मिलिए कुछ ऐसे लड़के-लड़कियों से जो शराब को न कहना जानते हैं

गाँव कनेक्शन विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया (WHO SEARO) के साथ मिलकर एक जागरूकता अभियान चला है, मेरी प्यारी जिंदगी नाम की इस सीरीज में ऑडियो और वीडियो के जरिए शराब से होने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सीरीज की इस भाग में मिलिए कुछ ऐसे लड़के-लड़कियों से जो शराब को न कहकर भी जिंदगी जीने का आनंद ले रहे हैं।

बीस साल की उम्र में युवा, प्रखर तिवारी को दृढ़ विश्वास है कि शराब किसी इंसान की जिंदगी जीने की क्षमताओं को सीमित कर देती है।

"यह आपको असल जिंदगी से अलग करता है। नशे में धुत इंसान अपने आस-पास के लोगों से अलग हो जाता है और उसके विचार उसके जिंदगी से बिल्कुल अलग हो जाते हैं। अगर किसी को खुशी और संतोष से भरा जीवन जीना है, तो उसे उन चीजों के लिए 'आदी' बनना चाहिए जो उसके सेहत के लिए सही हो, "तिवारी ने गांव कनेक्शन को बताया।

तिवारी की इन बातों को गांव कनेक्शन द्वारा जारी एक वीडियो में दिखाया गया है, जो कुछ युवाओं इंटरव्यू है जिन्होंने कभी भी शराब को हाथ नहीं लगाया है और वो अपने बारे में बता रहे हैं।

वीडियो "मेरी प्यारी जिंदगी" सीरीज का एक भाग है, जो भारत के सबसे बड़े ग्रामीण मीडिया प्लेटफॉर्म गांव कनेक्शन और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूएचओ सीआरओ) का एक जागरुकता अभियान है।

नशे और जिंदगी पर तिवारी की सोच से शुभी अग्रवाल भी इत्तेफाक रखती हैं। शुभी अग्रवाल, जो पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, का मानना ​​है कि जिंदगी में नशा स्वस्थ रहने का भी हो सकता है।

"सूरज निकलने से पहले उठो और साइकिल चलाओ। उगते सूरज का नजारा देखने लायक होता है। साइकिल चलाने से आपकी कैलोरी भी बर्न होगी, "अग्रवाल ने गांव कनेक्शन को बताया।

कैसे इसकी वजह से लोगों के खर्च बढ़ जाते हैं, इस पर बात करते हुए, डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर शुभम चौहान ने कहा कि शराब पीने से न केवल किसी इंसान के शरीर पर असर पड़ता है, बल्कि उसके आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है।

"यह हर तरह से आपके ग्रोथ को रोकता है। मेरे दोस्तों और सहकर्मियों के लिए कठिन समय होता है जब वे मुझे ड्रिंक्स के लिए बुलाते हैं, क्योंकि मैं उनके सभी स्नैक्स खा लेता हूं। मैं उनसे जुड़ता हूं लेकिन कभी शराब नहीं पीता, "चौहान ने कहा।

शराब पीना कूल या नामाकूल ?

शुभी अग्रवाल ने कहा कि शराब से दूर रहने के उनके फैसले के कारण वो अक्सर लोगों से अलग हो जाती हैं, लेकिन उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है।

"जब भी मेरे दोस्त मुझे ड्रिंक्स के लिए बुलाते थे, तो मैं अपनी नॉन-अल्कोहलिक कोल्ड्रिंक के साथ बैठ जाता था और अपने पास रख लेता था। उन्होंने मुझसे बार-बार सवाल किया कि क्या मुझे सच में इसे एंजॉय कर रही हूं क्योंकि मैं शराब नहीं पी रहा हूं। यह परेशान करने वाला है। अगर मैं किसी पार्टी में शामिल हो रही हूं, तो यह मेरा अधिकार है कि मैं अपने पसंद का करूं, "शुभी ने आगे कहा।

उन्होंने कहा, "अगर इन सो कॉल्ड 'कूल' लोगों में इसे समझने का सेंस नहीं है, तो ये कूल लोग बहुत ही नामाकूल हैं।"

यह पूछे जाने पर कि जब दोस्त शराब पीने की जिद करते हैं तो वह क्या करता है, पेशे से कंटेंट राइटर अमन गुप्ता ने कहा कि उन्हें कभी-कभी शराब न पीने के अपने फैसले पर जोर देना पड़ता है।

"कभी-कभी, दोस्त 'नहीं' शब्द को नहीं समझते हैं। लेकिन फिर भी, मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि मैं न पिऊं, "उन्होंने कहा।

'अल्कोहल की मात्रा क्षणिक होती है, संयम में आनंद लेने से यादें बन जाती हैं'

एक छात्रा आकांक्षा सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया कि मस्ती करने के लिए शराब पीना व्यर्थ है क्योंकि लोगों को शायद ही याद हो कि उन्होंने नशे में क्या किया था।

इसी तरह, पेशे से एक फोटोग्राफर, पूर्वी आनंद ने कहा कि उन्होंने देखा है कि शराब पीने से जिंदगी में गैरजरूरी उपद्रव होता है।

"मैं मुंबई में एक किराएदार के रूप में रह रही थी और अक्सर मेरे दोस्त पार्टी करने के लिए आते थे। शराब की वजह से अक्सर परेशानी होती थी और मैं इस बात को लेकर टेंशन में रहती थी कि कहीं मकान मालिक मुझे घर खाली करने को न कह दे, "पूर्वी ने याद किया।

एक छात्रा अदिति तिवारी ने कहा कि नशा किसी ड्रिंक का होना जरूरी नहीं है।

"यह एक शौक हो सकता है! गाना और डांस भी तो एक नशा हो सकता है। अगर किसी को कुछ ऐसा करने में मजा आ रहा है जिससे उन्हें शांति मिले, तो वह पूरा उद्देश्य है। यह कुछ ऐसा नहीं है जो आपकी जिंदगी को बर्बाद कर रहा है बल्कि कुछ ऐसा है जो आपको शांति से आनंद लेने में मदद करता है, "अतिदि ने कहा।

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