आम के बौर देख किसानों के खिले चेहरे 

आम के बौर देख किसानों के खिले चेहरे इस बार आम के पेड़ में अच्छे बौर आए हैं।

सुरेन्द्र कुमार, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

मलिहाबाद-लखनऊ। इस बार आम के पेड़ में अच्छे बौर आए हैं। किसानों को आशा है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो इस बार आम की भरपूर उपज होगी। साथ ही आम का उचित मूल्य भी मिलेगा। सरकारी स्तर पर भी गुणवत्तायुक्त आम को विदेशों में निर्यात करने के लिए कदम उठाये जाने की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। हालांकि कई प्रकार के कीटों व रोगों का प्रकोप भी आम की फसल दिखने लगा है। जिसकी रोकथाम के लिए किसान कीटनाशक दवाओं व रसायनों का छिड़काव अपने बागों में कर रहे हैं।

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आम फलपट्टी क्षेत्र काकोरी, मलिहाबाद व माल सहित बीकेटी के कुछ भाग को मिलाकर बना है। यहां 70 फीसदी भू-भाग पर आम के बाग लहलहा रहे हैं। इसी फसल से यहां के किसान अपनी वार्षिक खर्च की कार्ययोजना बनाते हैं। क्योंकि यहां के किसानों का एक मात्र मुख्य व्यवसाय आम ही है। पिछले वर्ष मौसम विपरीत होने से बढ़े रोगों व कीटों के कारण फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था, जिससे उत्पादन क्षमता में गिरावट आयी थी।

मैंगो पैक हाउस के माध्यम से विदेशों में होने वाले आम के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में सरकार द्वारा अगर ठोस प्रयास किये गये तो आम उत्पादकों व व्यापारियों को अच्छा लाभ मिलेगा। इसी के साथ सरकार को फसल बीमा योजना की तरह आम फसल बीमा योजना को भी लागू किया जाना चाहिए।
पिन्नू यादव व फहीम उल्ला खां, आम उत्पादक

वर्तमान समय मे पाउण्ड्री मिलड्यू, खर्रा रोग व मैंगो हापर कीट का प्रकोप फसल पर बढ़ता दिखाई पड़ रहा है। जिसकी रोकथाम के लिए औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र के मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ. अतुल कुमार सिंह ने आम उत्पादकों को इसकी रोकथाम के उपाय बताये हैं। वह बताते हैं, “पाउण्ड्री मिलडयू (खर्रा रोग) के बचाव के लिए 200 ग्राम सल्फर 100 लीटर पानी में घोलकर मैंगो हापर को नष्ट करने के लिए इसी घोल में 30 एमएल इमिडाक्लोरोपिड मिलाकर छिड़काव आम के पेड़ों पर करना लाभदायक है। इस छिड़काव के 20 दिन बाद दूसरा छिड़काव सल्फर पाउण्डर के स्थान पर कैराथिन दवा 100 एमएल मिलाकर छिड़कना चाहिए। इस बात का ध्यान रखा जाये कि खिले हुए बौर पर कीटनाशकों का छिड़काव न करें। सरसों या मटर के दाने के बराबर जब फल आ जाएं उस समय छिड़काव करना लाभप्रद होगा।”

कई वर्षों बाद आम फसल के लिए यह मौसम अनुकूल दिखाई पड़ रहा है। बौर पर ही कई करोड़ रुपयों की आम फसल की बिक्री हो चुकी है। शेष बचे बागों की बिक्री का सिलसिला मार्च के अन्तिम सप्ताह तक जारी रहेगा।
पद्मश्री हाजी कलीम उल्ला खां, आम किसान

बम्पर फसल देख आम के बागों की बिक्री काफी जोरों पर है। फसल खरीद-फरोख्त के जारी सिलसिले मे अब तक लगभग 70 फीसदी बागों की बिक्री हो चुकी है। फलपट्टी क्षेत्र में 36 हजार हेक्टेयर भू-भाग पर आम के बाग हैं। जिसमें दशहरी, लखनऊ सफेदा, चौसा आमों के अतिरिक्त अनेक प्रकार की रंगीन प्रजातियों के बाग शामिल हैं। आम किसान पद्मश्री हाजी कलीम उल्ला खां का कहना है, “कई वर्षों बाद आम फसल के लिए यह मौसम अनुकूल दिखाई पड़ रहा है। बौर पर ही कई करोड़ रुपयों की आम फसल की बिक्री हो चुकी है। शेष बचे बागों की बिक्री का सिलसिला मार्च के अन्तिम सप्ताह तक जारी रहेगा।”

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