कीटनाशक से 'दवा' गायब, जाँच में नमूने हुए फेल

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उन्नाव। कीटनाशक दवाएं बनाने वाली कंपनियां किसानों को ठग रही हैं। खुले बाजार में बिक रही कीटनाशक दवाआें से कीट पतंगों पर असर करने वाली दवाएं ही गायब हैं। कृषि रक्षा विभाग की तरफ से सैंपल लेकर कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच के लिए एक दर्जन से अधिक नमूने लिए गए थे जिनमें से आठ नमूने फेल हो गए हैं। वहीं दो कंपपियों की दवाआें में दवा की मात्रा शून्य मिली है। किसानों के साथ की जा रही धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने एक मामले में कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि दूसरे मामले में डीएम से अनुमति मांगी गई है।

कृषि रक्षा विभाग को वर्ष 2015-16 में कीटनाशक दवाआें के एक सौ बीस सैंपल लेने का लक्ष्य दिया गया है। अप्रैल से दिसंबर तक विभाग ने विभिन्न कीटनाशक दुकानों से कुल 84 नमूने एकत्रित कर जांच के लिए बनारस प्रयोगशाला भेजे थे। जांच के बाद आई रिपोर्ट में आठ नमूने फेल पाए गए। 

कृषि रक्षा विभाग के अनुसार, दही चौकी के औद्योगिक क्षेत्र स्थित हेमंत फर्टिलाइजर से दो दवाआें खोरट दस ग्रा और मिथाइल पैराथियाल (दो प्रतिशत डीपी) का नमूना लिया गया था। बनारस प्रयोगशाला से इन दो नमूनों की आई जांच रिपोर्ट में रसायन में कीटनाशी दवा की मात्रा शून्य पाई गई। इसी प्रकार नवाबगंज के न्यू किसान घर से फ्रिफोनिक तीन प्रतिशत दवा का सैंपल लिया गया था। इसमें भी दवा की मात्रा शून्य मिली है। मेरठ की एग्रो केयर कंपनी इस दवा को बनाती है। कंपनी दावा करती है कि यह सभी दवाएं फसलों में दीमक या अन्य कीटों व खरपतवार को नष्ट करने के काम आती हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट में दवा ही गायब होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही रसूलाबाद स्थित नागेश कृषि सेवा केंद्र से क्लोरोपाइरीफास दवा का नमूना लिया गया था। जांच में यह भी अधोमानक पाया गया है। जम्मू की माडर्न पेपर्स इसका निर्माण करती है। कंपनी की आेर से लेबल पर दवा की मात्रा पचास प्रतिशत बताई गई जबकि जांच में दवा मात्र 35.4 प्रतिशत ही पाई गई है। 

उपकृषि रक्षाधिकारी ब्रजेश विश्वकर्मा ने बताया, ''हेमंत फ़र्टिलाइज़र व नागेश कृषि सेवा केंद्र के फेल हुए सैंपलों में वाद दायर किया गया है। कीटनाशी अधिनियम की धारा 29ए के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां वाद दायर किया गया है। इसके साथ ही न्यू किसान घर के मामले में वाद दायर करने के लिए डीएम से अनुमति मांगी गई है।"

''यदि पहली बार किसी भी कंपनी का नमूना फेल होता है तो दो साल की सजा और दस से पचास हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही दो बार नमूना फेल होने पर तीन साल की सजा और पन्द्रह से 75 हजार रुपये का जुर्माना अदा करना पड़ेगा।" ब्रजेश विश्वकर्मा आगे बताते हैं। 

रिपोर्टिंग - श्रीवत्स अवस्थी 

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