चार वर्षों में सरकार का दलहन उत्पादन 2.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य  

चार वर्षों में सरकार का दलहन उत्पादन 2.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य  कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह।

नई दिल्ली (भाषा)। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार वष 2020-21 तक संकर और अधिक उपज देने वाली बीज के किस्मों के इस्तेमाल के जरिए दलहन उत्पादन करीब 50 प्रतिशत बढ़ाकर 2.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य कर रही है।

मंत्री ने सूचित किया कि भारत ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 69,717 करोड़ रुपए के खाद्य तेलों और 18,000 करोड़ रुपए के दलहनों का आयात किया था। अपने मंत्रालय से संबंधित संसदीय परामर्श समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि सरकार दलहनों और तिलहनों की उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर दे रही है। फसल कटाई बाद के उसे होने वाले नुकसान से बचने के लिए उन्होंने दलहनों और तिलहनों की कटाई में अधिक मशीनीकरण किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एक सरकारी बयान में कहा गया है, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) की केंद्र प्रायोजित योजना के तहत एक व्यापक योजना के साथ वर्ष 2016-17 में दो करोड़ टन, वर्ष 2017-18 में 2.1 करोड़ टन, वर्ष 2020-21 में 2.4 करोड़ टन दलहन उत्पादन करने का लक्ष्य है। वर्ष 2015-16 में उत्पादन एक करोड़ 64.7 लाख टन था। सिंह ने कहा कि दलहनों की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि मंत्रालय उत्पादकता बढ़ाने और रकबा विस्तार के जरिए उत्पादन बढ़ाने की दो आयामी नीति पर मिलकर काम कर रही है।

तिलहन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि खाद्य तेल की खपत की वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत बढी है जबकि तिलहन का वार्षिक उत्पादन करीब 2.2 प्रतिशत ही बढ़ा है। उन्होंने कहा, भारत को अपनी आवश्यकता के 50 प्रतिशत भाग खाद्य तेलों का आयात करता है, पिछले वर्ष घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 69,717 करोड़ रुपए के खाद्य तेलों का आयात किया गया। देश में वर्ष 2020 और वर्ष 2025 तक वनस्पति तेल की खपत को पूरा करने के लिए यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2020 और वर्ष 2025 तक क्रमश: आठ करोड़ 68.4 लाख टन और नौ करोड़ 33.2 लाख टन तिलहन उत्पादन करने की आवश्यकता होगी।

वनस्पति तेल के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास के तहत उन्होंने कहा कि तिलहन के लिए उत्पादकता उन्नयन कार्यक्रम को आईसीएआर के प्रौद्योगिकी समर्थन के अलावा अभियान के स्तर पर संस्थागत और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता होगी।




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