कार वालों का अंत्योदय कार्ड

कार वालों का अंत्योदय कार्डगाँव कनेक्शन

लखनऊ। कुर्सी रोड पर स्थित पलका ग्राम पंचायत में रहने वाली मैसर जहां (42 वर्ष) दूसरों के घरों में बर्तन मांजती हैं, उनके पति चंदू मजदूरी करते हैं लेकिन उनके पास किसी तरह का राशन कार्ड नहीं है। हालांकि इसी गाँव में रहने वाले वशीक खां का नाम लाभार्थियों की सूची में है। वशीक के घर के बाहर चार पहिया वाहन तो खड़ा ही रहता है, घर में एसी भी लगी है। 

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर उत्तर दिशा के पलका गाँव के दर्जनभर लोग मंगलवार को बीकेटी तहसील गए थे, जिन्होंने राशनकार्ड में बड़े घालमेल की शिकायत की है, जिस पर डीएम राजशेखर ने जांच के आदेश दिए हैं। 

पलका के मिस्बाहुल खान (34 वर्ष) बताते हैं, “मेरे गाँव में 403 लोगों के पास करीब कार्ड है, इनमें से 20 अपात्र लोगों के पास हैं।” लखनऊ में ही माल तहसील की एसडीएम नीतू यादव बताती हैं, “जब से खाद्य सुरक्षा योजना लागू हुई हैं, राशन कार्ड को लेकर शिकायतें बढ़ गई हैं। तहसील दिवस में 20-30 फीसदी शिकायतें राशन कार्ड को लेकर होती हैं।” ये समस्या लगभग पूरे प्रदेश में है। 

मंगलवार को ही बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्लॉक में सौरंगा ग्राम पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने एसडीएम फतेहपुर के सामने तहसील दिवस में गुहार लगाई। कोटेदार पर घटतौली, अपात्र लोगों को राशन देने और मनमानी का आरोप लगाया गया। अंत्योदय कार्डधारक मो. नजीर ने बताया, “गांव में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है, हम लोगों के पास कार्ड है तो राशन नहीं मिलता जबकि कई लोग ऐसे हैं जो बड़े आदमी हैं लेकिन उनके पास कार्ड हैं।”     

खाद्य एवं आपू्र्ति विभाग की वेबसाइट के मुताबिक प्रदेश में बीपीएल के 6478456 कार्डों पर प्रदेश के 24991390 लोग लाभान्वित हो रहे हैं, अंत्योदय के 4081521 कार्डों पर 16224079 लोग जबकि एपीएल के 27545259 कार्डों पर प्रदेश में 101995537 लोग राशन प्राप्त करते हैं। कुल मिलाकर 38105236 कार्डों पर प्रदेश के 143211006 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। 

लखनऊ में इंटौजा क्षेत्र की भारतीय किसान यूनियन से जुड़ी बबली गौतम बताती है, “प्रधान और कोटेदार की मिलीभगत है, लाभार्थियों की सूची लगाई नहीं गई है, किसी को पता नहीं चलता किसके पास कौन सा कार्ड है। अब देखो असनहा के कोटेदार परशुराम की पत्नी के नाम बीपीएल कार्ड है, वो हर महीने 35 किलो आनाज उठाती है। इस गांव में कई ऐसे लोगों के पास गरीबों वाला कार्ड हैं जिनके घर में एक न एक सरकारी नौकर है।” कुछ दिनों पहले तक राशनकार्ड पर सिर्फ चीनी और मिट्टी का तेल मिलता था, लेकिन जब दो रुपए किलो वाले गेहूं और तीन रुपए में चावल मिलना शुरू हुआ है, कार्ड बनवाने वालों की संख्या और विवाद बढ़ गए है।

लखनऊ में ग्राम पंचायत महोना के काजी टोला के रहने वाले रामप्रभारी (66 वर्ष) बताते हैं, “हमरे पास न खेती है न ही कोई रोजगार। पहले मजदूरी करते थे लेकिन अब शरीर साथ नहीं देता। कमाई का जरिया है। चार महीने से कार्ड बनवाने के लिए दौड़ रहे हैं, कोटेदार के पास जाते हैं तो गालीदेकर भगा देता है। आज (मंगलवार) डीएम साहब से शिकायत करी है।”

राशनकार्ड बनवाने और राशन में वितरण में हो रही धांधली से सरकार भी वाकिफ है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 30 जून तक हर जिले में अभियान चलाकर अंत्योदय, पात्र ग्रहस्थी कार्ड धारकों की सूची का सत्यापन का कार्य प्राथमिकता से सुनिश्चित कराकर अपात्र व्यक्तियों का नाम काटकर पात्र लाभार्थियों के नाम जोड़ने का निर्देश दिया है। इसके लिए उपजिलाधिकारी एवं खण्ड विकास अधिकारियों की टीमें बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने तहीसलदारों को निर्देश दिए हैं कि 31 मई को कोटेदारों की बैठक बुलाकर उन्हें नियम और समझा दिया जाए कि पात्र लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरण में कोई अनियमिता पर भ्रष्ट कोटेदार पर हर हार में कार्रवाई हो।

पलका के पंचायत सचिव बलराम बाजपेई बताते हैं, “ये सब प्रधानों के विरोधी लोग कर रहे हैं। खाद्ययन विभाग ने जो राशन वितरित किया है वो पूरानी सूची के आधार पर किया है, इसलिए आधे लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। राशन सिर्फ आधे लोगों का आया है, जिनका आया है उनको दे दिया गया है। जो लोग बचे है उनकी सूची तैयार कर ली है और तहसील पर भेज दी गई है।”

Tags:    India 
Share it
Top