ग्रामीणों में फैल रहा उच्च रक्तचाप

ग्रामीणों में फैल रहा उच्च रक्तचापगाँव कनेक्शन

पुणे (भाषा)। आमतौर पर यह धारणा है कि ‘खामोश हत्यारा’ कहलाने वाली हाइपरटेंशन एक शहरी बीमारी है लेकिन ऐसा नहीं है ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से ये बीमारी पैर पसार रही है। पुणे में किए गए एक मानक अध्ययन में यह बात सामने आई है।   

अध्ययन में पाया गया है कि जीवनशैली से जुड़ी इस बीमारी के मामले ग्रामीण जनसंख्या में बढ़ रहे हैं। पुणे के गाँव को उदाहरण बताते हुए यह अध्ययन देशभर के ग्रामीण इलाकों में पनप रही इस नई बीमारी की गंभीरता की ओर इशारा करता है।

पुणे के पास कामशेत के पांच गाँवों में कराए गए समुदाय आधारित अध्ययन में पाया गया है कि 30 साल से ज्यादा उम्र के जो लोग तंबाकू और शराब का सेवन करते हैं, ज्यादा नमक खाते हैं और खानपान एवं शारीरिक गतिविधियों की अनुचित शैली अपनाते हैं, उनमें उच्च रक्तचाप पाया गया है।

अध्ययन के अनुसार, “हमारे परिणाम बताते हैं कि 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में बढ़े हुए रक्तचाप की पहचान करने के लिए उच्च जोखिम वाले जांच कार्यक्रम जरूरी हैं क्योंकि ये लोग हाइपरटेंशन का शिकार होने के लिहाज से भारी खतरे में हैं।” अध्ययन के अनुसार, “हाइपरटेंशन की आधुनिक महामारी को रोकने के लिए शुरुआती लक्षणों की पहचान करना जरूरी है”। 

शोधकर्ता ने डॉ. अमित मिश्रा ने कहा, “यह महामारी अब ग्रामीण इलाकों में भी फैल रही है। उच्च रक्तचाप की प्रमुख वजह ज्यादा नमक खाना है। इसका आकलन करने के लिए प्रति माह खरीदे जाने वाले नमक को परिवार के सदस्यों की संख्या से भाग दिया गया। इसके बाद प्रति व्यक्ति एक दिन में किए जाने वाले नमक के उपभोग का आकलन किया गया। यह पांच ग्राम प्रति दिन के आम मानक से ज्यादा पाया गया।” 

शोधकर्ता ने डॉ. अमित मिश्रा के साथ मिलकर 226 लोगों पर यह सर्वेक्षण किया। 66 लोगों में उच्च रक्तचाप पाया गया। इनमें से 49.2 प्रतिशत पुरुष और 21.1 प्रतिशत महिलाएं थीं। परिणामों में पाया गया कि धुंआरहित तंबाकू का उच्च उपभोग भी इसके कारणों में से एक है। इसके कारण समुदाय के भीतर तंबाकू नियंत्रण उपायों की जरूरत पाई गई। हालांकि उच्च रक्तचाप के साथ इसके संबंध की पुष्टि के लिए व्यापक अध्ययन किए जाने जरूरत है।  

                       

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