सैकड़ों मजदूर होने के बाद भी जेसीबी मशीन से हो रहा काम

Arvind Singh ParmarArvind Singh Parmar   10 March 2017 5:10 PM GMT

सैकड़ों मजदूर होने के बाद भी जेसीबी मशीन से हो रहा कामफोटो: गाँव कनेक्शन

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

महरौनी (ललितपुर)। बुंदेलखंड में बेकारी,गरीबी और बेरोजगारी का मुद्दा बढ़ता जा रहा है, दो वक्त की रोजी रोटी के लिए लाखों की संख्या में किसान पलायन कर रहे हैं। अच्छे मौसम के कारण इस बार रबी की पैदावार अच्छे होने के आसार हैं। इसके बाद भी अधिकारी मजदूरों को काम देने के लिए कतरा रहे हैं।

ललितपुर से पूर्व दक्षिण दिशा (40 किमी) छपरट वनविभाग दिगवार रेंज अंर्तगत जेसीबी मशीन से सुरक्षा खाई की खुदवाई की जा रही है। यहां वन विभाग से लगे हुए छपरट, गगनिया, दिगवार, चौकी, गुन्द्रापुर सहित एक दर्जन गाँवो में सहरिया सहित सैकड़ों मजदूर हैं, जो हमेशा वनविभाग में मजदूरी करने को तैयार रहते हैं लेकिन उन से काम नहीं लिया जा रहा बल्कि जल्दबाजी के चक्कर में वनविभाग के अधिकारियों द्वारा विभागीय कार्य में जेसीबी मशीन का उपयोग किया जा रहा है।

वन क्षेत्र में किसी भी विकास कार्य में अगर कोई संवेदक काम कराने के लिए किसी भी मशीन का उपयोग वर्जित है। दिगवार गाँव के सुमरन (27 वर्ष) बताते है, "आसपास के गाँवो मै सैकड़ों मजदूर खाली बैठे हैं, वन विभाग ऐसे में जेसीबी से काम करवा रहा है, ऐसे में मजदूरों को कौन लगाएगा, अगर मजदूर काम करते तो उन्हें मजदूरी मिलती।"

दिगवार रेंज में जेसीबी मशीन के पास झाड़ी काट रहे बाचड़ रामचरन कुशवाहा (48 वर्ष) बताते हैं, "कुछ वर्षो पहले मजदूरों द्वारा सुरक्षा खाई खुदवाई गयी थी, जिसको जेसीबी मशीन से खुदवाया जा रहा है। वो आगे बताते हैं कि मजदूरों से काम होना था, मजदूर नहीं मिले जिस कारण जेसीबी मशीन से खुदाई हो रही है । जेसीबी मशीन क्यों चलाई जा रही है, ये मुझे नहीं पता वनविभाग छपरट के अधिकारियों से पूछिए।

डीएफओ वी.के.जैन फोन पर बताते हैं कि "वनविभाग के कार्यों में पहली प्राथमिकता मजदूरों को और दूसरी प्राथमिकता मशीन को देते हैं। वो आगे बताते हैं, " बोना नाली, गड्डा, सुरक्षा खाई ये टाईम वाउन्ड कार्यक्रम होते हैं। अभी फसल आने के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं, अगर मजदूर काम करने को तैयार हैं तो उन्हे पहले काम पर लगाया जाएगा। "

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