जन्मदिन विशेष: स्टूडियो में रजिस्ट्रार को बुलाकर गुप-चुप तरीके से देव आनंद ने कर ली इस ऐक्ट्रेस से शादी

जन्मदिन विशेष:  स्टूडियो में रजिस्ट्रार को बुलाकर गुप-चुप तरीके से देव आनंद ने कर ली इस ऐक्ट्रेस से शादीदेव आनंद।

लखनऊ। आज हम ऐसे शख्स की बात कर रहे है जो मुंबई तो आया ऐक्टर बनने के लिए लेकिन पेट की आग बुझाने के लिए उसे मिलिट्री की नौकरी ज्वाइन करनी पड़ी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आखिरकार नौकरी को छोड़ कर ये नौजवान फिल्म इंडस्ट्री में अपने कदम जमाने लगा।

कभी सीआईडी बनकर तो कभी टैक्सी ड्राइवर बनकर तो कभी बने पेइंग गेस्ट बनकर। हम बात कर रहे हैं ऐवरग्रीन ऐक्टर देव आनंद साहब की। 26 सितंबर 1923 को गुरूदासपुर में जन्में देव आनंद के बारे में ये बात शायद ही लोग जानते होंगे कि एक बार उनके बचपन में अमृतसर के एक शर्बत वाले ने देव साहब को देखकर ये कहा था 'ओ भाई तेरे मत्थे दे सूरज है' मतलब तेरे माथे पर तो सूरज उगा हुआ है एक दिन तू बहुत बड़ा आदमी बनेगा।

फिल्म विद्या के सेट पर देव साहब को हुआ था इश्क

देव साहब के बारे में कहा जाता है कि 1948 में आई फिल्म विद्या के सेट पर देव साहब को सुरैया से प्यार हो गया था। इस फिल्म की खास बात ये भी रही कि इस फिल्म में पहली बार सुरैया देव आनंद के साथ काम कर रहीं थी। इन दोनों की प्रेम कहानी इतनी चर्चित हुई कि आज भी पत्रिकाओं में इनके प्यार के किस्से लिखे जाते है।

देव आनंद और सुरैया।

एक इंटरव्यू के दौरान बयां किया था अपना दर्द

एक इंटरव्यू के दौरान देव आनंद ने कहा था कि हम शादी करना चाहते थे, लेकिन सुरैया अपनी दादी की मर्जी के खिलाफ जाने को तैयार नहीं हुईं। उनके घर कई लोग आने-जाने लगे थे, जिससे वे भ्रमित रहने लगीं। निहित स्वार्थी तत्वों ने हिन्दू-मुसलमान की बात उठाकर हमारे लिए मुश्किलें पैदा कर दीं। हमार अफेयर रोजाना सुर्खियों में छपता था। मूवी-टाइम्स के बी.के.करंजिया हमारे बारे में स्वच्छंदतापूर्वक लिखते थे।

एक दिन दादी के हुक्म का पालन करते हुए सुरैया ने मुझे 'नो' कह दिया। मेरा दिल टूट गया। उस रात घर जाकर चेतन के कंधे पर सिर रखकर खूब रोया और उन्हें अपनी सारी दास्तान सुना दी। यह मेरा स्वभाव नहीं है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन जीवन के उस दौर में हरेक के साथ ऐसा कुछ घटता है। आज मैं समझता हूँ, जो हुआ अच्छे के लिए हुआ।

सुरैया के बाद देव की जिंदगी में कदम रखा कल्पना कार्तिक ने

सुरैया के न कहने के बाद उनकी उदास जिंदगी में रंग भरने का काम किया उनकी ही फिल्म की हिरोइन कल्पना कार्तिक ने। कल्पना से देव साहब की पहली मुलाकात 1951 में बनी फिल्म बाजी के सेट पर हुई थी। जिसमें कल्पना सहायक अभिनेत्री का किरदार निभा रहीं थी। बाजी के अलावा और फिल्मों में भी काम करने के दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया था।

देव आनंद के साथ कल्पना।

बात है साल 1954 में आई फिल्म टैक्सी ड्राइवर की। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान देव साहब ने अचानक रजिस्ट्रार को बुलाया और स्टूडियो में ही कल्पना कार्तिक से शादी कर ली। ये शादी इतनी गुप-चुप तरीके से की गई कि उनकी शादी की भनक उनके भाई चेतन आनंद को भी नहीं लगी। जब कि चेतन टैक्सी ड्राइवर के डायरेक्टर थे और उस वक्त स्टूडियो में लाइटें सेट कर रहे थे। अचानक हुई शादी की शायद एक चजह ये भी थी कि सुरैया की तरह कल्पना को वो खोना नहीं चाहते थे।

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