शुगर फ्री सिंघाड़े खाने हों तो यहां आइए

शुगर फ्री सिंघाड़े खाने हों तो यहां आइएसिंघाड़े बेचने जाता एक किसान। फोटो: सतीश कश्यप

रिपोर्टर- सतीश कश्यप

बाराबंकी। जिले की तहसील हैदरगढ़ के ब्लॉक त्रिवेदीगंज का ये वही शिवनाम गाँव है जहां कहार बिरादरी के सैकड़ों परिवार अपनी पुश्तैनी खेती सिंघाड़े पर निर्भर रहते हैं। इस बार इस गाँव में शुगर फ्री सिंघाड़े की खेती पिछले वर्ष से ज्यादा हुई है।

यूं तो इस गाँव में कई प्रकार के सिंघाड़े उपजाए जाते हैं जो विभिन्न रंग में होते हैं। मगर इस गाँव की सबसे बड़ी खूबी मानी जाती है शुगर फ्री सिंघाड़े की खेती। ये देखने में भी काफी खूबसूरत होते हैं। यहां के छेदा के परिवार के चंद्रपाल व इंद्रपाल के अलावा श्रीपाल भी करीबन पांच-पांच बीघे में सिंघाड़े लगा रखे है। श्रीपाल कहते हैं, “इस बार उन्होंने पिछले वर्ष मीठे शुगर फ्री सिंघाड़े की बढ़ती मांग को देखते हुए ज्यादा सिंघाड़े लगा रखे हैं।” गाँव के नन्हे लाल और सन्नू बताते हैं, “सालभर इंतजार के बाद ये खेती नवम्बर महीने में ठीक-ठाक चालू हो जाती है लेकिन सबसे ज्यादा मेहनत तब होती है जब ठिठुरती ठंड के पानी में सुबह-सुबह सिंघाड़े तोड़ना मुश्किल हो जाता है।”

खास सिंघाड़े का इस्तेमाल व्रत में लोग ज्यादा करते हैं। सूखने के बाद सिंघाड़े से आटा तैयार किया जाता है और इस आटे से तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। यहां के लोग साइकिल से सुबह-सुबह सिंघाड़े लेकर गाँव और आसपास के कस्बों में बेचने के लिए निकल जाते हैं।

गाँव के 80 वर्षीय बुजुर्ग छेदा बताते हैं, “भइया हमारा जीवन इसी पुश्तैनी खेती में गुजर गया है।” वो आगे बताते हैं, “अब यह खेती काफी महंगी हो गयी है क्योंकि इसमें तरह-तरह के रोग लग जाते हैं पौधों को। ऐसे में फसल पर काफी बुरा प्रभाव पड़ जाता है। सरकारी विभाग से भी इस फसल को समर्थन देने के लिए कोई खास योजना नहीं है।” वो बताते हैं, “जो दवाइयां सूखे खेत में फसलों में डाली जाती है वही दवा पानी में इतनी फायदेमंद नहीं रहती है। दवाओं की महंगाई भी इस खेती पर असर डाल रही है।”

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