कान्वेंट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे ये सरकारी विद्यालय 

कान्वेंट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे ये सरकारी विद्यालय इन प्राथमिक विद्यालयों में मिल रही बेहतर शिक्षा

हमारी कोशिश यही रहती है कि बच्चों को अच्छी सुविधा के साथ पढ़ाई का अच्छा माहौल भी मिल सके। इसमें बच्चों के अभिभावक और ग्रामीणों की भी पूरी मदद मिलती रहती है।

बदायूं। पिछले कुछ वर्षों में गाँवों से शहरों को लोग इसलिए पलायन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने बच्चों को शहर के कान्वेंट स्कूल में पढ़ाना होता है, लेकिन बदायूं जिले में कुछ ऐसे भी सरकारी विद्यालय हैं, जहां पर लोग अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूलों से कटाकर इन सरकारी स्कूलों में करा रहे हैं।

बदायूं जिले के वजीरगंज ब्लॉक के गोठा गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में दो वर्ष पहले तक कोई अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहता था। लेकिन आज यहां पर 138 बच्चों का एडमीशन हुआ है। यहां पर कान्वेंट स्कूल जैसी सारी सुविधाएं हैं। यहां पर सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट क्लास, कम्यूटर लैब जैसी सारी सुविधाएं हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी इंचार्ज गोठा, के डॉ. मनोज कुमार वाष्र्णेय बताते हैं, "दो वर्ष पहले यहां पर आया तो ऐसा कुछ भी नहीं था, यूनिसेफ की मुस्कान परियोजना से हमें बहुत मदद मिली। जो अभिभावक बच्चों को विद्यालय नहीं भेजना चाहते थे, आज वही पैसे इकट्ठा कर हमारी मदद करते हैं। ग्रामीणों की मदद से यहां पर जनरेटर, सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हो गईं हैं।"

ऐसे ही दो और भी विद्यालय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हर्रायपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगपुर पुख्ता भी हैं, जहां पर वो सारी सुविधाएं हैं। ग्रामीणों की मदद से दोनों विद्यालयों में सीसीटीवी, इन्वर्टर, आरओ, कंप्यूटर लैब, बेंच डेस्क जैसी सुविधाएं हो गईं हैं, जिससे बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल रहीं हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, गंगपुर पुख्ता के इंचार्ज प्रवीण कुमार बताते हैं, "जब मेरी यहां पर नियुक्ति हुई तो पूरे स्कूल में गड्ढे थे, बच्चों के खेलने तक कि जगह नहीं थी, गाँव वालों की मदद से कई सैकड़ों ट्राली मिट्टी से गड्ढों को भरा गया, अब बच्चे आराम से खेल सकते हैं।

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अनुसार प्रदेश में 1,13,500 प्राथमिक व 45,700 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, अगर इनमें भी ऐसी सुविधा हो जाये तो कोई भी बच्चा निजी विद्यालयों में न पढ़ने जाएगा।

ज़िला समन्वयक बालिका शिक्षा सीमा रानी चौहान कहती हैं, "इन विद्यालयों के बारे में तो मैं जहां भी जाती हूँ, बताती हूं। ऐसे ही सभी विद्यालय बन जाये तो कोई अपने बच्चों को निजी स्कूल में भेजना ही नहीं चाहेगा।"

मजदूरी छोड़ बच्चे कर रहे पढ़ाई

पूर्व माध्यमिक विद्यालय हर्रायपुर के इंचार्ज कुंवरसेन को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया गया है। "हमारी कोशिश यही रहती है कि बच्चों को अच्छी सुविधा के साथ पढ़ाई का अच्छा माहौल भी मिल सके। इसमें बच्चों के अभिभावक और ग्रामीणों की भी पूरी मदद मिलती रहती है।" पूर्व माध्यमिक विद्यालय हर्रायपुर के इंचार्ज कुंवरसेन बताया।

स्मार्ट क्लास में होती है पढ़ाई

स्मार्ट क्लास में प्रोजेक्टर से होती है पढ़ाई

विद्यालय में स्मार्ट क्लास की भी सुविधा है, जिसमें प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाया जाता है। डॉ मनोज कुमार बताते हैं, "बच्चे वो बातें जो किताबों में नहीं पढ़ पाते फिल्मों के माध्यम से ज्यादा अच्छे से समझ सकते हैं, इसलिए हमने क्लास में प्रोजेक्टर लगाया है।"

लड़कियों के लिए लगाया गया है इंसीनरेटर

विद्यालय में लड़कियों के लिए सैनिटरी पैड के निस्तारण के लिए स्कूल में इंसीनरेटर भी लगाया गया है, जिससे इसका निस्तारण आसानी से हो सके। इंसीनरेटर में सेनेटरी नैपकिन निपटारे की व्यवस्था होती है। इसमें मासिक धर्म के दौरान उपयोग में लाये जाने वाले सैनिटरी नैपकिन के बेहतर डिस्पोजल हो जाता है।

ग्राम प्रधान ने दिव्यांगों के लिए बनाया शौचालय

ग्राम प्रधान ने दिव्यांगों के लिए बनाया शौचालय

ग्राम प्रधान ने अपने पैसों से दिव्यांगों के लिए अलग से शौचालय बनाया है, जिससे दिव्यांगों को परेशानी न हो। सबसे ज्यादा परेशानी दिव्यांगों को होती थी, क्योंकि उनके लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं थी, बच्चों ने ग्राम प्रधान से अपनी परेशानी बतायी। ग्राम प्रधान ने शौचालय का निर्माण कराया।

दो महीनों से 138 बच्चों ने नहीं ली छुट्टी

गोठा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पिछले दो महीने से एक भी बच्चे ने छुट्टी नहीं ली है, इसमें अध्यापकों के साथ ही बच्चों के अभिभावकों की भी अहम भूमिका है।

आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली करकतपुर गाँव की प्रियांशी (11 वर्ष) भी टीचर बनना चाहती हैं, इससे पहले वो भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थीं। प्रियांशी बताती हैं, "हम लोग एक दिन भी छुट्टी नहीं लेते हैं, घर वाले कहीं ले भी जाते हैं तो हम कहते हैं कि हमें स्कूल जाना है। एक भी बच्चा हमारे यहां छुट्टी नहीं लेता है।"

बच्चों के जन्मदिन पर लगाते हैं पौधे

मीना मंच से बच्चे हो रहे हैं मुखर

विद्यालय में जब भी किसी बच्चे का जन्मदिन होता है, उसके नाम पर विद्यालय परिसर में पौधरोपण किया जाता है, अब तक सैकड़ों पौधे लगा चुके हैं। विद्यालय परिसर में आम, अमरूद जैसे कई पेड़ लगा दिए गए हैं।

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