'सारागढ़ी की लड़ाई', जब 10 हज़ार अफ़ग़ानियों पर भारी पड़े थे 21 सिख जवान

अक्षय कुमार की फिल्म 'केसरी' युद्ध की एक सच्ची कहानी पर आधारित है। ऐसा युद्ध, जिसे लड़ने के लिए एक तरफ पूरी फौज थी और दूसरी तरफ महज़ 21 सैनिक। भारत में यूं भी युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों को बहुत पसंद किया जाता रहा है। भारत के इतिहास में, कई ऐसी लड़ाईयां दर्ज भी हैं, जो आम लोगों को काफी आकर्षित करती हैं। 'केसरी' फिल्म में सारागढ़ी का युद्ध दिखाया गया है, जो कि भारतीय ब्रिटिश सेना और अफ़गा़न लड़ाकों के बीच लड़ा गया था। पर यह युद्ध, भारतीय इतिहास के दूसरे युद्धों से बहुत मामलों में अलग था। चलिए जानें 'सारगढ़ी युद्ध' के बारे में दिलचस्प बातें :-

1) सारागढ़ी की लड़ाई 12 सितंबर 1897 को ब्रिटिश भारतीय सेना के 36वीं सिख रेजीमेंट के 21 जवानों और 10 हज़ार अफगानी हमलावरों के बीच लड़ी गई थी।

2)सारगढ़ी की लड़ाई, सारगढ़ी नामक स्थान पर लड़ी गई थी। आज यह जगह पाकिस्तान के वजीरिस्तान में है। उस वक्त यहां ब्रिटिश इंडियन आर्मी की सिख बटालियन के 21 सिख जवान तैनात थे, अफग़ानी लड़ाकों को लगा कि इस छोटी पोस्ट को जीतना आसान होगा। लेकिन, उन्हें इसके लिए भी एक युद्ध का सामना करना पड़ा।

3) 'केसरी' फिल्म में अक्षय कुमार ने हवलदार ईशर सिंह का किरदार निभाया है। ईशर सिंह इन्हीं 21 सिख जवानों में से एक थे। उन्हें सैन्य इतिहास में, अन्त तक युद्ध लड़ने वाले योद्धाओं में शामिल किया जाता है।

4) सारागढ़ी किले में सुबह-सुबह आराम कर रहे सिख सैनिकों पर 10 हज़ार अफगानी सैनिकों ने अचानक ही हमला किया था। उनका सामना करने के लिए सिर्फ 21 सिख सैनिक थे क्योंकि इतनी जल्दी वो कहीं से मदद नहीं मंगा सके थे। उनके अफसर ने कहा था कि वे पीछे हट सकते हैं, या मोर्चा संभाले रहें। 21 सिख जवानों का नेतृत्व हवलदार ईशर सिंह कर रहे थे, उन्होंने मोर्चा छोड़कर भागने की बजाय दुश्मन से लड़ने का फैसला किया।

5) सारागढ़ी की इस लड़ाई को अफ़ग़ानी लड़ाके बहुत आसानी से जीतने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि मुट्ठीभर सिख जवानों से लोहा लेना उन्हें इतना महंगा पड़ेगा। लड़ते-लड़ते सभी सिख जवान शहीद हो गए लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्होंने अपनी जान देने से पहले तकरीबन 600 अफ़ग़ानी लड़ाकों की जान ली थी।

6) इस युद्ध से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि 600 अफग़ानी आक्रमणकारियों को मौत के घाट उतारने वाले इन सिख सैनिकों में से कुछ ऐसे भी थे जो पूरी तरह सिपाही नहीं थे। दरअसल, इनमें से कुछ रसोइये और कुछ सिग्नलमैन थे। लेकिन जब बात पोस्ट बचाने की आई, तो सभी दुश्मन पर बिना कुछ सोचे समझे टूट पड़े।

7) सारागढ़ी में शहीद हुई सभी भारतीय सिख सैनिकों को मरणोपरांत ब्रिटिश हुकुमत ने बहादुरी का सर्वोच्च पुरस्कार 'इंडियन ऑर्डन ऑफ मेरिट' दिया।

8) सारागढ़ी युद्ध पर इसे पहले एक टीवी सीरीज़ भी आ चुकी है, जिसमें मोहित रैना लीड रोल में थे। हालांकि बड़े पर्दे पर 21 सिखों की शहादत की कहानी पहली बार दिखाई जाएगी।

9) इन 21 सिख फौजियों में से ज़्यादातर का संबंध फिरोज़पुर और अमृतसर से ही था, इसीलिए इनकी याद में केसरी बाग अमृतसर और फिरोज़पुर में, सारागढ़ी मेमोरियल गुरद्वारा साहिब स्थापित किए गए हैं। इतना ही नहीं सिख रेजीमेंट हर साल 12 सितंबर के दिन 'सारागढ़ी दिवस' भी मनाती है।


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