किसानों के अच्छे दिन लाने की कोशिश में सरकार

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देश की 65 फीसदी जनता कृषि से जुड़ी है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी कृषि महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकारें इस ओर न के बराबर ध्यान दे रही हैं। यह बात अलग है कि दावे हमेशा किसान हित में किए जाते रहे हैं। अब हालात ऐसे हैं कि लोगों का मोह कृषि से भंग होने लगा है। आखिर इसके क्या कारण हैं? अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों की हालत कब सुधरेगी? ऐसे कई सवाल हर व्यक्ति के जहन में उठते हैं। इन्हीं विषयों को लेकर केंद्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान से विवेक त्रिपाठी की बातचीत के संपादित अंश:

वर्तमान में खेती घाटे का सौदा होता जा रहा है। किसान का कृषि से मोहभंग हो रहा है। ऐसा क्यों?

यह सच है कि खेती इस समय घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों का लागत भी नहीं निकल पा रही है। गाँव का विकास बुरी तरह प्रभावित है। किसान पलायन को मजबूर हैं। ग्रामीण विकास के लिए गाँवों में उद्योग-धन्धों का लगाया जाना जरूरी है। सड़क, बिजली, पानी आदि संसाधन मुहैया कराने से कुछ हद तक कृषकों को लाभ मिल सकता है। बिजनेसमैन और कृषि के बीच खाईं बढ़ती जा रही है। जिसे पाट पाना अभी सम्भव नहीं दिख रहा है। गाँव में अब कोई हंसता हुआ चेहरा भी नहीं दिख रहा है। फिर भी चुनौती को हम स्वीकार कर रहे हैं। किसानों की मुस्कान वापस लाने की कोशिश हो रही है। केंद्र सरकार किसान हित के लिए कटिबद्ध है।

कृषि का महत्व कैसे बढ़े, इसके लिए क्या करना होगा?

आजादी के बाद से ही कृषि को मजबूत करने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन पिछली सरकारों ने शायद ठीक से काम नहीं किया। इसलिए कृषि फायदे का सौदा नहीं बन पाई। हकीकत तो यह है कि कोई भी किसान अपने बेटे को खेती से जोड़ना नहीं चाहता है। इसलिए दिनोंदिन किसानों की रुचि खेती में घटती गई। हम प्रयास कर रहे हैं कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़े। कृषि और किसान दोनों का महत्व समझे बिना हम गाँवों को खुशहाल नहीं कर सकते हैं। उपभोक्ता जब कृषि उत्पादों का दाम किसान को अधिक देगा तभी किसानों की स्थिति में सुधार होगा। कृषि को केंद्र सरकार प्रोफेशन बनाने पर विचार कर रही है।

किसानों का पलायन कैसे रोका जाए?

सड़क, बिजली, रोजगार और गाँवों में ठीक से उद्योग पहुंच जाए तो 50 फीसदी पलायन रुक जायेगा। देश की खेती-किसानी बारिश पर निर्भर है। पिछले दो वर्षों से सूखा पड़ रहा है। किसान दिक्कत में हैं। फिर भी खेती भगवान भरोसे हो रही है, व्यक्ति के भरोसे नहीं। बारिश के पानी का संचय बहुत जरूरी है। इसके अलावा युवाओं को कृषि के प्रति आकर्षित करना होगा। पुराने तरीके छोड़ने होंगे। किसानों को पहले से बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट पॉलिसी पूरे देश में लागू करने जा रही है। किसान अपनी फसल को ऑनलाइन सम्पूर्ण भारत में बेंच सकता है। किसान को फसल की गुणवत्ता पर कीमत मिलेगी।

कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार कौन से कदम उठा रही है?

कृषि में मार्केटिंग का अभाव है। गेहूं, चावल की खरीदारी पर ही सरकारें ध्यान दे रही हैं, जबकि अन्य खाद्यानों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। एग्रीकल्चर में मिडिएटर्स को खत्म करने का प्रयास हो रहा है। 5 रुपये की सब्जी बाजार में आते-आते दस गुना मंहगी हो जा रही है। प्रयास है कि वैज्ञानिक ऐसी फसलों के नवाचार पर बल दें जो कम पानी में ज्यादा से ज्यादा पैदा हों। 

कृषि से डिग्रीधारक और डिप्लोमा वालों को इसका कैसे लाभ मिलेगा?

केंद्र सरकार ने कृषि पढ़ाई करने वालों को सीधे रोजगार देने का निर्णय लिया है। खाद, बीज और पेस्टिसाइड की दुकानों का लाइसेंस अब गैर-कृषि छात्रों को नहीं मिलेगा। उन्हें कृषि संबंधी जानकारियां नहीं होती हैं और वे अपना व्यापार बढ़ाने के चक्कर में किसानों को गलत दवाएं और बीज दे देते हैं। ऐसे में खेती में पैसा लगाने के बाद भी किसान को घाटा होता है और वह इसे भगवान की मंशा समझकर अपने भाग्य को कोसता है। कृषि की पढ़ाई करने वालों के ज्ञान का उपयोग कृषि के लिए किया जाना जरूरी है। खेतीबाड़ी से इन्हें जोड़कर किसानों को अधिक लाभ दिलाया जा सकता है। इनके ज्ञान के उपयोग से खेती लाभप्रद हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का उपयोग कैसे हो, इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है।

बुंदेलखण्ड की समस्या का हल कैसे हो, क्या करना चाहिए?

बुंदेलखण्ड को केवल पानी चाहिए। केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रयास भी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार को धन दिया गया है। बुंदेलखंड की समस्या समाधान के लिए बारिश के जल का संचयन जरूरी है। पानी लाने के लिए पाण्ड रिसर्वेटिंग पम्प बनाने होंगे। चैक ड्रम और ज्यादा मात्रा में बनाने की जरूरत है। पानी की समस्या हल होते ही बुंदेलखण्ड फिर गुलजार हो जायेगा।

किसानों की प्रतिस्पर्धा से कृषि को लाभ मिलेगा?

किसानी में प्रतिस्पर्धा अनिवार्य है। इससे कृषि को बढ़ावा मिलेगा। कृषि संयत्रों खासकर कोल्हू, स्टोरिस को बढ़ावा देना चाहिए। कोल्हू की नई तकनीक को विकसित करना जरूरी है। इससे अच्छा लाभ होगा। साथ ही स्पर्धा में कृषि की उत्पादकता भी खूब बढ़ेगी। नये-नये तरीके भी सामने आयेंगे।

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