखते हुए चांडी गाँव में 2010 में अरविन्द कुमार ने 'सुमंगलम' नाम की एक संस्था खोली जो चांडी गाँव के विकास के लिए काम करती आ रही है।

अरविन्द कुमार जो की कई वर्षों से समाज सेवक के रूप में समाज से जुड़े हुए थे, लेकिन कोई संस्था नहीं चलाते थे। उन्होंने बताया, ''मेरे मन में एक परिवार की कल्पना आई, जहाँ दादा-दादी हों, बुआ हों, मौसी हों, बच्चे हों, नाना-नानी हों, बस कोई अनाथ और कोई बिना रिश्ते के न हों। हम सब एक रिश्ते से बंधे हुए हों। बस इसी तरह से सुमंगलम परिवार का निर्माण हुआ।"

जब से गाँव में सुमंगलम परिवार आया है गाँव के लोग नई-नई बातें जान रहे हैं और गाँव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। सुमंगलम वृद्धाश्रम, आनाथालय और नारी निकेतन का एक संगम है। जिन लोगों का साथ अपने परिवार से छुट गया था उन लोगों ने यहां पर अपने लिए नया परिवार बना लिया है। सुमंगलम परिवार में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है। बच्चों के लिए फुलवारी होती है जहां पर बच्चे अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करते हैं। फुलवारी में बाहर के बच्चे भी आते हैं। स्कूल से आने के बाद अपना बचा हुआ समय व्यतीत करने के लिए यहां के बच्चों के साथ खेलने पढ़ने और अच्छी-अच्छी बातें सीखने आते हैं। अंजलि (8 वर्ष) जो की शहर के एक अच्छी अंग्रेजी विद्यालय में पढ़ती है, वो बताती है, ''मैं रोज फुलवारी में आती हूं और अपने स्कूल का होमवर्क यहीं करती हूं। यहां पर शिक्षक बहुत अच्छे से पढ़ाते हैं, साथ ही यहां बच्चों के साथ खेलने में भी बहुत अच्छा लगता है।" अंजलि के जैसे ही लगभग 45 बच्चे रोज यहां आते हैं और बहुत कुछ सीखते हैं। 

महिलाओं के लिए 'कौशलम' नाम का एक कार्यक्रम चलाया जाता है, जहां पर महिलाओं और लड़कियों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और कई तरह के काम सिखाए जाते हैं जिनसे ये महिलाएं अपने खाली समय का सदुपयोग कर सकें और कुल कला भी सीख सकें। इसी कार्यक्रम के अन्तर्गत यहां की लड़कियों ने बहुत सुन्दर झोले और गिफ्ट पैक बनाए हैं, जो बाज़ार में बिकते हैं और जो भी कमाई होती है, वो इन्हीं में बाट दी जाती है।

चांड़ी गाँव के श्रीकान्त मिश्रा बताते है, ''सुमंगलम के आने से गाँव में काफी सुधार आया है। गाँव के लोगों को हर सुविधा मिल जाती है। यहां पर हर वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ है। बच्चों के लिए फुलवारी, महिलाओं के लिए कौशलम और बुजुर्गों के लिए दवाई के साथ-साथ गाँव में खेलकूद और कई तरह के विकास को आगे बढ़ा रही है यह संस्था।"

रिपोर्टर - आकाश द्विवेदी

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