खेती की ज़मीन लीज़ पर देने के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

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लखनऊ। बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने खेती की ज़मीन को लीज़ पर देने और लेने वाले लोगों का जीवन आसान करने के लिए एक नया अध्यादेश तैयार किया है। इसके लागू होने के बाद देश में खेती की ज़मीन बंटाईदारी या लीज़ पर देना कानूनन अपराध नहीं रहेगा। दावा है कि नए नियमों से ग्रामीण भारत में गरीबी मिटाने, उत्पादकता बढ़ाने और विकास दर को तेज़ करने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार की थिंक टैंक संस्था नीति आयोग ने कुछ समय पहले एक कमेटी गठित की थी। जिसका उद्देश्य खेतिहर भूमि को लीज़ पर देने से जुड़ी समस्याओं को समझने और सुलझाने के सुझाव देना था। कमेटी ने विभिन्न राज्यों की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए 'खेतिहर भूमि लीसिंग एक्ट 2016' तैयार कर हाल ही में सरकार को सौंपा है। राज्यों द्वारा इस एक्ट को अपनाते ही पुराने सारे नियम खत्म हो जाएंगे।

"देखिए नया एक्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे गांव का एक खेती जानने वाला किसान ज़मीन के आभाव में मजदूरी नहीं करेगा। अब बिना डर के जब भूस्वामि उसे खेत लीज़ पर देगा तो वो खेती करेगा और गौरव के साथ जिंदगी काटेगा," डॉ टी हक ने गाँव कनेक्शन को बताया। कृषि अर्थशास्त्री टी. हक़ की अध्यक्षा वाली कमेटी ने ही नीति आयोग के तहत नया एक्ट तैयार किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 14 करोड़ किसान हैं। पुराने नियमों के हिसाब से बंटाईदारों की गिनती किसानों में नहीं होती थी जिसके कारण उन्हें सरकारी योजनाओं से लेकर खेती की सामग्रियों पर मिलने वाली आर्थिक मदद भी नहीं मिल पाती थी। 

डॉ हक ने बताया कि ज़मीन बंटाई पर देने वाला और बंटाईदार के बीच कोई लिखित समझौता नहीं होता था। ऐसे में बंटाईदार फसल बीमा नहीं करवा पाते थे, न ही किसी आपदा में फसल गंवाने पर सरकारी राहत के हकदार होते थे। अब नए एक्ट के लागू होते ही बंटाईदार किसान भी इन सभी योजनाओं और सहायताओं में अपना हक पा सकेंगे, भूस्वामि उनका हक नहीं छीन पाएगा।

नए नियम के बाद अब कोई भू-मालिक भी दोतरफा कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करके एक नियत समय के लिए बिना किसी डर अपनी ज़मीन बंटाईदार या खेती के लिए लीज़ पर दे सकेगा। देश में बहुत सी खेती की ज़मीन का सही इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं हो पाता है क्योंकि ज़मीन मालिक गाँव में नहीं रहता या खेती छोड़ चुका है। लेकिन वो किसी अन्य किसान को अपनी खेती बंटाई या ठेके पर भी सिर्फ इस डर से नहीं देता था कि कहीं उसकी ज़मीन न चली जाए। 

नियमों के मुताबिक़ अगर कोई बंटाईदार एक नियत समय से ज्यादा किसी खेत पर बंटाई पर खेती करता रहा है तो वो उस खेत को अपने नाम कराने का हकदार है।

डॉ हक के अनुसार, "भूस्वामियों को बढ़ावा मिलेगा कि वो अपनी ज़मीन गंवाने का डर पाले बिना उसे लीज़ पर देकर मिलने वाले धन को खेती के बाहर किसी इकाई में लगाएं। इससे देश में व्यावसायिक विविधता आएगी, जो ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।''

कमेटी ने ये पाया था कि देश में खेतिहर भूमि का पूरा इस्तेमाल इसलिए भी नहीं हो पा रहा क्योंकि अलग-अलग राज्यों में खेती की ज़मीन को लीज़ पर देने को लेकर अलग-अलग निमय हैं। ज्यादातर खेतिहर भूमि की लीज़ को बढ़ावा नहीं देते जो कि देश की खाद्य उत्पादकता और कृषि विकास के लिए एक समस्या है।

देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, कर्नाटक, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खेत लीज़ पर देना प्रतिबंधित है, केवल विधवा, अवयस्क, शारीरिक अक्षमता वाले और सैनिक किसानों को छूट दी गई है। केरल में भी बंटाईदारी प्रतिबंधित है, लेकिन हाल ही में सरकार ने स्वयं सहायता समूहों का कुछ छूट दी है।

इसी तरह पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्यों में ज़मीन लीज़ पर देना तो गैरकानूनी नहीं है लेकिन बंटाईदारों को यह अधिकार है कि निर्धारित समय तक बंटाई पर खेती करने के बाद वे भूस्वामि से ज़मीन खरीदने के हकदार हो जाते हैं। केवल आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, और पश्चिम बंगाल में ही बंटाईदारी के सरल कानून हैं।

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