किसानों को रुला रहा प्याज

किसानों को रुला रहा प्याजgaoconnection

लखनऊ। लगातार दो बार सूखे ने किसानों की मुसीबतें बढ़ा रखी थीं फिर भी इस बार प्याज की अच्छी पैदावार हुई । लेकिन अब किसानों को इतना कम दाम मिल रहा है कि लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है।

देश में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक हैं। उत्तर प्रदेश में भी प्याज यहीं से आयात होती है। पिछले वर्ष प्याज 50-60 रुपये प्रति किलो के दाम से बिक रही थी, उसी प्याज का दाम इस बार इतना कम मिल रहा है कि किसानी का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

दुबग्गा और नवीन गल्ला मंडी, त्रिवेणी नगर लखनऊ की दो प्रमुख मंडियां हैं। यहां पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों की प्याज आती है। एक हफ्ते पहले तक यहां पर प्याज 15 से 20 रुपये में बिक रही थी उसी प्याज का दाम गिरकर पांच से दस रुपये में आ गया है।

उत्तर प्रदेश कृषि विदेश व्यापार और विपणन के सह निदेशक डॉ. दिनेश चन्द्रा प्याज सस्ती प्याज के बारे में बताते हैं, “उत्तर प्रदेश प्याज के मामले में उतना आगे नहीं है यहां पर दूसरे प्रदेशों से प्याज आती है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से यहां प्याज मगांईजाती है। इस बार वहां प्याज की बढ़िया पैदावार होने की वजह से ऐसा हो रहा है।” महाराष्ट्र के जालना जिले के किसान गुरुदत्त शिन्दे ने इस बार चालीस बीघा खेत में प्याज लगाया है, जिसमें से 15 बीघा प्याज बाजार तक पहुंच गयी है लेकिन कम दाम मिलने से वो आगे की खुदाई नहीं कर रहे हैं। गुरुदत्त बताते हैं, “पिछली बार इतना महंगा प्याज बिका था, तो हमारे यहां के अधिकतर किसानों ने प्याज लगायी है। इस बार इतना कम दाम मिल रहा है किफसल की खुदाई नहीं कर रहे हैं। अब फसल तैयार है ज्यादा दिन तक खेत में भी नहीं रख सकते हैं, दूसरी फसल भी लगानी है।”

पिछली बार इस समय प्याज का दाम 50-60 रूपये तक पहुंच गया था, वही प्याज इस बार तीन से चार रुपये के फुटकर भाव में बिक रहा है। अगर यही रहा तो किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।

महाराष्ट्र में 2 लाख 60 हजार हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में एक लाख 11 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती जाती है। वहीं उत्तर प्रदेश में 26 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती जाती है।

दुबग्गा मंडी में प्याज का व्यापार करने वाले अढ़ाती अब्दुल हाफिज कहते हैं,  “हम लोग इंदौर, नासिक से प्याज मंगाते हैं, इस बार प्याज का बाजार बहुत कमजोर है। 

इसमें  छह से 10 रुपये किलो तक हम लोग प्याज थोक में बेच रहे हैं।” किसान सस्ते दामों पर प्याज बेचने को भी मजबूर हैं क्योंकि कोल्ड स्टोरेज न होने की वजह से प्याज के सड़ने का डर है। वहीं व्यापारी किसानों की इस कमजोरी का फायदा उठाकर किसानों से सस्ते दामों पर प्याज खरीद लेते हैं। 

इसके बाद प्याज की कमी होने पर बाजार में प्याज उतारते हैं, जिसका उन्हें मन मुताबिक दाम मिलता है।

दुबग्गा और त्रिवेणी नगर मंडी के सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर योगानंद कहते हैं, “अभी अपने यहां सिर्फ बाहर से ही प्याज आ रही है, जब लखनऊ और आसपास के किसानों की प्याज बाजार में आ जाएगी तो अभी यहां भी प्याज और सस्ती हो जाएगी।”

रिपोर्टर - दिवेन्द्र सिंह

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