देखने वाला है इन हिन्दी फिल्मों में देशभक्ति का जज्बा

देखने वाला है इन हिन्दी फिल्मों में देशभक्ति का जज्बाफिल्म गाँधी।

लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस पर पिछले कई सालों से फिल्म "गांधी" दिखाकर सरकारी मीडिया अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। हमारे स्वदेशी निर्माताओं ने आजादी से पहले आजादी के बाद अनेक ऐसी फिल्में दी हैं जिसमें देश भक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी गई थी। मनोज कुमार, चेतन आनन्द और जेपी दत्ता द्वारा निर्देशित व निर्मित अनेक फिल्में आज भी यादगार हैं। 1940 में निर्देशक ज्ञान मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म "बंधन" जो संभवत: पहली हिन्दी फिल्म थी जिसमें देशप्रेम की भावना को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया था।

यूं तो फिल्म "बंधन" में कवि प्रदीप का लिखा गीत "चल चल रे नौजवान" ने आजादी के दीवानों में एक जोश भरने का काम किया। 1943 में देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत फिल्म "किस्मत" प्रदर्शित हुई। फिल्म "किस्मत" में प्रदीप के लिखे गीत "आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ए दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है" जैसे गीतों ने स्वतंत्रता सेनानियों गजब का जोश भर दिया था। 1952 में प्रदर्शित फिल्म "आनंद मठ" का गीता बाली पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गीत "वंदे मातरम" आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। इसी तरह "जागृति" यह गीत "हम लाए है तूफान से कश्ती निकाल के" आज भी हमें आजादी की कीमत के प्रति आगाह करता है।

शहीद फिल्म।

1947 को देश आजाद हुआ। 1948 में आई फिल्म "शहीद", इसमें कामिनी कौशल के साथ दिलीप कुमार थे। रमेश सहगल द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने हर भारतीय की आंखों के सामने ग़ुलाम देश का मंज़र ला दिया था। यह फिल्म देशभक्ति की भावना से भरी थी। फिल्मकार मनोज कुमार का नाम उनकी देशभक्ति की फिल्मों के लिए लिया जाता है। मनोज कुमार का पांच फिल्मों में अपने करेक्टर का नाम भारत रखा, जिसके कारण वे भारत कुमार के नाम से भी लोकप्रिय हो गए। मनोज ने अपने करियर में "शहीद" (1965), "उपकार"(1967),"पूरब और पश्चिम"(1970) तथा "क्रांति" (1981) जैसी देशभक्ति पर आधारित बेजोड़ फिल्मों में काम किया। "शहीद" उनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया शहीद भगत सिंह का किरदार काबिले तारीफ रहा। यह भी सच है कि यदि मनोज कुमार सन 1967 में "उपकार" न बनाते तो वह आज न तो भारत कुमार होते और शायद आज उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार नसीब न होता।

उपकार में दिखाई गई किसानों की समस्या

"उपकार" देश की ऐसी पहली फिल्म थी जिसमें किसान समस्या और उनके योगदान के साथ देश के वीर जवानों यानी फौजियों के योगदान को भी एक साथ दिखाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर उनके लोकप्रिय नारे "जय जवान जय किसान" के सार को लेकर बनी इस फिल्म में मनोज कुमार पहली बार भारत कुमार नाम के एक किसान के किरदार में परदे पर अवतरित हुए थे। इस फिल्म के सुपरहिट होने के बाद वह खुद मनोज कुमार कम और भारत कुमार ज्यादा हो गए। "उपकार" खूब सराही गई और उसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कथा और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। कल्याणजी आंनद जी के संगीत निर्देशन में महेन्द्र कपूर की आवाज में गुलशन बावरा रचित गीत "मेरे देश की धरती सोना उगले-उगले हीरा-मोती" श्रोताओं के बीच आज भी शिद्दत के साथ सुना जाता है।

पूरब पश्चिम में दिखाई गई पलायन की समस्या

1970 में मनोज कुमार के निर्माण और निर्देशन में बनी एक और सुपरहिट फिल्म "पूरब और पश्चिम" प्रदर्शित हुयी। फिल्म के जरिये उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को उठाया जो दौलत के लालच में अपने देश की मिट्टी को छोड़कर पश्चिम में पलायन करने को मजबूर है। 1981 में मनोज कुमार ने फिल्म "क्रांति" के जरिये देशभक्ति की भावना को जगाने की कोशिश की। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 3 मई 2016 को मनोज कुमार को फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिए फिल्म जगत का सबसे बड़ा दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया।

कैफी आजमी का लिखा व रफी का गाया गीत "कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियों" आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। जब देश ने 1971 में पाकिस्तान से युद्ध लड़ाकर जबर्दस्त शिकस्त दी व बांग्लादेश बनाया तब इस कामयाबी पर भारतीय एयरफोर्स के कारनामों को रेखांकित करती फिल्म "हिन्दुस्तान की कसम" (1973) बनायी। यह फिल्म भी कामयाब रही। कैफी आजमी का लिखा व लता मंगेश्कर, रफी और मन्नाडे का गाया ये टाइटल सांग "न झुका है न झुकेगा सर जवान की कसम हिन्दुस्तान की कसम" श्रोताओं में आज भी जोश भर देता है।

जेपी दत्ता साहब को भी देशभक्ति वाली फिल्मों के निर्देशक के रूप में याद किया जाता है। सनी देओल, अक्षय खन्ना, पूजा भट्ट, जैकी श्रॉफ व सुनील शेट्टी को लेकर हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की 1971 की जंग को लेकर उन्होंने "बार्डर" (1997) फिल्म का निर्माण किया। इसमें आर्मी व एयरफोर्स का गजब का युद्ध कौशल दिखाया गया।

उसके बाद जब 1999 में भारत पाकिस्तान के मध्य कारगिल युद्ध हुआ इस बार भी पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा। जेपी दत्ता साहब ने 2003 में "एलओसी कारगिल" फिल्म का निर्देशन किया। इसमें संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अजय देवगन, शैफ अली खान, रानी मुखर्जी, रवीना टण्डन, करीना कपूर, महिमा चौधरी आदि का बेहतरीन अभिनय था। इनके अलावा "हम हिन्दुस्तानी" (1960), "नेताजी सुभाष चंद बोस : न फॉरगाटन हीरो" (2005), गांधी माई फादर (2007), लीजेड आफ भगत सिंह (2002), "मंगल पाण्डेय" (2005), "अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों" (2004), "हीरोज" (2008), "खेले हम जी जान से" (2010), "चिटगाँग" (1912) व "ये देश" (1984) जैसी फिल्मों ने भी समय-समय पर जोरदार दस्तक दी।

आज भी जवां हैं ये देशभक्ति गीत

भारतीय सिनेमा जगत में वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए अब तक न जाने कितने गीतों की रचना हुई है लेकिन "ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंखों में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी" जैसे देशप्रेम की अद्भुत भावना से ओतप्रोत रामचंद्र द्विवेदी उर्फ कवि प्रदीप के इस गीत की बात ही कुछ और है। एक कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखों में आंसू छलक आए थे। निर्देशक ज्ञान मुखर्जी की 1940 में प्रदर्शित फिल्म "बंधन" संभवत: पहली फिल्म थी जिसमें देशप्रेम की भावना को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया था। यूं तो फिल्म "बंधन" में कवि प्रदीप के लिखे सभी गीत लोकप्रिय हुए लेकिन "चल चल रे नौजवान" के बोल वाले गीत ने आजादी के दीवानों में एक नया जोश भरने का काम किया।

1952 में प्रदर्शित फिल्म "आनंद मठ" का गीता बाली पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गीत "वंदे मातरम" आज भी लोगों के दिलो दिमाग में राज करता है। इन सबके साथ 1961 में प्रेम धवन की एक और सुपरहिट फिल्म "हम हिंदुस्तानी" (1960) प्रदर्शित हुई जिसका गीत "छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी" सुपरहिट हुआ। कल्याणजी आंनद जी के संगीत निर्देशन में महेन्द्र कपूर की आवाज में गुलशन बावरा रचित गीत "मेरे देश की धरती सोना उगले-उगले हीरा-मोती" ("उपकार"1967), फिल्म "काबुलीवाला" (1961) में यह गीत "ए मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन" व "मेरा रंग दे बसंती चोला"("शहीद भगत सिंह", 1965) आज भी श्रोताओं की आंखों को नम कर देता है।

लीजेंड ऑफ भगत सिंह।

हर जुबां पर ताजा हैं देशभक्ति के ये डायलाग

मुझे स्टेट्स के नाम न सुनाई देते हैं और न दिखाई देते हैं, सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है- इंडिया-शाहरुख खान, "चक दे इंडिया"

हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा!-(सनी देयोल), "गदर"

शायद तुम जानते नहीं, यह मिट्टी शेर भी पैदा करती है, ऐसे शेर जो दूसरों को मिट्टी में मिलाते हैं-सुनील शेट्टी, बॉर्डर

तुम दूध मांगोगे, हम खीर देंगे। तुम कश्मीर मांगोगे, हम चीर देंगे-अल्ला बख्श , "मां तुझे सलाम"

मैं नहीं मानता कि हमारा देश दुनिया का सबसे महान देश है, लेकिन यह जरूर मानता हूं कि हममें काबिलियत है, ताकत है, इस देश को महान बनाने की।-शाहरुख खान, "स्वदेश"

तुम लोग परिवार के साथ यहां चैन से जियो, इसीलिए हम लोग रोज बॉर्डर पर मरते हैं। - अक्षय कुमार, "हॉलीडे"

देश से वफादारी किसी एक शख्स की गद्दारी से कहीं ज्यादा बढ़कर होती है। - रणदीप हुड्डा, "वंस अपान ए टाइम मुम्बई"

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