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लैंप की रोशनी में होता है प्रसव, फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

लैंप की रोशनी में होता है प्रसव, फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। प्रदेश में बड़े-बड़े अस्पताल बन रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि चंद मिनटों में ही मरीजों तक एंबुलेंस पहुंच जाती है लेकिन बलरामपुर जि़ले में एक स्वास्थ्य केंद्र ऐसा भी है जहां आज भी लालटेन की रोशनी में प्रसव कराया जाता है।

मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुगौली कला का है। जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। फार्मासिस्ट के सहारे ये स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। अस्पताल में स्थित महिला प्रसव केंद्र भी एएनएम के सहारे है। यहां पर बिजली के तार तो हैं लेकिन बिजली कभी-कभार ही आती है। जेनरेटर की सुविधा यहां नहीं है। नतीजन प्रसूताओं का प्रसव यहां आज भी लालटेन या मोमबत्ती की रोशनी के सहारे किया जाता है। प्रसव केंद्र पर स्टाफ नर्स रीमा यादव व सुनीता यादव हैं। यहां पर दो एएनएम प्रीती कश्यप व सुनीता पाण्डेय भी नियुक्त हैं।

प्रसव केंद्र एएनएम प्रीती कश्यप बताती है, ''चार-पांच साल ये यहां बिजली की सर्वाधिक समस्या है। कभी-कभार ही बिजली आती है। ऐसे में अगर कोई महिला रात में आती है तो मजबूरन हमें लालटेन और मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराना पड़ता है।"

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गुगौली कला करीब 15 किमी आबादी में स्थित 45 ग्रामसभा और 54 गाँवों के बीच एक मात्र स्वास्थ्य केंद्र है। 15 किमी की आबादी में करीब 32 हजार लोग रहते हैं जिनके इलाज का जिम्मा इसी स्वास्थ्य केंद्र पर है। स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट दीपचन्द सैनी, वार्डब्वॉय पारसराम पाल व एक स्वीपर सुरेन्द्र वाल्मिकी कार्यरत हैं। यहां पर थोड़ी सी भी गंभीर बीमारी का इलाज संभव नहीं है क्योंकि यहां पर न तो कोई चिकित्सक है और न ही उपचार के पर्याप्त संसाधन।

फार्मासिस्ट दीपचन्द बताते है, ''अधिकतर यहां पर जहरीले जीव-जंतुओं का शिकार बनने वाले मरीज आते हैं जिनको प्राथमिक उपचार देकर सीएचसी शिवपुरा रेफर कर दिया जाता है। हाल में ही भरदौलिया निवासी गुडिय़ा को बिच्छू ने काट लिया था। शाम को उसके परिजन उसे यहां लेकर आए। गुडिय़ा को प्राथमिक उपचार के बाद सीएचसी रेफर कर दिया क्योंकि यहां पर न तो कोई चिकित्सक है और न ही पर्याप्त उपचार के संसाधन।"

दो साल से नहीं आया कोई चिकित्सक

चिकित्सकों के न होने के संबंध में फार्मासिस्ट दीपचन्द बताते है, ''सन 2005 से लेकर 2007 तक डॉ. शफीक यहां तैनात थे। इसके बाद वर्ष 2008 से 2010 तक यहां पर डॉ. एके सिंह की तैनाती रही। उसके बाद वर्ष 2012 तक डॉ. सौरभ यहां पर थे जो दो वर्ष ड्यूटी करने के बाद वह लखनऊ चले गये। इसके बाद से यहां कोई भी चिकित्सक नहीं आया।"

प्रसव केंद्र में बारिश में भर जाता पानी

प्रसव केंद्र में तैनात एएनएम प्रीती कश्यप बताती है, ''इस केंद्र में कोई भी सुविधा नहीं है। कई बार अधिकारियों को इस संबंध में सूचना दी जा चुकी है। बारिश के दौरान तो केंद्र में पानी भर जाता है। सभी जगह सीलन हो जाती है। इस दौरान प्रसव कराने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ये भी हैं समस्याएं

  • नहीं हैं एक भी एम्बुलेंस 
  • पर्याप्त वैक्सीन नहीं 
  • वैक्सीन रखने के लिए नहीं है फ्रीजर
  • प्रसव केंद्र में नहीं है दाई 

रिपोर्टर- अमित मिश्रा

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