सर्वे : 45 % ग्रामीण महिलाएं बनना चाहती हैं टीचर तो 14 % डॉक्टर, लेकिन रास्ते में हैं ये मुश्किलें भी

Ankita TiwariAnkita Tiwari   20 Aug 2017 7:24 PM GMT

सर्वे : 45 % ग्रामीण महिलाएं बनना चाहती हैं टीचर तो 14 % डॉक्टर, लेकिन रास्ते में हैं ये मुश्किलें भीसर्वे के दौरान पता चला कि 14 प्रतिशत डॉक्टर और 6 प्रतिशत पुलिस में भी जाना चाहती हैं।

गाँव कनेक्शन इनसाइट टीम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गामीण महिलाएं अब बड़े सपने देख रही हैं। सर्वे से पता चलता है कि 56 प्रतिशत महिलाएं कामकाजी बनना चाहती हैं, 44 प्रतिशत महिलाएं गृहिणी बनना चाहती हैं। गाँव कनेक्शन ने 25 जिलों में 5000 ग्रामीण महिलाओं से बात कर उनके मन की बात जानी। इस ग्रामीण सर्वे में गलती की संभावना 1.39 प्रतिशत है।

जौनपुर जिले के समोदपुर ब्लॉक के सुइथाकला गाँव की चांदतारा (65 वर्ष) ने कहा, "जब भी कहीं घर से जाती हूं तो पति से इजाजत जरूर लेती हूं। घर में उम्र में पति के बाद सबसे बड़ी हूं। हमेशा से यह आदत में शामिल रहा है कि बिना इजाजत के घर से न निकलूं।"

"सर्वे के लिए उत्तर प्रदेश के कुल 820 ब्लॉक में से 350 ब्लॉक में ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों से सवालों के जवाब 25 दिन तक लिए गए।" सर्वे करने वाली गाँव कनेक्शन इनसाइट टीम की सदस्य अंकिता तिवारी बताती हैं, "इस दौरान 15 से 45 साल की लड़कियों और महिलाओं से बात की गई।"

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सर्वे के दौरान 56 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं कहा कि वह कामकाजी बनना चाहती हैं। इसमें से सबसे अधिक 45 प्रतिशत टीचर बनना चाहती हैं। यही नहीं डॉक्टर और पुलिस में भर्ती के सपने भी गाँव की लड़कियां देख रही हैं। सर्वे के दौरान पता चला कि 14 प्रतिशत डॉक्टर और 6 प्रतिशत पुलिस में भी जाना चाहती हैं।

लखनऊ जिले के काकोरी निवासी गीता (26 वर्ष) कहती हैँ, “मुझे शिक्षक बनना है, बीएड किया है और नई भर्ती का इन्तजार कर रहे हैं।" वहीं गोंडा जिले के परेड सरकार निवासी आशा सिंह (34 वर्ष) ने बताया, "मैं टीचर बनना चाहती थी, आगे की पढ़ाई नहीं हो पाई इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री बन गई।"

एटा के शीतलपुर ब्लॉक के गाँव नगला लायक निवासी प्रभा (32वर्ष) खूब स्कूटी, साइकिल और बाइक चलाती हैं। "शादी से पहले साइकिल से ही पढ़ने जाती थी, ससुराल में मुझे पूरी आजादी है, कही भी आने जाने की, मेरे पति मुझे नही रोकते हैं, शादी से पहले मैंने इंटर किया था मेरे पति ने मुझे बीएससी कराया है, मेरी इच्छा डॉक्टर बनने की है," प्रभा ने बताया।

ग्रामीण महिलाओं में अपने मन का न कर पाने की कसक भी सर्वे के दौरान झलकी। 67 प्रतिशत ने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर आगे मौका मिला तो वह पढ़ना जरूर चाहेंगी। गोंडा के गिर्द निवासी देवीवती (42वर्ष) ने कहा, "पांचवी तक पढाई आसान रही, लेकिन जूनियर के लिए संघर्ष करना पड़ा।"

मेरठ जिले के पाली गाँव निवासी रामवती (55 वर्ष) बताती हैं, "हमारे जमाने में पढ़ने से ज्यादा काम को माना जाता था, इसलिए पढाई बीच में छूट गई। जब भी पढ़ने के लिए बोला तो घर का काम आड़े आ गया।”

इलाहाबाद के दरियाबाद निवासी शबाना (38वर्ष) कहती हैं, "आजादी के 70 साल बाद भी महिलाएं पूरी तरह से स्वतंत्र नही हैं। मन भर पढ़ाई नहीं कर पाने का मलाल अधिकांश महिलाओं के मन में रहता है। मैं खुद मेडिकल की प्रवेश परीक्षा निकाल ली थी, लेकिन प्रवेश नहीं ले सकी। डॉक्टर बनना चाहती थी,लेकिन हाउस वाइफ हूं।"

सर्वे के दौरान गाँव की 50 प्रतिशत महिलाओं-लड़कियों ने माना कि साइकिल चलाना पसंद है, लेकिन कम ही होता है कि उन्हें ससुराल में साइकिल चलाने की आजादी मिले। इलाहाबाद जिले की सदर तहसील के खुल्दाबाद में रहने वाली मंजरी सोनकर (27वर्ष) ने कहा, “16 साल की उम्र पूरी करने के बाद ही लड़की को घरवाले साइकिल चलाने की अनुमति देते हैं, लेकिन शादी बाद उसे ऐसी अनुमति की कम ही उम्मीद होती है। शादी के बाद ज़िंदगी बिल्कुल बदल जाती है," वह आगे कहती हैं, "घर से बाहर जाने के लिए पापा मम्मी के अलावा भाई से पूछने या बताने की जरूरत हमेशा होती है।"

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