इन दिनो सोनभद्र में जोरों पर चल रही है हरे सोने की तोड़ाई

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दुद्धी (सोनभद्र)। प्रदेश की सबसे अधिक वन क्षेत्र वाले जिले सोनभद्र के आखिरी छोर पर बसे दुद्धी तहसील को सर्वाधिक वन सम्पदाओं का केंद्र माना जाता है। तहसील क्षेत्रों के जंगलों में हरे सोने के रूप में तेंदू पत्ते की तुड़ाई इन दिनों जोरों पर चल रही है। 

गाँव के लोग भोर करीब तीन बजे अपने घरों से निकलकर पत्ते की तुड़ाई में जुट जाते हैं। करीब 10 बजे घर वापस आकर दोपहर बाद पत्तों को एकत्र कर गड्डी बनाने में जुट जाते हैं और शाम को तेंदू पत्तों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के नाचनटाड़ गाँव के लोगों को गरीबी और बेबसी घेर रखा है। पढ़ने की उम्र में बेटियां पेट पालने के लिए तेन्दू पत्ते की तुड़ाई कर रहे हैं।

देश में गरीबों के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं पर जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। जरा सोचिए 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में आठ से लेकर चौदह वर्ष की मासूम बेटियां जंगलों से तेन्दूपत्ता की तुड़ाई कर परिवार का भरण-पोषण करने में लगी हुई हैं।

गड्डी बना रहीं स्कूली छात्राएं रीना, शोभा, कुसुम ने बताया कि स्कूल आजकल बन्द रहता है इसलिए हम लोग पत्ते तोड़ने चले जाते हैं। तेंदू पत्ता खरीदने वाली संस्था के इकाई अधिकारी से बच्चों के सम्बन्ध में जानकारी पूछी गयी तो उन्होंने चुप्पी साध ली। उधर, संस्था के ही प्रबन्धक राकेश चंद्रा ने बताया, “बच्चों से तेंदूपत्ता की खरीदारी नहीं किया जा रही है। बच्चों के अभिभावक जंगलों में साथ ले जा रहे होंगे। तेंदूपत्ता की तुड़ान की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। इस वर्ष तेंदू पत्ता तुड़ान का लक्ष्य रेनुकूट और ओबरा लौंगिग प्रभाग के तहत एक लाख दो हजार मानक बोरा का रखा गया है।

 रिपोर्टर - भीम जायसवाल 

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