सूखे में खर्चा बढ़ा, धान की पैदावार अच्छी

सूखे में खर्चा बढ़ा, धान की पैदावार अच्छी

गोरखपुर। जहां एक तरफ सूखे से किसानों की फसल बर्बाद हो गई है, वो अपनी खड़ी फसलें जुतवा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और सही रणनीति से सूखे को मात दे दिया है। न सिर्फ अपनी धान की फसल को सूखे से बचा लिया है, बल्कि पैदावार भी अच्छी हुई है।

गोरखपुर जि़ला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दक्षिण पूर्व दिशा में खोराबार ब्लॉक के रायगंज गाँव के किसान चन्द्रभान ने ऐसे सूखे में भी धान में अच्छा उत्पादन करके लोगों को एक संदेश दिया है कि अगर किसान ठान ले तो सूखे में भी पैदावार अच्छी मिल सकती है।

चन्द्रभान (40 वर्ष ) कहते है, ''मैंने कम दिन व कम पानी से तैयार होने वाली फसल लगाई थी। जिसमें मैंने छह से सात बार पानी लगाया था रोपाई के बाद दो बार यूरिया 70 किलोग्राम और जिंक दस किलोग्राम डाली थी। खरपतवार तो हम लोग खुद ही निकाल लेते है। कीटनाशक का प्रयोग हमने केवल धान के फूल को मक्खियों व कीड़ों से बचाने के लिए किया था।" चन्द्रभान ने करीब डेड़ एकड़ में सोनम धान की फसल लगाई थी। जिसमें करीब 20 हजार रुपए का खर्चा आया है। 

वो बताते हैं, ''लेकिन पैदावार 29 कुन्तल के आस-पास है जो कि इस सूखे जैसी हालात में काफी अच्छा है। वैसे अगर मौसम अच्छा होता है तो एक एकड़ में करीब 25 कुन्तल तक की पैदावार हो जाती है और खर्चा भी कम लगता है।" कृभको गोरखपुर ने बताया कि इस बार सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1410 रुपए निर्धारित किया है।

इसके अलावा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर उत्तर दिशा स्थित जंगल कौडिय़ा ब्लाक के बढनी गाँव के किसान कमलेश (32 वर्ष) ने थोड़े में ही सही लेकिन धान की अच्छी फसल तैयार की है। कमलेश कहते है, ''हमने आधा एकड़ ही धान की फसल लगाई है। जो 100 से 110 दिन में तैयार होने वाली सोनाली किस्म की फसल लगाई है। इस सूखे में हमारे गाँव के जिन लोगों ने ज्यादा दिन वाली फसल बोई है उनकी पूरी फसल खराब हो गई है। मैंने छह से सात बार पानी चलाया है दो बार खाद डाली है, एक बार रोपाई करते समय और एक बार फसल लगने के बाद। कीटनाशक का छिड़काव भी केवल एक बार किया है।"

कमलेश आगे कहते है, ''अभी हमारा खेत कटा तो नही है लेकिन खेत में हमारी फसल अच्छी है तो पैदावार भी अच्छी ही होगी।"

कमज़ोर मानसून के बाद ज्यादा हो सकता है धान उत्पादन

देश के सबसे बड़े धान उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में कमजोर मॉनसून के बावजूद इस साल धान के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के वर्ष 2015-16 के लिए पूर्वोनुमान के मुताबिक 2015-16 में खरीफ  सीजन के दौरान राज्य में धान का उत्पादन 136.71 लाख टन तक पहुंच सकता है। राज्य में पिछले साल खरीफ  सीजन में 132.42 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था

उत्तर प्रदेश में हुई मॉनसून की सबसे कम बरसात

मौसम विभाग के मुताबिक 30 सितंबर को खत्म हुए मॉनसून सीजन के दौरान देशभर में सबसे कम बरसात उत्तर प्रदेश में हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य के मुकाबले करीब 45 फीसदी कम बरसात दर्ज की गई है। इन हालात में धान उत्पादन बढऩे के अनुमान से कुछ राहत जरूर मिल सकती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा धान उत्पादक राज्य है, लेकिन सरकारी स्टॉक में उत्तर प्रदेश अन्य प्रमुख धान उत्पादक राज्यों के मुकाबले कम योगदान देता है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के पहले पूर्वोनुमान के मुताबिक इस साल खरीफ सीजन के दौरान देशभर में धान के उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका जताई जा रही है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस साल देशभर में खरीफ  धान का उत्पादन पांच साल के निचले स्तर तक लुढ़क सकता है, उत्पादन 906.10 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है जबकि पिछले साल के खरीफ  सीजन देश में 908.60 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था।

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