बारिश का सही आंकड़ा बताने के लिये आगे आये किसान 

बारिश का सही आंकड़ा बताने के लिये आगे आये किसान किसानों की मदद से बारिश का सही आंकड़ा मिल रहा है।

दिवेन्द्र सिंह, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

फैज़ाबाद। प्रदेश के हर हिस्से में अलग-अलग बारिश होती है, इसका आंकड़ा रखने में मौसम विभाग को परेशानी होती थी, ऐसे में किसानों की मदद से बारिश का सही आंकड़ा मिल रहा है। यहां से वर्षा की रिपोर्ट मिलने के बाद उस क्षेत्र की औसत वर्षा की जानकारी विभाग को मिल जाती है।

नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग ने फैजाबाद जिले के अलग-अलग ब्लॉक में अपने वर्षामापी यंत्र लगाए हैं। इनकी मदद से जिले में बारिश का सही आंकड़ा मिल जाता है। फैजाबाद जिले से लगभग 37 किमी दक्षिण में सोहआवल ब्लॉक के बहराएं गाँव के किसान राकेश दूबे के यहां नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय की सहायता से वर्षामापी यंत्र लगाया गया है। राकेश दूबे हर साल के अंत में विश्वविद्यालय को उनके क्षेत्र में कितनी बारिश हुई उसका आंकड़ा भेजते हैं। राकेश दूबे बताते हैं, “मैं हर दिन का रिकार्ड एक रजिस्टर में नोट करता रहता हूं और आखिर में उसे विश्वविद्यालय में भेज देता हूं।”

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राकेश दूबे के साथ ही अमानीगंज ब्लॉक के बांसगाँव के किसान उमानाथ शुक्ला के यहां भी वर्षामापी यंत्र लगाया गया है। अभी देश में 130 और प्रदेश में महज सात कृषि मौसम परामर्श सेवा केन्द्र हैं। प्रदेश में मेरठ, कानपुर, झांसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, बहराइच और वाराणसी में कृषि मौसम परामर्श केन्द्र हैं। जहां से किसानों को मौसम सम्बन्धित जानकारी दी जाती है। राकेश दूबे आगे बताते हैं, ‘’अभी तक गाँव में लोग वर्षामापी यंत्र के बारे में नहीं जानते थे।

फैजाबाद के गाँव में लगा वर्षामापी यंत्र एक अच्छा प्रयास है, जिससे हमें हर क्षेत्र के सही आंकड़े मिल जाते हैं, जिससे हर साल इन्हीं आंकड़ों से क्षेत्र को सूखा या फिर बाढ़ग्रस्त घोषित कर दिया जाता है।
जेपी गुप्ता, निदेशक, लखनऊ मौसम विभाग

वर्षों के औसत वर्षा रिकार्ड और प्रतिदिन होने वाली वर्षा रिकार्ड सिर्फ अखबारों या टीवी चैनलों में सुनते थे और देखते थे। अब हमें तुरंत जानकारी मिल जाती है।” नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्रा बताते हैं, ‘’पहले विश्वविद्यालय में लगे मौसम मापी यंत्र से ही वर्षा के आंकड़े मिलते थे और सही आंकड़े भी नहीं मिल पाते, इसलिए जिले के कई ब्लॉक के किसानों के यहां वर्षा मापी यंत्र लगाया गया है।” किसान हर दिन बारिश का रिकार्ड रजिस्ट्रर में नोट करते हैं, यही रिकार्ड हम भारतीय मौसम विभाग को भी भेजते हैं।”

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