अब किसानों काे ज़्यादा भा रही केले की खेती

अब किसानों काे ज़्यादा भा रही केले की खेतीकेले की खेती।

मसूद तैमूरी/नफीस अंसारी

इकदिल/इटावा। आलू की कीमतों में लगातार आ रही अस्थिरता का ही परिणाम है कि अब किसानों का आलू की फसल के प्रति रुझान कम होता जा रहा है। जनपदीय मुख्यालय पर डॉ. विकास द्वारा आरंभित की गई केला की फसल के प्रति किसानों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि इकदिल क्षेत्र के नगला तार में एक किसान ने आलू की फसल को छोड़कर अब अपनी तीन बीघा के खेत में केले की फसल का उत्पादन शुरू किया है। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं। इस किसान को केला की खेती में एक लाख प्रति बीघा का लाभ हासिल हो रहा है।

इसी क्षेत्र के किसान कमलेश चंद्र राजपूत आलू की खेती करते थे, लेकिन आलू के उत्पादन के मूल्य का कोई भरोसा न होने के कारण उन्होंने इससे किनारा कर लिया। अब उन्होंने अपने तीन बीघा के खेत में 750 केले के पौधे लगाए और आज वह लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। कमलेश बताते हैं कि केले की फसल 14 महीने में तैयार हो जाती है। इस फसल की लागत तकरीबन दस हजार रुपए प्रति बीघा आती है। हाइब्रिड किस्म के इस केले की पौध वह बाराबांकी से लेकर आए थे। प्रति पौध के मध्य दो मीटर का अंतराल छोड़ा जाता है तो इसके परिणाम सकारात्मक आते हैं। पौध तैयार होने पर प्रति पेड़ पर केले के गुच्छों का उत्पादन होता है जिसका वजन तकरीबन 25 किग्रा होता है। यह स्थानीय बाजार में ही 12 से 15 रुपए प्रति किग्रा बिक जाता है। कमलेश बताते हैं कि उनकी प्रति बीघा केले की फसल लगभग 80 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक में बिक जाती है। यदि यही फसल वह महानगरों में बेचें तो इसकी कीमत में और अधिक इजाफा हो सकता है।

केले के गुच्छे को दिखाता किसान कमलेश चंद्र राजपूत। फोटो: असलम अंसारी

दांतों के डॉक्टर ने शुरू की खेती

बता दें कि जनपद में सबसे पहले सैफई स्थित मिनी पीजीआई में तैनात डेंटल चिकित्सक डॉ. विकास ने अपने रिश्तेदारों से ली गई जमीन पर आईटीआई के समीप कुछ जमीन पर केले की फसल तैयार की थी। उनके द्वारा शुरू की गई केले की खेती को अब अन्य किसान भी अपनाने लगे हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जनपद में केला उत्पादन के लिए आवश्यक मिट्टी व नमी है। ऐसे में किसान केले की खेती का उत्पादन कर खुशहाली हासिल कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केले की तमाम प्रजातियां हैं जो अलग-अलग वातावरण के अनुकूल होती हैं। आलू की अपेक्षाकृत केले की फसल में किसानों को लाभ की संभावनाएं अधिक रहती हैं।

14 माह की फसल में प्रति बीघा एक लाख तक मुनाफा मिलता है

750 केले के पौधे कमलेश ने अपने तीन बीघा के खेत में लगाये हैं

इस वजह से आलू की खेती जुए की तरह

कमलेश के मुताबिक इससे पहले वह आलू की खेती करते थे लेकिन आलू की खेती एक जुआ की मानिंद थी। आलू की फसल की लागत अनुमानित छह से सात हजार रुपये प्रति बीघा हुआ करती थी, परंतु उसके मूल्य की कोई गारंटी नहीं हुआ करती थी। यहां तक कि यदा-कदा आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने के बाद उसका शुल्क अदा करने के बाद भी फेंकने को मजबूर होना पड़ता था जबकि केला की फसल में उत्पादन लागत के बाद भी लाभ मिलना तय है। इसकी देखभाल के प्रति सजग अवश्य ही रहना पड़ता है, मगर इसमें मुनाफा की गारंटी है।

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