आप उगाते रहिए, हम सड़ाते रहेंगे, और किसानों के मरने का क्रम जारी रहेगा

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   2 July 2018 7:04 AM GMT

आप उगाते रहिए, हम सड़ाते रहेंगे, और किसानों के मरने का क्रम जारी रहेगाबारिश में भीगता अनाज।

एक सरकारी अध्ययन की मानें तो ब्रिटेन के कुल उत्पादन के बराबर भारत में अनाज बर्बाद हो रहा है। यानी लगभग 92 हजार करोड़ रुपए का खाद्य पदार्थ हर साल बर्बाद हो जाता है। खाद्य पदार्थों की जितनी बर्बादी हमारे देश में हो रही है उससे पूरे बिहार की आबादी को एक साल खिलाया जा सकता है।

देश में अनाजों का उत्पादन खूब होता है। बावजूद इसके, किसानों को सही दाम भी नहीं मिलता और लाखों लोग भूखे सोने को मजबूर होते हैं। इसकी वजह कहीं न कहीं भंडारण के लिए उचित व्यवस्था का न होना भी है। अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि बारिश में भीगने की वजह से लाखों टन आनाज बर्बाद हो गए। बावजूद इसके सरकार इस पर कुछ बोलने से कतराती है। सरकार ज्यादा उत्पादन का गान कर अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन ये नहीं बताती कि अन्न को सुरक्षित रखा कैसे जाएगा। खैर सरकार तो इस मुद्दें पर कुछ बोलती।

1979 में 'खाद्यान्न बचाओ' कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत किसानों में जागरुकता पैदा करने और उन्हें सस्ते दामों पर भंडारण के लिए टंकियाँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आज भी लाखों टन अनाज बर्बाद होता है। देश में 2016-17 में रिकॉर्ड 27 करोड़ 56 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 2017-18 के लिए भी ऐसे ही रिकॉर्ड की उम्मीद जताई है।

अगर भंडारण की उचित व्यवस्था हो तो किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकता है। पिछले साल किसानों ने बंपर प्याज का उत्पादन किया। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इस कदर प्याज का उत्पादन हुआ कि किसान उसे मुफ्त में बांटने को मजबूर हो गए। कई जगहों पर किसानों ने पचास पैसे किलो प्याज बेचा। प्याज के भारी उत्पादन के बावजूद किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। उनके लिए प्याज की खेती घाटे का सौदा रहा। उसका मुख्य कारण बंपर उत्पादन के बाद भंडारण की कोई उचित व्यवस्था नहीं होना था। अगर भंडारण की उचित व्यवस्था होती तो किसान प्याजों का भंडारण कर सकते थे।

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मध्यप्रदेश में तो किसान प्याज के बंपर उत्पादन से इतने ज्यादा परेशान हो गए कि उन्होंने प्याज पशुओं को खिलाना शुरू कर दिया था। हालांकि केंद्र सरकार भंडारण की व्यवस्था को बढ़ाने के लिए तमाम दावे कर रही है। मंदसौर के किसान कृष्णा कुमावत (39) कहते हैं "कोल्ड स्टोरेज में जगह ही नहीं होती। तो वहां प्याज रखने की कोई सवाल ही नहीं है। दूरी भी इतनी है कि वहां तक जाने में ही बहुत खर्च आ जाता है। पिछले साल गेहूं मंडीइ में रखा था। बारिश हुई तो आधे से ज्यादा गेहूं भीग गया। कुछ को तो सुखा लिया, बाकि बर्बाद हो गया।" अगर देश में भण्डारण की व्यवस्था ठीक हो जाए तो किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, उनकी माैत कर सिलसिला भी रुकता रहेगा।

कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा "सरकार जल्द खराब हो जाने वाले कृषि उत्पादों के भंडारण लिए तेजी से काम कर रही है। भारत विश्व में सबसे अधिक शीत भंडारण क्षमता स्थापित करने वाला मुल्क हो गया है। भारत की शीत भंडारण क्षमता तीन करोड़ बीस लाख टन है। पिछले दो वर्ष के दौरान दस लाख टन क्षमता से अधिक भंडारण की लगभग ढाई सौ परियोजनाएं शुरू की गई हैं।"

एक सरकारी अध्ययन की मानें तो ब्रिटेन के कुल उत्पादन के बराबर भारत में अनाज बर्बाद हो रहा है। यानी लगभग 92 हजार करोड़ रुपए का खाद्य पदार्थ हर साल बर्बाद हो जाता है। खाद्य पदार्थों की जितनी बर्बादी हमारे देश में हो रही है उससे पूरे बिहार की आबादी को एक साल खिलाया जा सकता है। भारत सरकार के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के मुताबिक उचित भंडारण की कमी ने भी देश में खाद्यान्न की बर्बादी को बढ़ाया है। भारत में 40 फीसदी अनाज खेतों से घरों तक पहुंचता ही नहीं है।

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कभी खेतों से मंडी के रास्ते तो कभी मंडियों में वह सड़ जाता है। समस्या यह है कि अनाज और अन्य खाद्य सामग्री को संभाल कर रखने के लिए सही मूलभूत ढांचा नहीं है। सही भंडारण के अभाव में प्याज, सब्जियों और दालों की बर्बादी ज्यादा हो रही है। अगर सर्वे की मानें तो 10 लाख टन प्याज और 22 लाख टन टमाटर प्रति वर्षा खेत से बाजार पहुंचते-पहुंचते रास्ते में बर्बाद हो जाते हैं। अगर यही खाद्य सामग्री लोगों तक पहुंच जाए तो देश में निश्चित तौर पर भुखमरी कम होगी और किसानों का मुनाफा भी बढ़ेगा।

जितने कोल्ड स्टोरेज हैं, उतने ही और चाहिए

देशभर में फल-सब्जियों के भंडारण के लिए जितने कोल्ड स्टोरेज हैं, लगभग उतने ही और चाहिए। देशभर में हालिया समय में 6300 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 3.1 करोड़ टन है। रिपोर्ट में कोल्ड स्टोरेज की स्थिति पर गौर किया गया, जिसमें सामने आया कि देश में लगभग 6.1 करोड़ टन कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है, ताकि बड़ी संख्या में फल, अनाज के साथ खाद्यान्न खराब न हो।

उद्योग मंडल एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने एक अध्ययन के हवाले से कहा "भारत के पास करीब 6,300 कोल्ड स्टोरेज की सुविधा मौजूद है जिसकी कुल भंडारण क्षमता तीन करोड़ 1.1 लाख टन की है। इन स्थानों पर देश के कुल जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के करीब 11 प्रतिशत भाग का भंडारण कर पाता है। इन भंडारण क्षमता का फीसदी भाग उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और पंजाब में फैला है। 2016 में भारत में शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) बाजार का मूल्य 167.24 अरब डॉलर का आंका गया था और इसके वर्ष 2020 तक 234.49 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान जताया गया है।"

एक सर्वे की मानें तो 10 लाख टन प्याज और 22 लाख टन टमाटर प्रति वर्षा खेत से बाजार पहुंचते-पहुंचते रास्ते में बर्बाद हो जाते हैं

पिछले कुछ वर्षों में शीत भंडार श्रृंखला का बाजार निरंतर बढ़ा है और यह रुख वर्ष 2020 तक जारी रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में इस क्षेत्र के धीमे विकास के लिए कई पहलुओं को रेखांकित किया गया है जिनमें से एक अधिक परिचालन लागत है। रावत ने कहा "पर्याप्त आधारभूत ढांचे की कमी, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव, पुरानी पड़ चुकी प्रौद्योगिकी एवं अस्थिर बिजली की आपूर्ति जैसे पहलू भारत में शीत श्रृंखला आधारभूत ढांचा के विकास में अन्य प्रमुख बाधाएं हैं। उन्होंने कहा कि शीत श्रृंखला की स्थापना में आधारभूत ढांचा की लागत अधिक आती है।"

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सुप्रीम कोर्ट ने लगायी थी फटकार

भंडारण में व्यापक खामियों के चलते लाखों टन अनाज सड़ जाने की खबरों के मद्देनजर कुछ साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी कि अगर भंडारण का प्रबंध नहीं किया जा पा रहा है तो क्यों नहीं अनाज को गरीबों में मुफ्त बांट दिया जाता। एसोचैम के आंकड़ों के अनुसार, सही रखरखाव के अभाव में पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 16 हज़ार 500 टन अनाज सड़ गया। मध्य प्रदेश में अनाज भंडारण को लेकर सरकार कितनी लापरवाह है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पिछले कुछ सालों में प्रदेश के सरकारी गोदामों में रखा 157 लाख टन अनाज सड़ गया, जिसकी अनुमानित कीमत पांच हजार करोड़ रुपए थी। इसमें 54 लाख टन गेहूं व 103 लाख टन चावल शामिल था।

पिछले दिनों नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कहा "देश में अनाज के आधुनिक भण्‍डारण के लिए 100 लाख टन के स्‍टील साइलो बनाने की योजना पर भारतीय खाद्य निगम और राज्‍यों में युद्धस्‍तर पर काम चल रहा है। देश में भंडारण क्षमता के आधुनिकीकरण के उद्देश्‍य से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने वर्ष 2020 तक सार्वजनिक निजी भागीदारी पद्धति में चरणबद्ध तरीके से 100 लाख टन क्षमता के स्‍टील साइलो के रूप में आधुनिक भंडारण सुविधा के निर्माण के लिए एक योजना बनाकर काम कर रहा है।

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