उधार तो दूर, नगद भी नहीं मिल रही खाद

उधार तो दूर, नगद भी नहीं मिल रही खादफतेहपुर की साधन सहकारी समिति में लटका पड़ा है ताला।

रिपोर्ट: अश्वनी कुमार निगम/अरुण मिश्रा

लखनऊ/बाराबंकी/गोरखपुर। नोटबंदी के कारण रबी की बुवाई में खाद के लिए किसानों को परेशानी न हो, इसको लेकर 23 नवंबर, बुधवार को केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला किया था। इसके तहत साधन सहकारी समितियों, किसान केंद्रों और खाद-बीज उपलब्ध कराने वाली सभी सरकारी और सहकारी समितियों को किसानों को उधार में खाद उपलब्ध कराने और खाद खरीदने के लिए किसानों को 500 के पुराने नोट स्वीकार करने का आदेश दिया था। लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी किसानों को उधार तो दूर नगद में भी इन केंद्रों के जरिए खाद नहीं मिल रही है। जिससे किसान खाद के लिए भटक रहे हैं।

खाद ही उपलब्ध नहीं है

किसान राम शंकर तिवारी।

उत्तर प्रदेश के अधिकतर साधन सहकारी समितियों का हाल तो यह है कि वहां पर खाद ही उपलब्ध नहीं है, जिससे वहां पर ताला लटक रहा है। किसानों की इस समस्या का फायदा निजी खाद विक्रेता उठा रहे हैं और 700 रुपए की दाम वाली खाद को एक हजार में बेच रहे हैं। बाराबंकी जिले के पण्डितपुरवा के किसान रामशंकर तिवारी ने बताया कि सहकारी समिति रजौली पर खाद उपलब्ध न होने के कारण प्राइवेट में खाद लेना पड़ा है। इस समय पैसे की भी दिक्कत थी तो सोचा था कि समिति से खाद उधार में मिल जाएगी, लेकिन समिति पर खाद न होने के कारण लोगों से पैसा उधार ले कर खाद लेनी पड़ी है।

प्रदेश के अधिकतर जिलों में ऐसा ही हाल

यहा हाल सिर्फ यहीं का नहीं है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में भी यही हाल है। शनिवार को बुलंदशहर जिले जीटी रोड स्थित कृभकों किसान केन्द्र पर किसान सतबीर, धनबीर और पप्पू 500 की पुरानी नोट लेकर खाद खरीदने पहुंचे तो संचालक ने नोट लेने से इंकार कर दिया। जिसको लेकर किसानों की संचालक से बहस भी हुई। इस बारे में जब सेंटर प्रभारी सतवीर सिंह से बात हुई तो उसने बताया कि पुराने नोट बैंक में जमा नहीं हो रहे हैं। ऐसे में हम नए नोट से ही खाद और बीज दे रहे हैं।

पुराने नोट के बिक्री का नहीं मिला आदेश

शुक्रवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मवाना के कृषक सेवा सहकारी समिति लिमिटेड में आसपास के गावों के किसान पुराने नोट लेकर खाद खरीदने पहुंचे तो उन्हें खाद नहीं दी गई। इस बारे में जब यहां के सचिव मदन त्यागी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग से उन्हें पुराने नोट लेने का आदेश अभी तक नहीं मिला है। जिसके कारण वह लोग चेक या नए नोट से ही खाद की बिक्री कर रहे हैं। सरकार के फैसले के बाद भी किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

सिर्फ खाद का इंतजाम करना बाकी था

महराजगंज जिले के गांव गांगी के किसान मनोज कुमार ने बताया कि धान की कटाई के बाद गेहूं बुवाई की पूरी तैयारी थी। सिर्फ खाद का इंतजाम करना बाकी था। इसी बीच सरकार ने 500 और एक हजार की नोटबंदी करके हम किसानों को परेशानी में डाल दिया। पुराने नोट कोई ले नहीं रहा है। खाद और बीज उपलब्ध कराने वाली साधन सहकारी समितियों में पहले से ही खाद समाप्त हो चुकी है। नया स्टाक कब आएगा यह काई बता नहीं रहा। इसी गांव के महेन्द्र नाथ का कहना कि नोटबंदी से उधार में सामान भी मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में बिना खाद और बीज के हम किसान कैसे इस बार गेहूं बाएंगे।

बाराबंकी में खाद के लिए किसान हो रहे परेशान

साधन सहकारी समितियों पर खाद न उपलब्ध होने के कारण किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साधन सहकारी समिति पवैय्याबाद पर अभी तक एक बार भी खाद नही पहूंची, जिससे इस समिति के खाता धारकों को प्राइवेट में खाद लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सहकारी समिति फतेहपुर खत्तिभार के सचिव रमेश वर्मा ने बताया कि समिति पर इस समय खाद समाप्त हो गई है। इस समय समिति पर केवल यूरिया ही बची है, जल्द उर्वरक मंगवा कर किसानों को वितरित की जायेगी।

न नकद और न उधार

किसान चंद्रमोहन।

किसान सेवा केंद्र विशुनपुर के सचिव मेडिकल लीव पर होने के कारण अभी तक केंद्र का ताला ही नही खुला है। यहाँ धान की खरीद भी नही शुरू हो सकी है। कोढ़वा के किसान सरदार सिंह ने बताया कि समितियों पर नगद व उधार किसी भी प्रकार से खाद नही मिल पा रही है, जिससे किसानों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। भड़रिया के किसान चंद्रमोहन ने बताया कि इस समय बुवाई का समय चल रहा है। नोटबंदी के कारण किसानों के पास पैसा नहीं है और समितिया किसानों को उधार खाद नहीं दे रही हैं। ऐसे में किसानों को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है।

किसान सरदार सिंह।

गोरखपुर में खाद के लिए भटक रहे किसान

गोरखपुर जिले के बांसगांव, खजनी, सहजनवां और गोला तहसील के गावों में खाद नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। इस जिले में सरकारी स्तर पर किसानों को बीज और खाद न्याय पंचायत में स्थित साधन सहकारी समितियों के माध्यम से मिलता था, लेकिन साधन सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध ही नहीं है। साधन सहकारी समिति भैंसाजाबाजार में खाद पिछले कई दिनों खाद के लिए आ रहे भटियारी गांव के किसान रामसुंदर यादव का कहना है कि हर साल वह यहीं से खाद लते हैं, लेकिन इस बार नोटबंदी के बाद से न तो खाद मिल रही है और न ही पुराने नोट यहां पर लिए जा रहे हैं।


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