लखनऊ के इस गाँव तक नहीं पहुंची विकास की सड़क

लखनऊ के इस गाँव तक नहीं पहुंची विकास की सड़कमलिहाबाद के जिन्डौरा ग्राम सभा में ख़स्ताहाल सड़क।

रामू गौतम, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ। जहां देश को डिजिटल करने की पहल जोरों पर है, वहीं रामनगर गाँव में आजादी के 70 वर्षों बाद भी गाँव के लोग पक्की सड़क बनने के इन्तजार में है।

लखनऊ जिला मुख्यालय से 45 किमी दूरी पर विकासखंड मलिहाबाद की सबसे बड़ी ग्राम जिन्डौरा ग्राम सभा में 17 गाँव लगते हैं, जिनमें से एक रामनगर गाँव ऐसा भी है, जहाँ अभी तक पक्की सड़क का आज तक निर्माण नहीं हो सका। गाँव के लालजी (75) वर्षीय बताते हैं, “जिंदगी का अंतिम पड़ाव है। बहुत से नेता मंत्री गाँव आये और विकास की बात कर गए, पर आज तक कोई अपने वादे पर खरा नही उतरा।”

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लखनऊ-हरदोई राज्यमार्ग से एक कच्चा गलियारा रामनगर होते हुए दौलतपुर संपर्क मार्ग में जुड़ा है। इस कच्चे गलियारा के रास्ते में मामूली बरसात में भी कीचड़ और पानी भर जाता है। गांव के लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। छोटे बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, परसादी रावत (60) वर्षीय बताते हैं, “जिंदगी ढिबरी और लालटेन की रोशनी में कट गयी। जीते जी एक बार गाँव तक सड़क आ जाती तो ख़ुशी रहती कि जो तकलीफ हम लोगों ने देखी है वो कम से कम अब बच्चे न देखें।”

मूला (60) वर्षीय बताती हैं, “बहुत कम उम्र में मैं शादी कर इस गाँव में आई थी। तब भी कच्ची पगडंडी थी और आज भी कच्ची पगडंडी है।

69 साल बाद पहुंची बिजली

रामनगर गाँव के 65 वर्षीय गया प्रसाद का कहना हैं, हमारी पूरी उम्र बीत गयी दिया-बाती में, लेकिन ख़ुशी इस बात की है इस बरस गाँव में बिजली के खम्भे और तार आ गए हैं, हालांकि लाइन अभी चालू नहीं हुई है, लेकिन गाँव में बिजली के लिए काम शुरू होने से हम सब बहुत उत्साहित हैं। जिनदौरा ग्राम पंचायत के प्रधान पति राजबहादुर ने बताया कि गाँव को काफी लंबे समय से सड़क नसीब नहीं हुई है। मगर अब सड़क बनवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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