लोगों की मेहनत से बना आदर्श तालाब

लोगों की मेहनत से बना आदर्श तालाब

रायबरेली। लाला नंनद किशोर (85 वर्ष) रोज शाम को अपने पोते के साथ खीरों के मुख्य चौराहे पर स्थित पक्के ताल पर मछलियों को खिलाने आते है। नन्दकिशोर ही नहीं आस-पास के बहुत से लोग तालाब की सीढिय़ों पर चहलकदमी करने और मछलियां और चिडिय़ों को दाना चुगाने आते है।

शाम के वक्त को यह स्थान और भी गुलजार हो जाता है जब आस-पास चाट पकौड़े, चाऊमीन, ढोसा आदि खान-पास की दुकानें सज जाती हैं। पहले ऐसा नहीं था, पहले लोग कूड़ा फेकते थे शौच क्रिया करते थे यहां तक कि मृत जानवर तक फेक जाते थे। लेकिन अब पक्का तालाब पक्षी विहार की तरह हो गया है। इस सब के पीछे लोगों की मज़बूत इच्छा शक्ति और मेहनत का       नतीजा है।

खीरों के ग्राम प्रधान सुरेश कुमार चौधरी के अनुसार, ''10 वर्ष पहले तक तालाब की जगह पर लोग कूड़ा फेंकते थे शौच क्रिया करते थे यहां तक कि मृत जानवर तक फेंक जाते थें, सीढिय़ा टूट-फूट कर खत्म हो गयी थी" सुरेश जी के मुताबिक, प्रधान बनने के बाद बहुत दौड़-धूप करके पहले तालाब का हस्तांतरण ग्राम सभा में कराया फिर इसके जीर्णोद्धार के लिए जन-जागरण किया 2008 में राज्य वित्त की निधि से आठ लाख रुपये खर्च करके तालाब का स्वरूप सही किया, जिसमें कुछ पैसा मनरेगा में मिले बजट से भी लगाया गया।

तालाब की सीढिय़ां, चबूतरे और सबमर्सिबल पम्प वगैरह लगने के बाद तालाब में क्षेत्रीय लोग रुचि लेने लगें, लोगों का आना-जाना बढ़ा तो आस-पास दुकाने सजने लगी खान-पान की दुकानों से गंदगी तालाब में जाने का खतरा था तो 2014 में दो लाख पचास हजार रुपये फिर राज्य वित्त से ही खर्च करके तालाब की बाउण्ड्री, रंग-रोगन, गेट और चारो तरफ  सोलर लाईटों का इंतजाम किया। सफाई करने की समुचित व्यवस्था की गर्ई और दुकानदारों को भी जिम्मेदारी दी।

आज इस ताला में चार कुंटल से ज्यादा मछली, चार बतख और प्रावासी पक्षियों का झुंड लगा रहता है। आस-पास के लोग सपरिवार यहां आने लगे है बाजार के बीच में होने से खरीदारी के साथ पिकनिक भी मनाते हैं। आगामी योजना के बारे में सुरेश चौधरी नें बताया, ''जल्द ही पैडल वाली कुछ नाव भी चलाने की तैयारी है, चारो तरफ  बगीचा लगवाना है। एक कमेटी बनाकर उसकी जिम्मेदारी कमेटी को देनी है ताकि स्थानीय लोगों की भागीदारी और जिम्मेदारी बनी रहे।" इस तरह आज वर्षों पहले देखे गये बंशी बनिया के सपने को लोगों की इच्छा शक्ति में पुर्नजीवित कर दिया है और एक बार फिर बंशी बनिया का नाम लोगों की जुबान पर आने लगा है। 

वर्षों पुराना है इतिहास 

क्षेत्र में बंशी बनिया के नाम से मशहूर लाला बंशीधर मूल रूप से उन्नाव जनपद के भगवन्त नगर निवासी थे जो व्यापार करने कलकत्ते चले गये वहां से वापस आने के बाद रायबरेली जनपद की खीरों को अपनी कर्मस्थली बनाया, तब खीरों राजाबलभद्र सिंह की रियासत हुआ करती थी उस समय बंशी सेठ ने खीरों में तालाब के साथ-साथ एक धर्मशाला भी बनवायी थी। स्व. बंशी की चौथी पीढ़ी की सदस्य संतोष देवी (70) कहती है,  ''बंशी लाला के बनवाये तालाब यहां के अलावा उन्नाव के भगवन्त नगर, मौरावां और अचलगंज में भी है।"

रिपोर्टर - किशन कुमार

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