शास्त्रीय नृत्य में आधुनिकता लाने पर है ध्यान: मयूरी उपाध्याय

शास्त्रीय नृत्य में आधुनिकता लाने पर है ध्यान: मयूरी उपाध्यायमयूरी उपाध्याय

शेफाली श्रीवास्तव

लखनऊ। पिछले साल जर्मनी के हैनोवर में हुए मेक इन इंडिया प्रोग्राम में अपने डांस ग्रुप के साथ अपनी परफॉर्मेंस में पूरे भारत की झलक दिखाकर मयूरी उपाध्याय ने पूरे देश को गर्वित किया था। उनकी परफॉर्मेंस के चश्मदीद खुद प्रधानमंत्री मोदी बने थे जिन्हें मयूरी का प्रदर्शन बेहद पसंद आया था। बेंगलुरू से ताल्लुक रखने वाली 37 वर्षीय मयूरी मानती हैं कि नृत्य की प्रतिभा तो दक्षिण भारतीयों में जन्म से ही होती है। इसी साल रिलीज हुई फिल्म मिर्जिया में उनकी कोरियोग्राफी को भी तारीफ मिली थी। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंग-

मिर्जिया को अपना बॉलीवुड डेब्यू मानने वाली मयूरी बताती हैं, ‘एक दिन मुझे राकेश ओमप्रकाश मेहरा का कॉल आया था। वह चाहते थे कि उनकी अगली फिल्म मिर्जिया के लिए मैं कोरियोग्रापी करूं। मैं उनसे कहा कि मेरा बैकग्राउंड और ट्रेनिंग क्लासिकल डांस में हुई है। मेरा डांसिग स्टाइल भी इंडियन कंटेम्परेरी है इसलिए मैं रेगुलर बॉलीवुड डांस कोरियोग्राफ नहीं करती। उन्होंने बोला कि आप बस एक बार फिल्म की कहानी सुन लीजिए। मेरे लिए फिल्म की कहानी की खास रीडिंग रखी गई। राकेश जी ने मुझे पूरी कहानी सुनाई जो गुलजार साहब ने लिखी थी। कहानी सुनाने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि आपको रेगलुर बॉलीवुड स्टाइल करने की जरूरत नहीं है आप वो करिए जो आप करती आईं है या फिल्म के लिए कर सकती हैं। इस तरह पूरी प्रक्रिया शुरू हुई। इस फिल्म से राकेश ओमप्रकाश मेहरा, गुलजार साहब, शंकर अहसान लॉय जैसे बड़े कलाकार जुड़े थे जो अपने आप में पूर्ण हैं इसलिए फिल्म से जुड़ना मेरे लिए एक खास अट्रैक्शन था। सिर्फ बॉलीवुड में एंट्री करने के लिए ही यह फिल्म नहीं की।

मयूरी मानती हैं कि मिर्जिया न केवल हर्षवर्धन कपूर और सयामी खेर की डेब्यू फिल्म थी बल्कि मेरी कोरियोग्राफर के रूप में और मेरी डांस कंपनी की भी बॉलीवुड में पहली फिल्म थी। फिल्म के गानों में जो भी डांसर दिखे वे सभी प्रशिक्षित स्टेज डांसर्स थे सभी मेरी कंपनी के थे।

इस फिल्म में एक अलग बात थी कि नर्तक हीरो के पीछे नाचने वाली भीड़ नहीं थी बल्कि उनके माध्यम से फिल्म की पूरी कहानी कही गई थी। वे सभी कैरेक्टर्स को नरेट कर रहे थे। हम एक सूत्रधार और संदेशवाहक की तरह थे। इस फिल्म की तैयारी में मुझे डेढ़ साल का वक्त लगा। इस दौरान मेहरा साहब बेंगलुरू आते थे और हमारी तैयारी देखते थे।

इसी साल रिलीज हुई फिल्म मिर्जिया में मयूरी की कोरियोग्राफी को भी काफी तारीफ मिली।

फिल्मों में इन दिनों क्लासिकल डांस देखने को मिल रहा है

फिल्मों में क्लासिकल डांस को मिलती कम तरजीह के सवाल पर मयूरी बताती हैं, ‘बॉलीवुड डांस में कोई एक डांस फॉर्म नहीं होता बल्कि वह अलग-अलग तरह के डांस स्टाइल का कॉम्बिनेशन होता है। अगर आप भारतीय नृत्य के इतिहास में जाकर देखें तो उदय शंकर को समकालीन नृत्य का पितामह कहा जाता है। उन्होंने सिनेमाई डांस की शुरुआत की थी। 1948 में उनकी एक फिल्म आई थी- कल्पना, जिसे लिखा व डायरेक्ट उन्होंने ही किया था। आप जो भी स्टेज डांस या इंडियन डांस देखते हैं चाहे वह क्लासिकल हो या नॉन क्लासिकल वह बॉलीवुड को प्रभावित करता है। एक तरह से सिनेमाई डांस का स्रोत होता है।

‘मेरे लिए ये अवसरों की शुरुआत है। लोग पूछते हैं कि किस हीरो को कोरियोग्राफ करना चाहती हैं तो मेरे लिए तो हीरो से ज्यादा इंपॉर्टेंट स्क्रिप्ट है। जैसे संजय लीला भंसाली, मणिरत्नम, राकेश ओमप्रकाश मेहरा हों या राजकुमार हीरानी इनका सबका अपना स्टाइल है तो इनके साथ काम करना मेरा सपना है। दक्षिण भारत के संस्कार में यह होता है कि जब आप बड़े हो रहे होते हैं तो क्लासिकल डांस सीखना महत्वपूर्ण हो जाता है। वहां यह प्राकृतिक होता है। हर दूसरी लड़की को वहां भरतनाट्यम आता है।’
मयूरी उपाध्याय, क्लासिकल डांसर, कोरियोग्राफर

मेरा मानना है कि अब ऐसी फिल्में आ रही हैं जिसमें कहानी में विभिन्नता और इनोवेशन है। उनमें दोनों तरह के नृत्य का समावेशन है। जैसे संगीत में क्लब गाने और फोल्क गाने दोनों तरह के आ रहे हैं उसी तरह डांस में भी क्लासिकल और नॉन क्लासिकल डांस देखने को मिल रहा है। आप बाजीराव मस्तानी को ही ले लीजिए उसे बिरजू महाराज ने कोरियोग्राफ किया था। उसमें क्लासिकल डांस का समावेश था।

वंदे मातरम गाते हुए हाथों में तिरंगा लेकर किया था डांस

पिछले साल जर्मनी में हुए मेक इन इंडिया प्रोग्राम में मुझे 16 मिनट में 16 डांस फॉर्म दिखाने थे। इस प्रोग्राम में अलग-अलग डांस फॉर्म के लिए देशों से अलग-अलग डांस ट्रूप आए थे। हमने अपने डांस में भारत की विभिन्न संस्कृति की झलक को पेश किया था और आखिर में वंदे मातरम के वक्त हाथ में तिरंगा लेकर डांस किया था। वह पल काफी इमोशनल था मेरे लिए। मयूरी बताती हैं कि मेरा फोकस कि क्लासिकल डांस के साथ इंडियन डांस में कैसे आधुनिकता लाई जा सकती है, इसे और ग्लोबलाइज करना मेरा लक्ष्य है।

‘अमिताभ जी ने कहा था तूने बाबूजी की याद दिला दी’

इससे पहले अमिताभ बच्चन के 70 वें जन्मदिन में वह मधुशाला का आयोजन करने वाले थे जिसे कोरियोग्राफ करने के लिए उन्होंने मुझे चुना। उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया और जब मैं वहां गई तो वह मधुशाला की सीडीज के साथ मेरा इंतजार कर रहे थे। वह मेरे लिए काफी स्पेशल था। इसके बाद जब प्रोग्राम के बाद उन्होंने मुझे कहा कि बाबूजी की दी याद दिला दी। वह मेरे लिए बेस्ट कॉम्पिलिमेंट था। मयूरी ने बताया कि दिसंबर में गोवा में एक डांस फेस्टिवल होने वाला है जिसमें भारत के अलग-अलग राज्यों से लोग भाग लेंगे। इसमें वह सबसे उम्र की प्रतिभागी हैं। मयूरी बेंगलुरु स्थित एक डांस ट्रस्ट की संस्थापिका भी हैं।

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