एक किसान ने बिना किसी संसाधन के 4 महीने में बंजर ज़मीन बनाया उपजाऊ

एक किसान ने बिना किसी संसाधन के 4 महीने में बंजर ज़मीन बनाया उपजाऊजमीन को चार ही महीनों में सिपाही लाल ने अपनी मेहनत से उपजाऊ बना दिया।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर देहात। जिस जमीन को ऊसर समझकर लोग नज़रअंदाज कर रहे थे, उसी जमीन को चार ही महीनों में सिपाही लाल ने अपनी मेहनत से उपजाऊ बना दिया।

जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ब्लॉक रसूलाबाद के अंगदपुर बहेलिया गाँव के सिपाही लाल (45 वर्ष) बताते हैं, "पिछले 23 साल से मैं दिल्ली में रह रहा था। पिछले साल ही घर आया। गाँव में खेती करना ही मुख्य साधन था, पर मेरे पास पर्याप्त जमीन नहीं थी।" वो आगे बताते हैं "कई दिन खेत के पास जाकर घंटों सोचता रहता कि इस ऊसर खेत को कैसे ठीक करूं। एक ऊसर सुधार समिति की मीटिंग में बैठने का मौका मिला और तब मैंने ये संकल्प लिया कि जल्द ही मैं अपने खेत को उपजाऊ बना दूंगा।"

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ऊसर को उपजाऊ बनाने के बारे में वो बताते हैं, "हमने ऊसर जमीन पर फावड़े के सहारे रात दिन खुदाई करना शुरू किया खुदाई के बाद खेतों में पानी भरकर लंबे समय तक गीला रखा, साथ में गाँव के घरों से निकलने वाले खर पतवार और फसलों से निकलने वाले खरपतवार को इसी जमीन में डालकर महीनों सड़ाया साथ में गाँव में जहां भी गोबर मिलता वो उठा कर खेत में डाल देता।"

सिपाही लाल बताते हैं "ऊसर को उपजाऊ बनाने के लिए पूरे साल खेत में गोबर डालना, खेत में पानी भरना उसे बाहर निकालना और फिर भरना, खेत की लगातार जुताई, खेत को समतल करना, पुआल और खर-पतवार डालकर पानी भरकर पाट देना, ये प्रक्रिया एक साल अपनाकर किसान अपने ऊसर खेत को पूरी तरह से ठीक कर सकते हैं। ऊसर जमीन को ठीक करने का ये परम्परागत तरीका है, जिसमें 15 हजार रुपए खर्चा आ जाता है। पहली फसल में ही ये पैसा वसूल हो जाता है।"

यहां के अब दूसरे किसान भी सिपाही लाल से सलाह लेते हैं। किसान जसमेर कहते हैं, "जिस समय सिपाही लाल ने खेती की शुरुआत की तो लोग उन्हें पागल कहने लगे थे, लेकिन जब इनकी यह कड़ी तपस्या फसलों के रूप में आज सभी के सामने है तब से लोगों का मुंह बंद हो गया। अब इलाके के 46 और भी किसान अपनी खेती को उपजाऊ बना रहे हैं।"

289 किसानों ने ऊसर जमीन को उपजाऊ बनाया

गैर सरकारी संस्था श्रमिक भारती किसानों की मदद करता है। श्रमिक भारती के ऊसर सुधार समिति प्रशिक्षक रविन्द्र कुमार बताते हैं, "रसूलाबाद ब्लॉक में 300 किसानों को चिन्हित किया गया था, जिनके खेत ऊसर थे। लगातार प्रशिक्षण देने के बाद यहां के 289 किसानों ने परम्परागत ढंग से अपनी खेती को ऊसर से उपजाऊ बना दिया है, जिसमें सिपाही लाल एक हैं। इस ब्लॉक की इस समय 200 बीघा जमीन ऊसर से उपजाऊ बन गई है। यहां के किसान लगातार प्रयासरत हैं और अपने ऊसर खेतों को उपजाऊ बनाने में लगे हैं।"

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