• असहनीय पीड़ा थी, कहने से शरमाती थी...

    आज विश्व कैंसर दिवस है। महिलाएँ कैंसर की गिरफ्त में तेजी से आती जा रही है। आँकड़े गंभीर चिंतनीय है। स्त्री के ज्यादातर वही अंग इस बीमारी के चपेट में आ रहे हैं जिन्हें वो हया या लाज के कारण छुपाती है। जिनका ज़िक्र आसानी से सार्वजनिकतौर पर कर नहीं सकती। इस शर्म के कारण वें काफी देर कर जाती है अपने...

  • बया का घोंसला, कलाकारी की गज़ब मिसाल

    कई बार जब आप गाँव देहातों और जंगलों की सैर पर जाते हैं, कंटीली झाड़ियों और वृक्षों पर बया के घोंसलों देखने मिल जाते हैं। बया पक्षी एक कमाल का कलाकार होता है जिसकी असल पहचान उसका खूबसूरत घोंसला होता है। अक्सर कंटीले पेड़ों पर घास-फूस से बने शाखाओं पर लटकते हुए एक साथ कई घोंसले देखे जा सकते हैं। बया...

  • 'प्रण' भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस की कहानी

    सितम्बर की हवा में गजब की गहमा गहमी थी, एक किस्म की कसमसाहट समझिये। सड़क नागिन की तरह बल खा रही थी जिसकी एक तरफ ऊँची पहाड़िया थी और दूसरी तरफ इतनी गहरी खाई की कोई गिरे तो हड्डियों का सूरमा बन जाए। उसी सड़क पर गहरे रंगो के ट्रकों की कतार आ रही थी, भारतीय सेना के ट्रकों की कतार|आगे क्या हुआ जानने के...

  • कुंभ में पहले शाही स्नान की झलकियां : Kumbh Mela 2019

    प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में से एक कुंभ मेले का शाही स्नान के साथ आगाज हो गया है। भारत समेत कई कई देशों के भक्त, संत और महात्मा कुंभ में पहुंचे हुए है। मकरसंक्रांति पर शाही स्नान के पहले दिन सुबह 9 बजे तक करीब 45 लाख लोगों ने संगम में आस्था की...

  • वो मेरी ज़िन्दगी में आई, और मेरी ज़िन्दगी बदल गई, सुनिए कहानी 'नए दोस्त'

    दिल्ली की ब्लू लाइन बस में हुई एक छोटी सी दुर्घटना में रोहित को मिली वो लड़की जिसने उस बहुत छोटी मुलाक़ात में उसे बदल कर रख दिया. आखिर कौन थी वो लड़की और क्या था वो बदलाव जानने के लिए सुनिए नीलेश मिसरा की आवाज़ में उमेश पंत की लिखी कहानी नए दोस्त 'उफ! फिर वही ब्लू लाइन बस' खचाखच भरी 534 नंबर की...

  • अनरसा याद है? वो देसी मिठाई जिसमें कई यादें घुली होती हैंं...

    मेरी परदादी छत्तीसगढ़ से थीं, मेरी दादी महाराष्ट्र से थीं और मेरी माँ उत्तरप्रदेश से... मैंने अपने घर में एक ही साथ प्लेट में पूरण पोली, छत्तीसगढ़ी खट्टी कढ़ी और हलवा पूड़ी खाई है। पर एक चीज़ थीं जो तीनों लोग बनाते तो अपने-अपने तरीके से थे पर स्वाद एक सा था और वो था 'अनरसा'। अनरसा को देसी मिठाई भी...

  • गरमा-गरम जलेबी और बेड़ई...क्यों आया न मुँह में पानी?

    सुबह के नाश्ते में अगर गरमा-गरम जलेबी और उड़द दाल की पूड़ी (बेड़ई) खाने को मिल जाए तो भैया दिन बन जाए|अब पिछले दिनों गांव कनेक्शन के मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट सुयश साज़िदा पहुंचे आगरा वहां उन्होंने खाई 70 साल पुरानी आगरा की मशहूर देवी राम की बेड़ई (उरद दाल की पूड़ी) और जलेबी|आगरा वासी कहते है कि...

  • तस्वीरों में देखिए ग़म और मातम का दिन मुहर्रम

    मोहर्रम, कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके 72 रिश्तेदारों की याद में मनाया जाता है। पूरी दुनिया के मुसलमान इसे ग़म के महीने के तौर पर मनाते हैं। इराक़ के क़र्बला में हुआ ये धर्म युद्ध, हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और वहां के ख़लीफ़ा इब्न के यज़ीद के बीच हुआ था। मोहर्रम इस्लामी का पहला महीना...

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