फिर खुशबू बिखेर रहा है काला नमक धान

फिर खुशबू बिखेर रहा है काला नमक धानखेत में काला नमक धान की फसल के साथ किसान। फोटो: वीरेन्द्र उपाध्याय

वीरेन्द्र उपाध्याय/अशोक श्रीवास्तव- कम्युनिटी जर्नलिस्ट

सिद्धार्थनगर। कभी जिले की पहचान रही काला नमक धान की खेती पिछले कुछ वर्षों में नाममात्र की रह गयी थी, लेकिन संस्था शोहरतगढ़ इनवायरमेन्टल सोसाइटी (एसईएस) के प्रयासों से जिले के किसान फिर काला नमक की खेती की ओर आकर्षित हुए हैं।

अंग्रेजी शासनकाल में जिले में काला नमक के प्रोत्साहन के लिए किसानों के हित में कई कदम उठाए गए थे। बाद में शासन प्रशासन द्वारा ध्यान ना दिए जाने पर अच्छे बीजों की कमी व महक गायब होने के कारण किसानों ने मजबूरी में काला नमक से किनारा कर लिया था। अब काला नमक की विशेषताओं को देखते हुए वर्ष 2011 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सहयोग से एसईएस ने शोहरतगढ़ व बर्डपुर में कालानमक को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया।

शोहरतगढ़ ब्लॉक के जयपुर गाँव के किसान भगौती प्रसाद बताते हैं, ‘हम लोग बहुत पहले से काला नमक की खेती कर थे लेकिन बहुत घाटा हो रहा था। अब हमने फिर से शुरुआत की है, अच्छी फसल भी आयी है। इस बार अच्छा फायदा होने की उम्मीद है।’

खेतों में लगाया 250 किसानों ने काला नमक धान

इस बार शोहरतगढ़ व बर्डपुर ब्लॉक के 250 किसानों ने काला नमक धान की किस्म लगाई है, संस्था किसानों को बाजार भी उपलब्ध कराएगी। गैर सरकारी संस्था शोहरतगढ़ इनवायरमेन्टल सोसाइटी ने किसानों को सबसे पहले जैविक विधि से काला नमक की खेती का प्रशिक्षण किसानों को दिया गया। किसानों द्वारा प्रचलित गलत विधियों को रोका गया फिर अच्छे बीज की उपलब्धता, नर्सरी डालने के समय व रासायनिक खादों का प्रयोग रोककर काला नमक का उत्पादन बढ़ाया गया और खुशबू भी लौटाई गयी। प्रयास सफल होने के बाद एसईएस ने डास्प के साथ काला नमक का पेटेंट भी कराया।

काला नमक की खेती के तरीकों में बदलाव का प्रयास

एसईएस के सचिव डॉ. बीसी श्रीवास्तव बताते हैं, ‘काला नमक की एक एकड़ खेती में 13,000 रुपए का खर्च आता है और धान की बिक्री पर 16,700 रुपए व चावल की बिक्री पर 26,000 रुपए प्रति एकड़ का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। काला नमक की पौष्टिकता को देखते हुए भारत सरकार व प्रदेश सरकार भी काला नमक को बढ़ावा देने का कार्यक्रम चला रही है।’

डॉ. श्रीवास्तव आगे कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए काला नमक की खेती के तरीकों में बदलाव के लिए और प्रयास की आवश्यकता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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