गाँवों में पशु अस्पतालों की कमी से पशुपालक निराश

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ग्वाडीह (सीतापुर)। सीतापुर जिले के ग्वाडीह गाँव में रहने वाली आबादी में अधिकतर लोगों के आय का जरिया पशुपालन है पर एक बात, जो यहां रहने वाले किसानों को परेशान करती है, वह है क्षेत्र में पशु डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी।

सीतापुर जिले के ग्वाडीह गाँव के रहने वाले सत्यनाम चतुर्वेदी (50 वर्ष) बताते हैं, ‘’गाँव में लगभग सभी घरों में गाय या भैंस पली हैं। अगर कोई भी जानवर अचानक बीमार पड़ जाता है, तो उसे नौ किमी. ब्लॉक लेकर भागना पड़ता है। गाँव में जल्दी जानवरों के डॉक्टर भी नहीं मिल पाते हैं, जिसके कारण जानवरों के बीमार होने पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खुद ही इलाज करना पड़ता है।”

इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड मैनपावर एंड रिसर्च (आईएएमआर) के एक अध्ययन के अनुसार देश में एक लाख 15 हजार 938 पशु चिकित्सकों की कमी है। देश में कुल 67,800 रजिस्टर्ड पशु चिकित्सक हैं। गत वर्ष 31 मार्च तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में 11367 पशु चिकित्सालय या पॉलीक्लीनिक, 26034 डिस्पेंसरी और 23722 पशु सहायता केंद्र हैं। ग्वाडीह गाँव के रामऔतार (57 वर्ष) कहते हैं, “अभी बारिश के मौसम में पशु जल्दी बीमार पड़ते हैं।

ऐसे में उनके इलाज के लिए गाँव के नज़दीक कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है। पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान करवाने के लिए भी गाँव से चार किमी. रघुवापुर गाँव से पशु डॉक्टर को बुलाना पड़ता है।” ग्वाडीह गाँव के नज़दीक शमशेर नगर और गोंधा में भी पशु अस्पताल न होने के कारण पशुपालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सा केंद्रों की कमी के कारण लोगों को अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए निजी डॉक्टरों को घर बुलाना पड़ता है। इससे उन्हें महंगी फीस देनी पड़ती है।

स्वयं वालेंटियर: अंशू चतुर्वेदी

उम्र: 16 वर्षस्कूल: लाल बहादुर शास्त्री माध्यमिक विद्यालय

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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