ग्रामीणों को बिजली का बिल दे रहा है झटका

ग्रामीणों को बिजली का बिल दे रहा है झटकागाँव कनेक्शन

लखनऊ। राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में बगैर मीटर चेक किए बिना लोगों को बिल थमाया जा रहा है। इतना ही नहीं हर महीने करीब एक हजार रुपए का बिल ग्रामीणों का चुकाना मजबूरी बन चुका है।

जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर मलिहाबाद क्षेत्र में ग्रामीणवासियों के घर पर मीटर लगाए हुए एक साल हो गया लेकिन अभी तक कोई भी बिजली विभाग का कर्मचारी मीटर रीडिंग करने के लिए नहीं आया है। मीटर रीडिंग चेक न होने के कारण उपभोक्ताओं को 800 रु से 1000 रुपए देने पड़ रहे हैं बिल चाहे 50 यूनिट का ही हो।

ग्रामीण क्षेत्र में बिजली 16 घण्टे आनी तो बताई जाती है लेकिन सिर्फ 10 घण्टे ही मुहैया कराई जा रही है। इसके बाद भी इतना बिल ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। कई बार इसकी शिकायत ग्रामीणों ने बिजली विभाग में लेकिन समस्या जस की तस बनी है। गाँव आजादनगर के रमेश बताते हैं, “मुझे अपने घर पर मीटर लगवाए एक साल हो गया लेकिन अभी तक मीटर रीडिंग करने कोई भी बिजली विभाग का कर्मचारी नहीं आया। 

अपने मन से ही बिजली का बिल बनाकर भेज देते हैं। हमारे घर में तीन बल्ब और एक पंखा है। इन सभी उपकरणों का हर महीने बिल 800 से 1000 तक आ जाता है।”

बिल को कम कराने के लिए ग्रामीणों ने माल ब्लाक के रामनगर गाँव में स्थित उपकेन्द्र का छह महीने पहले घेराव भी किया तो बिजली विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि अगले महीने से मीटर रीडिंग के आधार पर ही बिल दिया जाएगा लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

कई बार इस बाबत गाँव के लोगों ने विद्युत विभाग के अधिकािरयों से जाकर भी बातचीत की लेकिन नतीजा सिफर निकला, अधिकािरयों ने आश्वासन तो दिया पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई।

बिजली विभाग के कर्मचारी रंजीत बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में लगे मीटर की रीडिंग करने के लिए एक टीम का गठन किया जा रहा है। जो हर महीने गाँव-गाँव में जाकर मीटर रीडिंग करेंगे और मीटर के हिसाब से रुपए लिए जाएंगे।      

रिपोर्टर - सतीश कुमार सिंह

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