किसानों को मुआवज़ा नहीं मिलेगा

किसानों को मुआवज़ा नहीं मिलेगागाँवकनेक्शन

लखनऊ। खराब मौसम से बर्बाद हुई फसलों का आंकलन करने लेखपाल तो खेत-खेत नहीं पहुंचे, लेकिन आंकलन की रिपोर्ट ज़रूर शासन के पास समय से पहुंच गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार कहीं भी किसानों का इतना नुकसान नहीं हुआ कि उन्हें मुआवज़े की ज़रूरत पड़े।

राजधानी लखनऊ के साथ-साथ यूपी के दर्जनों जिलों में मार्च के दूसरे सप्ताह में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों के खेतों में तैयार खड़ी गेहूं, सरसों और दहलनी फसलें ज़मीन पर बिछ गई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जल्द से जल्द नुकसान का आंकलन करने रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।

“विभाग ने सभी जिलों से फसलों की बर्बादी की रिपोर्ट मांगी थी। जिलों से इसकी रिपोर्ट आ चुकी है। सोमवार को नुकसान के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी”, प्रमुख सचिव राहत सुरेश चंद्रा ने कहा।”

गाँव कनेक्शन ने इस आदेश के बाद प्रभावित ज़िलों में आंकलन की ज़मीनी स्थिति जानी थी जिसमें पता चला था कि लेखपाल खेतों में नहीं गए हैं, और सूत्रों ने यह भी कहा कि नुकसान कम ही दिखाने के आदेश हैं।

रिपोर्ट के आंकड़े तो सोमवार को जारी होंगे लेकिन सबसे ज्य़ादा प्रभावित मेरठ, ललितपर और लखनऊ जैसे ज़िलों के आंकलन का औसत देखें तो कहीं भी फसलों का नुकसान 33 प्रतिशत नहीं हुआ है। राज्य के आपदा राहत नियमों के अनुसार 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने पर ही किसानों को मुआवज़ा दिया जाता है।

“जिले में सरसों की नौ फीसदी, गेहूं की 20 से 25 और चना की 10 फीसदी फसल को क्षति पहुंची है। जिले में कुल 14 फीसदी फसलों को नुकसान पहुंचा है,” जिलाधिकारी मेरठ पंकज यादव ने बताया। पश्चिती उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से था। सरोजनीनगर इलाके में 14 मार्च को भारी बारिश के साथ गिरे ओले से किसानों की खड़ी फसल देखते-देखते बबार्द हो गई। 

जिले की बीकेटी तहसील क्षेत्र की रैथा रोड पर भी फसलों को नुकसान पहुंचा था। यहां की भी रिपोर्ट शासन पहुंच गई है लेकिन कोई आंकलन करने आज तक न पहुंचा। दर दिन बीत चुके है, लेकिन खेतों और गाँवों में कोई भी अफसर फसलों की तबाही को देखने नहीं पहुंचा। 

“हमने गेहूं की फसल के साथ खीरा बोया था, ओला गिरने से दोनों फसलें बर्बाद हो गईं। कोई भी सरकारी कर्मचारी हमारे खेत पर क्या दूर-दूर तक किसी खेत पर नहीं पहुंचा,” बक्शी का तालाब तहसील के किसान रामजस यादव (50 वर्ष) ने बताया। 

लखनऊ के एडीएम वित्त एवं राजस्व, धनन्जय शुक्ला ने बताया, “जिले में बारिश और ओलावृष्टि से 10 से 20 फीसदी फसलों का नुकसान हुआ है। सरोजनीनगर ब्लॉक में फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। इस क्षेत्र में 20 फीसदी फसलें खराब हुई हैं।” 

वहीं, बुंदेलखंड के प्रभावित जिले ललितपुर के जिलाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार ने बताया, “जिले में 10 से 25 फीसदी फसलें बर्बाद हुई हैं। तालबेहटा क्षेत्र में करीब 25 फीसदी फसलें ओले से नष्ट हुई हैं। किसी भी किसान की 33 फीसदी से ज्यादा फसल खराब नहीं हुई है।”

रिपोर्टर - जसवंत सोनकर

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