इनका चिमटा रसोई में नहीं, स्टेज पर बजता है, इनकी धुन आपने सुनी है?

इनका चिमटा रसोई में नहीं, स्टेज पर बजता है, इनकी धुन आपने सुनी है?‘मेरी जिंदगी’ फीमेल रॉक बैंड में चिमटा, बेलन, थाली और ओखली से बनता है संगीत 

महिलाओं का ये बैंड सबसे अलग इसलिए है क्योंकि यहां किचन के सामान से धुन निकलती है। चिमटा, बेलन, थाली और ओखली से संगीत बनता है। इस बैंड में न कोई बड़ा साज है न कोई बड़ा गायक। इसकी धुन अगर आप भी सुनेंगे तो सुनते रह जाएंगे...

लखनऊ। जब भी हम बैंड का नाम सुनते हैं हमारे जेहन में सिर्फ पुरुषों की तस्वीर उभरकर आती है पर लखनऊ का ये फीमेल मिशन रॉक बैंड महिलाओं द्वारा बनाया भारत का पहला मिशन फीमेल रॉक बैंड है। ये बैंड सिर्फ गीतों के माध्यम से ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के लिए जागरूकता नहीं फैला रहा है बल्कि ये बैंड एक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहा है। सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अब तक ये बैंड कई बच्चियों की शिक्षा को स्पांसर कर चुका है।

“बैंड के नाम पर अकसर स्टेज पर लड़कों को ही परफ़ॉर्मेंस करते देखा था, लड़कियां अगर दिखाई भी देती थी तो वो एक तरफ कोने में खड़ी रहती थी। तब मुझे लगा क्यों न एक ऐसे बैंड की शुरुआत की जाए जिसमे सिर्फ लड़कियां हो, इसी सोच के साथ इस बैंड की शुरुआत हुई।” ये कहना है डॉ. जया तिवारी का जो इस बैंड की संस्थापक है। इनका कहना है, “महिलाओं के बैंड तो कई हो सकते हैं लेकिन हमारा बैंड एक मिशन को लेकर आगे बढ़ रहा हैं, हम मनोरंजन के लिए प्रस्तुति नहीं देते हैं हमारी प्रस्तुती महिलाओं और लड़कियों को ये बताने की कोशिश करती है कि आपके अन्दर एक शक्ति है जिसे पहचानो और आगे बढ़ो। चाँद पर पहुंचना कोई राकेट साइंस नहीं है, इसके लिए बस हमे प्रयास करने की जरूरत है।”

मेरी जिंदगी’ बैंड के तरानों का है अपना मकसद

इस मिशन फीमेल रॉक बैंड का नाम ‘मेरी जिन्दगी’ है। जिसकी शुरुआत साल 2010 में की गयी, इसमे पांच से छह फीमेल साथी हैं। इस बैंड का मुख्य उद्देश्य है कि महिलाएं अपनी शक्ति पहचाने और आगे बढ़े। संगीत के माध्यम से कोई भी सन्देश पहुंचाना बहुत आसान है। इसलिए ये बैंड सरकार की कई योजनायें जैसे ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला सम्मान प्रकोष्ठ, 1090, जल संरक्षक विभाग, सिफ्सा, वोट अपील, जननी परिवार कल्याण विभाग, निडिल 2017 जैसी तमाम योजनाओं के प्रचार प्रसार के साथ-साथ कई गैर सरकारी संस्थाओं के लिए भी अपनी प्रस्तुति दे चुका है।

इस बैंड ने अबतक 100 से ज्यादा प्रस्तुति उत्तरप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में लाखों लोगों के बीच में पहुंचकर दी हैं। इस बैंड ने सन्देश आधारित 60 से ज्यादा गीत गाये हैं जो हर बेटी और महिला की जिन्दगी को बेहतर, जिंदादिली, सकारात्मकता से भरपूर, जोश से भरपूर उमंग से परिपूर्ण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए बनाये गये हैं। इसका मुख्य आकर्षण ओखल और चिमटा हैं जिसे साज के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इस बैंड की एक सीडी ‘परवाज’ लांच हो चुकी है दूसरी जल्द ही आने वाली है।

इस बैंड के सभी सदस्य बेफिक्र होकर बेटी बचाओ का देते हैं संदेश

डॉ. जया तिवारी इस बैंड में गाये जाने वाले सभी गीत खुद ही लिखती हैं और म्यूजिक भी खुद बनाती हैं। ये गीत और म्यूजिक वो ज्यादातर अपने किचन में रोटी बेलते, सब्जी काटते हुए बनाती हैं। जया को बचपन से ही म्यूजिक से लगाव था पर इनके परिवार में म्यूजिक को अच्छा नहीं माना जाना था। पर जब इन्होने म्यूजिक सीखने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की तो इनके पिता ने इन्हें पूरा सपोर्ट किया जिसकी वजह से आज ये भारत का पहला फीमेल मिशन रॉक बैंड बनाने में सफल हो पायीं हैं। जया ने बचपन में बाल कलाकार की कई भूमिकायें निभाने के साथ ही बतौर रेडियो जाकी विभिन्न रेडियो स्टेशनों में कई वर्षों तक काम भी किया हैं। वर्तमान में बीबीडी सामुदायिक रेडियो एवम सोशियो कल्चरल की प्रमुख हैं।

इस बैंड की संस्थापक हैं डॉ जया तिवारी

लखनऊ के गोमतीनगर में रहने वाली जया बताती हैं, “हमारे गीतों के माध्यम से लोगों में सकारात्मक विचार आयें ये हमारी कोशिश रहती हैं, मेरे गीतों में प्रेरणा होती है जूनून होता है। सभी गीत सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। जिसमे महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुख्य हैं, सिर्फ गीत गाकर ही सन्देश नहीं देते हैं बल्कि सीधे तौर पर लोगों की मदद कर पायें ये भी हमारा प्रयास रहता है।” वो आगे बताती हैं, “शुरुआत में चार बच्चियों की पढ़ाई का खर्चा उठाया था आज ये बैंड छह बच्चियों की पढ़ाई का खर्चा उठा रहा है। मुझे बैंड की टीम पर पूरा विश्वास है कि एक दिन ऐसा जरुर आएगा जब हम भारत को इस फीमेल मिशन बैंड को विदेश में रिप्रेजेंट कर पायेंगे।”

मनोरंजन नहीं एक मिशन है ये बैंड

मेरी जिन्दगी फीमेल रॉक बैंड मनोरंजन के लिए शुरू नहीं किया गया है। ये बैंड एक मिशन को लेकर आगे बढ़ रहा है, गीतों के माध्यम से अपने मिशन को एक नयी गति दे रहा है। हर बेटी को जन्म लेने का अधिकार है और उसे पढ़ने का पूरा हक है। एक शिक्षित बेटी ही इस समाज को एक नई दिशा दे सकती है इसी उद्देश्य ये इस बैंड की बेटियां अपने इस मिशन बैंड को संचालित कर रही हैं।

किचन के सामान से यहां निकलती है धुन

जया का कहना है, “ये बैंड ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ मिशन को लेकर आगे बढ़ने कि वजह से ये भारत का पहला बैंड है जो मनोरंजन के लिए नहीं बना है बल्कि अपने सन्देश को लोगों तक आसानी से पहुँचाने के लिए इसे बैंड का नाम दिया गया है।” इस भागदौड़ और तनाव भरी जिन्दगी में भाषण देकर किसी को कोई सन्देश पहुंचाना और समझाना बहुत मुश्किल काम है। ऐसी स्तिथि में इस बैंड के गीत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

महिलाओं को एक मीडिया मंच मिले इसके लिए इस बैंड ने आनलाइन महिला रेडिओ स्टेशन शुरू किया

महिलाओं का ये बैंड समय-समय पर कई तरह की नई गतिविधियाँ करता रहता है। इसी क्रम में इस बैंड ने साल 2016 में एक आनलाइन महिला रेडियो स्टेशन शुरू किया जिसका उद्देश्य है कि सिर्फ यूपी की ही महिलाओं को नहीं बल्कि देश-विदेश में रहने वाली महिलाओं को भी एक ऐसा मंच मिले जहाँ पर वो खुलकर अपनी बात साझा कर सकें। ये आनलाइन रेडियो महिलाओं द्वारा ही संचालित किया जा रहा है, इसे कोई भी आनलाइन ‘रेडियो मेरी जिन्दगी डाट काम 2016’ पर जाकर अपनी बात साझा कर सकता है।

यहां न कोई बड़ा साज होता है न कोई बड़ा गायक

एक बेटी होकर बेटियों को बचाना अच्छा लगता है

इस बैंड को मैनेज करने वाली बीबीडी सामुदायिक रेडियो की आरजे निहारिका दुबे बहुत ही जोशीले अंदाज में बताती हैं, “एक बेटी होकर हजारों बेटियों को बचाने का सन्देश दे पा रहे हैं ये हमारे लिए गर्व की बात है, किसी भी विषय पर स्पीच से ज्यादा हमारे गीत चोट करते हैं, हमने गीतों को सुनकर लोगों को रोते देखा हैं, हमारे शो के दौरान बेटियां अपनेआप को रोक नहीं पाती हैं और स्टेज पर आकर हमारा साथ देने लगती हैं।”

निहारिका बहुत बड़े बदलाव की बात हो नहीं करती हैं पर ये जरुर कहती हैं, “लड़कियों का स्टेज तक पहुंचना और हमारे साथ मिलकर जोशीले अंदाज में गाना भी एक बदलाव है। हमारे गीत इतने जोशीले और दिल को झकझोरने वाले होते हैं कि किसी भी शो में आये कुछ लोगों की मानसिकता को जरुर बदलतें हैं। लड़कियों का ये बैंड एक और सन्देश देता है कि महिलाएं भी बैंड का संचालन कर सकती हैं।” इस बैंड की मेघना सीटी बजाती हैं, लाडो इस बैंड की सबसे छोटी सदस्य हैं। जया के अलावा इस बैंड में उत्सवी बनर्जी, पूर्वी मालवीया, सौभाग्या दीक्षित, मेघना, निहारिका और लाडो हैं। समय-समय पर इस टीम में लोग कम ज्यादा होते रहते हैं।

ये बैंड अबतक लाखों लोगों के बीच में सैकड़ों प्रस्तुति दे चुका है

जया ने किचन में लिखे बैंड के 80 फीसदी गाने

वैसे जया को किचन में बहुत ज्यादा वक़्त गुजारना अच्छा नहीं लगता है इनका मानना है कि अगर चाँद पर जाना है तो किचन को बाय कहना होगा। जया जितना भी वक़्त किचन में गुजारती हैं उस दौरान ये अपने बैंड के लिए या तो गीत की लाइनें बना रही होती हैं या फिर उन गीतों के लिए धुनें निकाल रही होती हैं।

जया बताती हैं, “मै किचन में सब्जी काटते हुए, चाय बनाते हुए, बेलन से रोटी बेलते हुए, चिमटा से रोटी पकाते हुए, किचन का समान इधर-उधर रखने के दौरान अपने 80 प्रतिशत से ज्यादा गीत यहीं पर लिख लेती हूँ और यहीं से धुनें भी निकाल लेती हूँ।” किचन में ज्यादातर गीत लिखने की वजह से जया का मानना है, “ओखल और चिमटा हमारे गीतों में ये सन्देश देते हैं कि एक महिला के लिए घर के काम उसके लिए कमजोरी नहीं बल्कि उसकी ताकत है, अगर जरूरत है तो उसे सही ढंग से मौका मिलने की, जिससे वो इसे अपनी ताकत मान पाए।”

बेटी बचाओ के साथ महिला सुरक्षा की मुहिम में भी ये बैंड गाता है कई गीत

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