इंजीनियरिंग छोड़कर शुरू की नर्सरी
गाँव कनेक्शन 13 Nov 2016 6:44 PM GMT

रिपोर्टर- बसंत कुमार
लखनऊ। शबीहुल हसन और वाज़ीहुल हसन दोनों भाई देश की दो बड़ी कम्पनियों में अच्छी सैलरी में बतौर इंजीनियर काम कर रहे थे लेकिन अपने पिता की मौत के बाद दोनों ने नौकरी छोड़ अपना पुश्तैनी काम ‘नर्सरी’ का काम करना शुरू किया। तब नौकरी छोड़ना तो मुश्किल भरा कदम था लेकिन आज दोनों भाई नर्सरी से ही करोड़ो रुपए कमा रहे हैं।
लखनऊ से मलिहाबाद जाते वक़्त रास्ते में पड़ने वाले मुजासा में सड़क की दोनों तरफ कई नर्सरी हैं। यहां पर ज्यादातर लोगों की ज़िन्दगी नर्सरी के कारोबार से ही चलती है। इन नर्सरी के बीच स्थित नफीस नर्सरी उत्तर भारत की एकलौती नर्सरी है जो विदेशों में भी पेड़ बेचती है। नफीस नर्सरी के मालिक है। इसके मालिक शबीहुल हसन और वाज़ीहुल हसन हैं।
कठिन फैसला था इंजीनियरिंग छोड़ना
सहारा एयरलाइंस में इंजीनियर के रूप में काम कर चुके शबीहुल हसन बताते हैं कि मेरे यहां नर्सरी पुश्तैनी काम है। मेरे दादा जी के दादा ने 1930 में नर्सरी का काम शुरू किया था। इसी काम को मेरे दादा ने भी किया और मेरे पिता ने भी।
2004 में पिताजी के इंतकाल के बाद हम दोनों भाइयों ने फैसला लिया कि अपने पुश्तैनी काम को ही आगे बढ़ाना चाहिए। उस समय यह फैसला लेना तो बिलकुल मुश्किल था। मैं सहारा एयरलाइंस में था और मेरा छोटा भाई टाटा कम्पनी में इंजीनियर था। लेकिन हमने काफी सोच समझकर फैसला लिया, जिसका आज हमें काफी फायदा हो रहा है।
अब बेल पर भी लगेंगे आम
आमों के लिए मशहूर मलिहाबाद में स्थित नफीस नर्सरी में आमों के 175 प्रकार हैं। वाज़ीहुल हसन बताते हैं, “हमारे यहां सबसे ज़्यादा आमों के प्रकार है। इसके लिए दिल्ली के अशोक होटल में आयोजित ‘आमों के प्रकार’ प्रतियोगिता ने पिछले साल हम विजेता बने थे। हमारे पास आम का एक ऐसा पेड़ है जिसपर सभी 175 प्रकार के आम लगते हैं।” वाज़ीहुल हसन बताते हैं कि अभी तक आपने पेड़ों पर आमों को फलते देखा होगा लेकिन हम एक नया पौधा तैयार कर रहे हैं जिसमें बेल पर आम लगेंगे। वाज़ीहुल हसन बताते हैं कि हमारे यहां सिर्फ आम नहीं अमरुद, नीबू और फूलों के भी अनेक प्रकार हैं। हमारे यहां आठ तरह के अमरुद हैं। हम एयर ग्राफ्टिंग के जरिए नए पौधे बनाते हैं।
दस से ज्यादा देशों में भेजे जाते हैं पेड़
शबीहुल हसन बताते हैं कि उत्तर भारत में सिर्फ नफीस नर्सरी ही एकलौता नर्सरी ही है जो विदेशों में पेड़ भेजता है। हम तंजानिया, लेबनान, साउथ अफ्रीका, दुबई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, सोमालिया और अमेरिका में पौधा भेजते है। उत्तर भारत ने एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलोपमेन्ट ऑर्थोरिटी (एपीडा ) मेम्बरशिप सिर्फ हमारे पास है। विदेशों में अपना सामान भेजने के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस के साथ-साथ एपीडा का मेम्बरशिप लेना जरूरी होता है।
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