हाईकोर्ट की रोक के बाद भी धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा

हाईकोर्ट की रोक के बाद भी धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा

इलाहाबाद/जौनपुर। भारत में चाइनीज मांझे की बिक्री पहले से प्रतिबंधित है जिस पर गुरुवार को हाईकोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश में इसका कड़ाई से पालन करने का निर्देश दे दिया है। इसके बाद भी जिला प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में फेल साबित हो रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे इसका कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। इसके बाद भी आज तक चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नगर कोतवाली के कालीकुत्ती में बीते 15 सितंबर की सायं उमरपुर निवासी उत्तम दूबे की चाइनीज मांझे से मौत हो चुकी है। इसके बाद एक छात्र चाइनीज मांझे से गला कटने पर घायल हो चुका है। इसके पूर्व भी चाइनीज मांझे से युवती का गला कटने पर उसने मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की। मकर संक्रांति आने के साथ ही पतंग की दुकानें भी सज जाती हैं। जनपद के प्रमुख स्थानों व खासतौर पर नगर में चाइनीज मांझों की बिक्री तेजी से हो रही है। जिसमें प्रमुख रूप से चहारसू चौराहा, ओलन्दगंज, नखास, रूहट्टा, पान दरीबा, पुरानी बाजार, नवाब युसुफ रोड, मुफ्ती मोहल्ला व अन्य जगहों पर चाइनीज मांझे बेचे जा रहे हैं। घटना में जिस प्रकार से मौत हो रही है कई लोग आए दिन मांझे से घायल हो रहे हैं। इससे यह साफ पता चल रहा है कि हर गली व हर घर में मौजूद चाइनीज मांझे अभी और कितनों की जान लेंगे। यह तो वक्त बताएगा। इससे बाद भी प्रशासन इसके लिए सुध नहीं ले रहा है। देखना यह है कि आखिर कब प्रशासन अवैध कारोबार करन वालों के खिलाफ अभियान चलाएगा। 

सिर्फ एक बार चला था अभियान

एक बार अभियान चलाने के बाद प्रशासन शांत बैठा है। मामला ठंडे बस्ते में जाने के कारण मांझे का कारोबार करने वाले लोग पुन: धड़ल्ले से इसकी बिक्री तेज कर दिए है।

एक बार बनने के बाद नहीं होता है नष्ट

शीशे के चूरे व गोंद से चाइनीज मांझे को बनाया जाता है। यह पूरी तरह से रेजर जैसा काम करता है। जिससे वह एक बार बनने के बाद शीशे के कारण कभी नष्ट नहीं होता है। ऐसे में इसका विक्रय करने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। 

2009 से लगा है प्रतिबंध

वर्ष 2009 से भारत में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गुजरात में एक बार चाइनीज मांझे से एक हजार चिडिय़ां मर गई थीं। पेड़ों व खंभे में फंसे मंझे से चिडिय़ां घायल होकर मर गई हैं। जिसके बाद से गुजरात, पंजाब व चेन्नई में सबसे पहले चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाया गया था।

यह सिर्फ पतंग के शौकीनों की सनक है

पतंगबाजों में प्रतिस्पर्धा के कारण कि कौन किसकी पतंग को सबसे ज्यादा काटता है। एक हजार मीटर चाइनीज मांझा 75 रुपये व इंडियन मांझा 70 रुपये में बिकता है। इसको बनाने के लिए शीशा को चूर करके धागे पर गोद के साथ चिपका देते है।

ऐसे पहुंचाता है नुकसान 

मांझा अगर किसी के शरीर को छू जाए तो कटना तय है। गर्दन में छू जाए तो गर्दन कटने के साथ-साथ जहर फैल जाता है। खून की सप्लाई वाली नस, हृदय से मस्तिष्क जाने वाली नस, श्वास की नली, खाने की नली भी कट जाती है। जिससे मौत भी हो सकती है। पतंग उड़ाते समय उंगली कटने पर हाथ पकने लगता है। यह इतना दुष्प्रभावी होता है कि अगर एक बार बन गया तो नष्ट नहीं होता है। 

हाईकोर्ट ने लगाई चीनी मांझे पर रोक

इलाहाबाद। कई जिलों में चायनीज मांझे से हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि लोहा व शीशे के चूरे के साथ बने चायनीज प्लास्टिक मांझे की बिक्री व प्रयोग दोनों को रोका जाए। उन स्थलों को भी सीज किया जाए, जहां इन्हें रखा या बनाया जा रहा है। बता दें कि नये पुल पर चाइनीज मांझे से छात्र गौरव मुखर्जी का गला कटने से मौत के बाद चाइनीज मांझा सुर्खियों में आ गया था। इससे पहले भी मांझे से कई जानें जा चुकी हैं। घायलों की संख्या तो सैकड़ों में है।

रिपोर्टर - करन पाल सिंह

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