मध्य प्रदेश : शिवराज सिंह की घोषणाओं पर बोले लोग, जुमले हैं जुमलों का क्या ?

Alok Singh BhadouriaAlok Singh Bhadouria   13 Feb 2018 6:35 PM GMT

मध्य प्रदेश : शिवराज सिंह की घोषणाओं पर बोले लोग, जुमले हैं जुमलों का क्या ?शिवराज सिंह ने सोमवार को भोपाल में किसान महासम्मेलन में कई घोषणाएं की

"चुनाव के दौरान राजा ने भेड़ों से वादा किया कि वह हर भेड़ को 1-1 कंबल देंगे, भेड़ों का झुंड खुशी से झूम उठा। फिर एक मेमने ने धीरे से अपनी मां से पूछ लिया कि ये राजा जी हमारे कंबलों के लिए ऊन कहां से लाने वाले हैं? फिर से सन्नाटा पसर गया …।" यह पंचतंत्र की किसी कथा की भूमिका नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किसान महासम्मेलन के मंच से किए गए ऐलानों पर हरदा के एक किसान की प्रतिक्रिया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को भोपाल में आयोजित किसान महासम्मेलन में किसानों को लेकर कई अहम घोषणाएं की। 620 करोड़ रुपये एक क्लिक के जरिए किसानों के खातों में भेजे, भावांतर योजना के प्रमाण पत्र बांटे, ओला-बारिश से हुए नुकसान को राहत राशि और फसल बीमा योजना के जरिए पाटने का ऐलान किया। किसान क्रेडिट कार्ड को और सुलभ और लाभकर बनाने के लिए उसे रूपे कार्ड में बदलने की बात कही ताकि किसान सीधे एटीएम से पैसा निकाल ले। उम्मीद थी कि ऐसे मास्टर स्ट्रोक के बाद किसान शिवराज सरकार के जबर्दस्त फैन हो जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। आयोजन के दौरान और उसके बाद भी किसानों ने प्रदर्शन करके अपनी नाखुशी जाहिर की।

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इस किसान महासम्मेलन की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हुई। किसान नेता केदार सिरोही ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा था, आज जो 200 रुपये का बोनस देने का निर्णय लिया स्वागत योग्य है यह निर्णय एक जंजर भवन पर रंग रोगन का कार्य करेगा बाकी आज का भाषण बजट पूर्व का भाषण था जिसमें चुनाव को देखते हुए किसानों के वोटों को अपने पक्ष में लाने के लिए कई घोषणाएं की या सीधे शब्दों में कह दे यह एक तरह का सौदा था । परंतु आज मध्य प्रदेश का किसान जो अपनी मुख्य समस्याओ का निदान मांग रहा है वो समाधान नहीं दिखा जैसे कर्ज माफी ,सुनिश्चित आय, शिक्षा ,स्वास्थ्य और ग्रामीण रोजगार पर कोई बात नहीं की गई जो कि किसानों की सबसे महत्वपूर्ण मांगे हैं।

सरकार के इन तमाम ऐलानों के बारे में मध्य प्रदेश का आम किसान क्या सोचता है यह जानने के लिए जब गाँव कनेक्शन ने किसानों से संपर्क किया तो हरदा के जितेश तिवारी ने कहा, इन ऐलानों पर तो इतना ही कहना चाहूंगा कि इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं। अगर जीत गए तो शिवराज जी को इसके बाद हमारी याद अगले पांच साल बाद यानि 2023 में ही आएगी। आजकल तो सरकार के पास योजनाएं बनाना और घोषणा करना यही काम रह गया है बस। हकीकत यह है कि आज कोई भी बैंक किसान को सब्सिडी वाला लोन पास ही नहीं करती, कह देती है अभी बजट नहीं है 4 महीने बाद देखते हैं। अभी इस साल सायोबीन और उड़द खेतों में सड़ गई जिसका सर्वे हुआ और कहा गया कि बीमा मिलेगा लेकिन उसका जिक्र तक नहीं किया गया… फिर इसके बाद जितेश ने भेड़ों वाला रूपक सुना दिया।

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गांव ईंटखेड़ी छाप, भोपाल के रोहित ठाकुर का कहना था, मुख्यमंत्री जी ने कल किसानों को रेवड़ी बांटी थी और किसान खुश हो गया। पर कोई ठोस कदम तो उठाए नहीं गए, ये तो महज चुनावी चोंचले हैं पर जो मूल समस्या है उसे कौन ठीक करेगा? चुनावी दौर में सब अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं, किसानों का क्या है भाई, ये तो आज है, कल तक पता नहीं बचेगा भी कि नहीं।

सोमवार को शिवराज सिंह ने भावांतर योजना में बदलाव का ऐलान करते हुए कहा था, हम आपकी सहमति से कुछ बदलाव कर रहे हैं, अब उपज को तुरंत मंडी में बेचने की जरूरत नहीं है। आप अपनी सुविधानुसार बेच सकते हैं। आप अपनी उपज का भंडारण करें, भंडारण का खर्च सरकार उठाएगी। इस पर सवाल उठाते हुए नरसिंहपुर के अंजेश कुमार पटेल ने कहा, माना कि सरकार भंडारण का पैसा देगी लेकिन किसान अगर अपनी उपज बेचने की जगह भंडारण करेगा तो खाएगा क्या? चने और मसूर का समर्थन मूल्य 5000 रुपये होना चाहिए था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उड़द के प्रीमियम का पैसा अभी तक नहीं मिला इस पर सीएम साहब को जवाब देना चाहिए था। सूखाग्रस्त घोषित इलाके की बीमा राशि कब तक मिलेगी यह भी नहीं बताया। खेती की मूल समस्या है कि किसानों की लागत इनकम से ज्यादा हो गई है, ऊपर से मौसम की मार, सूखा, अतिवृष्टि, ओले। अखिलेश पवार की भी शिकायत थी कि उन्हें भी बीमा का पैसा नहीं मिला। भावांतर योजना पर रतलाम के पवन जाट ने सुझाव दिया कि लहसुन के रेट देखते हुए इसको भी भवांतर में लेना चाहिए था।

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वेंकटनगर, जिला अनूपपुर के नीरज केशरवानी का कहना था, सरकार योजनाएं तो बना देती है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण इनका पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। केवल बड़े किसानों तक ही योजनाएं सीमित होकर रह जाती हैं। छोटा किसान सिर्फ अपनी बारी का इंतजार ही करता रह जाता है।

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किसान महासम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के बच्चों के लिए कृषक युवा उद्यमी योजना की चर्चा करते हुए कहा था, इस स्कीम के तहत 25 लाख से 2 करोड़ रुपए तक के लोन 15 फीसदी सब्सिडी के साथ दिए जाएंगे। राज्य सरकार गारंटर होगी। मध्य प्रदेश में एक हजार कस्टम प्रोसेसिंग और सर्विस सेंटर खोले जाएंगे जो सिर्फ किसानों के बेटे-बेटियों के लिए ही होंगे। भारत भर में मंडियों में फसलों की कीमत टिकर के माध्यम से राज्य की 150 मंडियों में दिखाई जाएगी। लेकिन राजगढ़ के दिनेश दांगी और नीमच जिले के रवि प्रकाश का अनुभव इस योजना के बारे में अच्छा नहीं है। उनका कहना है, इस योजना के तहत बस कुछ गिने-चुने लोगों को ही लाभ मिलता है। यह सब दिखावे के लिए है।

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