Shubham Koul

Shubham Koul

Shubham has been working as a journalist for 3 years now. He has a keen interest in rural reporting, video journalism and investigative journalism. He is comfortable with both still and video camera work. He is also familiar with producing multimedia content involving interactive tools such as timelines, maps and interactive graphics.


  • जानिए क्यों लगाते हैं माथे पर तिलक, क्या है इसका महत्व

    प्रयागराज। हम कई बार लोगों को तिलक लगाए देखते हैं, सनातन धर्म में आदि काल से माथे पर तिलक लगाने की प्रथा चली आ रही है, हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि बिना तिलक लगाए कोई भी पूजा संपन्न नहीं होती है। लेकिन क्या आपको यह पता है कि तिलक लगाने के क्या नियम हो सकते हैं। तिलक के महत्व के बारे में...

  • बड़ी कठिन होती है नागा साधु बनने की प्रक्रिया

    प्रयागराज। सोलह वर्ष के मनीष गिरि की पहचान अब बदल गई है, अब वो मनीष नहीं मनीष गिरि नागा बाबा के नाम से जाने जाते हैं, इन्हीं की तरह ही हज़ारों ऐसे नागा बाबा हैं जिन्होंने सब कुछ त्याग कर नागा बाबा बनने की राह चुनी। गाजियाबाद के नागा बाबा मनीष गिरी बताते हैं, 'हमारे गुरु जी मुक्ति हमें मुक्ति सीखा...

  • देखिए कैसे बनता है लखनऊ का सबसे ऊंचा रावण का पुतला

    लखनऊ। विजयदशमी के दिन देश भर में रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि रावण के बड़े बड़े पुतले बनाने में कितनी मेहनत लगती है और कौन बनाता है।ऐशबाग में हर साल लखनऊ की सबसे बड़े रावण का पुतला लगाया जाता है, इसे बनाने में महीनों की मेहनत लगती है और बनाने वाले ज्यादातर कलाकार मुस्लिम ही...

  • देखिए पर्दे के पीछे रामलीला के कलाकार करते हैं कितनी मेहनत 

    लखनऊ। पांच सौ साल अधिक समय से हर वर्ष मंचित हो रही है ऐशबाग रामलीला समय के साथ दर्शकों को और भी पसंद आ रही है, लेकिन सभी स्टेज पर कलाकारों की अदाकारी को देखते होंगे लेकिन पर्दे के पीछे कलाकार कितनी मेहनत करते हैं, कैसे वो हर एक किरदार को सजीव बना देते हैं।ऐशबाग रामलीला समिति में ज्यादातर कलाकार...

  • अब और डरकर नहीं रहेंगे एलजीबीटी समुदाय के लोग

    लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को रद्द करके दो वयस्कों के बीच समलैगिंक संबंधों को मंजूरी दे दी है। कोर्ट के फैसले के बाद हम भारतियों को दूसरी आजादी मिली है, जिन्हें अंग्रेजों द्वारा अधनियमित कानून को बनाए रखा गया है। अब एलजीबीटी समुदाय के लोग बेपरवाह, बिना किसी से डरे सड़क पर चल सकते हैं।ये भी...

  • प्रधानाध्यापक की पहल : दिमागी बुखार से प्रभावित इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उपलब्ध करा रहे आरओ का पानी

    रामकोला (कुशीनगर)। किसी बच्चे की दिमागी बुखार से मौत न हो, इसलिए हर बच्चे के लिए विद्यालय में आरओ का पानी मंगाया जाता है, यही नहीं यहां के हर बच्चे को पता है कि दिमागी बुखार कैसा फैलता है और इससे कैसे बचा जा सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हर साल दिमागी बुखार से बच्चों की मौत हो...

  • गन्ने की खेती से क्यों दूर हो गए पूर्वांचल के किसान

    कुशीनगर। एक समय था जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा गन्ना उत्पादन पूर्वांचल में होता था, लेकिन गन्ने का सही समय पर भुगतान न मिलने पर किसानों ने गन्ने की खेती को कम कर दी है, जो किसान अभी भी खेती कर रहे हैं वो भी गन्ने को छोड़ दूसरी फसलों की खेती करना चाहते हैं। कुशीनगर जिले के रामपुर...

  • तस्वीरों में देखिए : दिमागी बुखार से प्रभावित बच्चे और उनका परिवार

    गोरखपुर। पूर्वांचल के कई जिलों में दिमागी बुखार से किसी तरह बच्चे बच तो गए, लेकिन उनका पूरा परिवार इस बीमारी से जूझ रहा है।तेरह साल की पिंकी जेईएस से बच तो गईं, लेकिन अब वो न बोल पाती हैं और ही खा पाती हैं। पिंकी की तरह ही सैकड़ों बच्चे हैं जो जेईएस से बच तो गए लेकिन पैरालाइसिस से उनकी ज़िंदगी...

  • एक बार फिर खाली हाथ गन्ना किसान

    मुजफ्फरनगर/लखनऊ। 'गन्ने का पैसा अब तक नहीं मिला। न तो घर खर्च चला पा रहे हैं और न ही समय पर बच्चों की फीस जमा कर पा रहे हैं, अगर ऐसे ही पैसे नहीं मिले तो अगली फसल की बुवाई कैसे करेंगे, 'भुगतान पाने के लिए चीनी मिल का दर्जनों बार चक्कर लगा चुके, परेशान किसान रामपाल ने गुस्से से कहा।किसान रामपाल सिंह...

  • Living on the edge: A photo essay on the community of waste pickers in New Delhi

    Located on the outskirts of South Delhi, Okhla Landfill is one of the biggest landfill site in New Delhi. Okhla Landfill consists of monstrous trash mountains, including hazardous waste, leaching out toxic liquids and rising stinking fumes. Atop the pile of clutter is a community of waste pickers...

  • क्या आप जानते हैं कितनी तरह की हैं आल्हा की कहानियां

    हम सभी ने कभी न कभी आल्हा जरूर सुना होगा, जिसकी शुरूआत बुंदेलखंड के महोबा में हुई थी, लेकिन कम ही लोग जानते होंगे की आल्हा के पचास से अधिक भाग हैं। आल्हा लोकगीत की एक विधा है, जिसकी शुरूआत बुंदेलखंड के महोबा में हुई थी, आल्हा व उदल महोबा के राजा परमाल के सेनापति थे। बस यही से आल्हा गीत...

  • इस पानी से आप कपड़े धुलना भी पसंद नहीं करेंगे, लोग पीने को मजबूर हैं... देखिए वीडियो

    दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में शुमार गंगा और यमुना का संगम होता है, यहां प्रयाग के तट पर दुनियाभर के लोगों का सैलाब उमड़ता है.. देश के पहले प्रधानमंत्री इसी इलाहाबाद से थे। लेकिन इसी इलाहाबाद का एक इलाका है जो बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है, ये पानी के लिए घंटे लाइन लगाते हैं और ये पानी निचोड़ कर...

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