अस्थायी पुल भी जर्जर, अब कहां से जाएं ग्रामीण

अस्थायी पुल भी जर्जर, अब कहां से जाएं ग्रामीणशिवली-शिवराजपुर मुख्य मार्ग को जीटी रोड से जोड़ता है भौसाना पुल

उमा शर्मा, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

शिवराजपुर (कानपुर)। पिछले डेढ़ साल से शिवली-शिवराजपुर के मुख्य मार्ग का भौसाना पुल टूटने की वजह से आवागमन के लिए कुछ महीने पहले अस्थायी तौर पर लोहे के पीपों का पुल बनाया गया था, जो अब सिर्फ खतरों को दावत दे रहा है। पुल पर जगह-जगह टूटी लकड़ियां कभी भी हादसे का सबब बन सकती हैं।

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कानपुर से 45 किलोमीटर दूर शिवराजपुर ब्लॉक से दक्षिण दिशा में भौसाना गाँव के सामने एक पुल है, जो टूट चुका है। सात महीने पहले गाँव कनेक्शन ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था। इसके एवज में पीपों और लकड़ी का एक अस्थाई पुल बनाया गया। मगर अब यह पुल भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसकी दोनों तरफ की रेलिंग टूट चुकी हैं और पुल के बीच-बीच से लकड़ी के तख्ते भी अलग हो गये हैं। इस वजह से यहां से निकलने वाले मजबूरी में निकल रहे हैं क्योंकि इनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

यहां से गुजरने वाले राहगीर आलोक मिश्रा (28) का कहना है, “जो स्थायी पुल था, उससे प्रतिदिन दर्जनों गाँव के लोग और 100 से ज्यादा ट्रक और टैम्पो निकलती थीं। डेढ़ साल पहले इस पुल में एक बहुत बड़ा गड्ढा हो गया था। इसके बाद इसके बगल में पीपों का एक पुल बनाया गया, इस समय पीपों वाले पुल से निकलने में बहुत डर लगता है। कई बार इस पुल से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।” इसी गाँव के ओमप्रकाश शुक्ला (45 वर्ष ) का कहना हैं, “हम गाँव वाले तमाम बार तहसील में अर्जी दे चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। सरकारी विभाग के अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इन्तजार कर रहे हैं।”

तब पलट गया था ट्रैक्टर

वहीं, भौसाना ग्राम प्रधान गया प्रसाद पाल का कहना है, “जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक से शिकायत कर चुके हैं, पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। कुछ दिन पहले धान का ट्रैक्टर पलट गया था, साईकिल वाले तो आए दिन गिरते ही रहते हैं। इस समय आलू कोल्ड स्टोर में रखने हैं, इस पुल की वजह से वो भी नहीं रख पा रहे हैं।” जिन ट्रक चालकों को इस टूटे हुए पुल की पूरी जानकारी है वो 25 किलोमीटर चक्कर काट कर जीटी रोड पर पहुंचते हैं। इससे समय के साथ-साथ लम्बे ट्रैफिक जाम का भी सामना करना पड़ता है।

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